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प्राकृतिक खेती के लिए बनेगा क्लस्टर सिस्टम : श्याम सिंह

Mon, 18 May 2026 03:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 18 May 2026 03:17 AM IST
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Cluster system will be created for natural farming: Shyam Singh
कुरुक्षेत्र।गुरुकुल कुरुक्षेत्र में अधिकारियों की बैठक लेते कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा एवं राज
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में रविवार को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में किसानों और कृषि विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर प्राकृतिक खेती का विस्तार करने पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गुजरात मॉडल की तर्ज पर क्लस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा।
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इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को गुरुकुल स्थित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण केंद्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद किसानों को मास्टर ट्रेनर बनाकर गांव-गांव प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाया जाएगा। इस अवसर पर कृषिमंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ाने जा रही है।
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इसके तहत प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 150 किसानों के साथ कृषि विभाग के एक अधिकारी को जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 2000 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है। साथ ही प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री के लिए भी प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाएगी तथा सीपीआर मास्टर ट्रेनरों को सरकार की ओर से विशेष सहयोग राशि देने पर विचार किया जा रहा है।
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती केवल विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने भूमिगत जल एवं पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रासायनिक खेती के कारण जल, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
यदि समय रहते किसान प्राकृतिक खेती की ओर नहीं बढ़े, तो भविष्य में पीने योग्य पानी और उपजाऊ भूमि दोनों का संकट गहराएगा। राज्यपाल ने कहा कि गुजरात में आठ लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

उन्होंने इस धारणा को भी गलत बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम होता है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे किसानों को सच्चाई से अवगत कराएं और पूरी ईमानदारी के साथ इस पुनीत अभियान को सफल बनाने में सहयोग दें। संवाद
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