{"_id":"642f32e082e221a82e073474","slug":"climbing-news-kurukshetra-news-c-18-1-83878-2023-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"संयुक्त किसान मोर्चा लोगों को कर रहा गुमराह : चढ़ूनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संयुक्त किसान मोर्चा लोगों को कर रहा गुमराह : चढ़ूनी
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) कोई आंदोलन नहीं कर पाएगा। यह संगठन केवल लोगों का पैसा बर्बाद कर उन्हें गुमराह कर रहा हैं, जहां भी एसकेएम के कार्यक्रम हुए उसका नतीजा शून्य ही निकला है। एसकेएम केवल दिखावे की राजनीति कर रहा है। एसकेएम की सबसे बड़ी गलती किसानों को राजनीति से दूर रखना है, जबकि एसकेएम के नेता खुद राजनीति में लगे हुए हैं और राजनीतिक दलों के साथ जुड़े हैं।
जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सत्ता से बीमारी फैलती है और सत्ता से ही उसका इलाज होता है, इसलिए किसानी और खेती को बचाने के लिए किसानों को सक्रिय राजनीति में भागीदारी निभानी होगी। किसानों के हाथ में सत्ता होगी तो किसान अपने साथ सबका भला कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि अगर कोई कॉरपोरेट सरकार की बात नहीं मानता तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई को उसके पीछे लगाया जा रहा है। वहीं सरकार विपक्ष के नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करवाकर उनकी आवाज को दबाने का काम रही है। ऐसे में लोकतंत्र को बचाने के लिए किसानों को सक्रिय राजनीति में आना पड़ेगा। राजनीतिक रूप से किसानों को मजबूत होना होगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही एक और बैठक होगी, जिसमें कोई निर्णय लिया जा सकता है।
विज्ञापन
इससे पहले भाकियू और खाप संगठन की एक प्रदेश स्तरीय बैठक भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल की अध्यक्षता में जाट धर्मशाला में हुई। दोपहर 12 बजे से ढाई बजे तक चली इस बैठक में देश के हालात, राजनीति में किसानों की सक्रिय भूमिका, आगामी चुनाव और राजनीतिक विकल्प तलाशने पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही गेहूं के सीजन में खरीद और भुगतान पर भी विचार हुआ।
-- --
विज्ञापन
जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सत्ता से बीमारी फैलती है और सत्ता से ही उसका इलाज होता है, इसलिए किसानी और खेती को बचाने के लिए किसानों को सक्रिय राजनीति में भागीदारी निभानी होगी। किसानों के हाथ में सत्ता होगी तो किसान अपने साथ सबका भला कर सकेगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अगर कोई कॉरपोरेट सरकार की बात नहीं मानता तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई को उसके पीछे लगाया जा रहा है। वहीं सरकार विपक्ष के नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करवाकर उनकी आवाज को दबाने का काम रही है। ऐसे में लोकतंत्र को बचाने के लिए किसानों को सक्रिय राजनीति में आना पड़ेगा। राजनीतिक रूप से किसानों को मजबूत होना होगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द ही एक और बैठक होगी, जिसमें कोई निर्णय लिया जा सकता है।
विज्ञापन
इससे पहले भाकियू और खाप संगठन की एक प्रदेश स्तरीय बैठक भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल की अध्यक्षता में जाट धर्मशाला में हुई। दोपहर 12 बजे से ढाई बजे तक चली इस बैठक में देश के हालात, राजनीति में किसानों की सक्रिय भूमिका, आगामी चुनाव और राजनीतिक विकल्प तलाशने पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही गेहूं के सीजन में खरीद और भुगतान पर भी विचार हुआ।