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Kurukshetra News: सुबह-शाम सता रही शीतलहर, दिन में धूप से मिली राहत
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कुरुक्षेत्र। मौसम में बदलाव जारी है। सुबह-शाम की सर्दी और दिन में होने वाली धूप लोगों की सेहत पर विपरीत असर डाल रही है। उधर मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह बना रहेगा। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। वीरवार को न्यूनतम तापमान नौ डिग्री और अधिकतम 22.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को न्यूनतम अधिकतम तापमान 22.1 और न्यूनतम तापमान 11.1 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान
शुक्रवार को सुबह नौ बजे से ही धूप निकल आई, जिससे बाजार में चहल-पहल बढ़ी। लोग धूप का आनंद लेते नजर आए। पार्कों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या बढ़ी। जैसे ही शाम हुई तो तापमान गिरने लगा और सर्दी बढ़ गई। सुबह और शाम के समय ठंड का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है लेकिन दिन के समय तापमान बढ़ने से गर्मी का एहसास होने लगता है। ऐसे में गेहूं की फसल पर मार पड़ सकती है। तापमान में समय से पहले गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
तापमान में बढ़ोतरी गेहूं की फसल के लिए सही नहीं : डॉ. कर्मचंद
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि करीब डेढ़ माह से सर्दी चल रही है, जिसका गेहूं की फसल में फायदा दिखाई देने लगा लेकिन अब अचानक दिन के समय धूप खिलने लगी है तो तापमान भी बढ़ने लगा है, जो गेहूं की फसल के लिए सही नहीं है। इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। गेहूं की अच्छी फसल के लिए फरवरी माह तक ठंडा मौसम रहना जरूरी है।
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शुक्रवार को सुबह नौ बजे से ही धूप निकल आई, जिससे बाजार में चहल-पहल बढ़ी। लोग धूप का आनंद लेते नजर आए। पार्कों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या बढ़ी। जैसे ही शाम हुई तो तापमान गिरने लगा और सर्दी बढ़ गई। सुबह और शाम के समय ठंड का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है लेकिन दिन के समय तापमान बढ़ने से गर्मी का एहसास होने लगता है। ऐसे में गेहूं की फसल पर मार पड़ सकती है। तापमान में समय से पहले गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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तापमान में बढ़ोतरी गेहूं की फसल के लिए सही नहीं : डॉ. कर्मचंद
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि करीब डेढ़ माह से सर्दी चल रही है, जिसका गेहूं की फसल में फायदा दिखाई देने लगा लेकिन अब अचानक दिन के समय धूप खिलने लगी है तो तापमान भी बढ़ने लगा है, जो गेहूं की फसल के लिए सही नहीं है। इससे गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। गेहूं की अच्छी फसल के लिए फरवरी माह तक ठंडा मौसम रहना जरूरी है।
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