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Kurukshetra News: धर्मनगरी में रहेगी छठ की धूम, नहाय-खाए से शुरू होगा पर्व
Tue, 05 Nov 2024 04:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 05 Nov 2024 04:16 AM IST
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में आज से चार दिवसीय छठ महापर्व की धूम रहेगी। इसके चलते लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। पर्व की तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं ने सोमवार को भी एक दिन पहले पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं अस्थाई दुकानों से श्रद्धालु टोकरी, गन्ना, नारियल, ठेकुआ, फल, प्रसाद सहित अन्य पूजन की सामग्री खरीदते नजर आए।
नहाय-खाय से पांच नवंबर से व्रत की शुरुआत होगा, जोकि चार दिन तक चलेगा। छठ पर्व में विशेष रूप से सूर्य उपासना का महत्व है और इस पर्व में व्रती बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास रखकर सूर्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं। छह नवंबर को व्रत का दूसरा दिन होगा, जिसे खरना कहा जाता है। इसमें वर्ती पूरा दिन व्रत रखती हैं तथा शाम को छठ मैया की पूजा कर गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर स्वयं भी वही प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद निर्जला व्रत शुरु होगा। व्रत के तीसरे दिन सूर्य को संध्या अर्घ्य और आठ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य की विधि से व्रत संपन्न होगा है।
इसी के चलते धर्मनगरी की सड़कों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो कई किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं। विभिन्न जिलों व राज्यों से भी इस व्रत के लिए लोग कुरुक्षेत्र पहुंचते हैं। ब्रह्मसरोवर तट पर व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बाजारों में भी खूब रौनक देखी जा रही है। वहीं ब्रह्मसरोवर पर मेले जैसा माहौल बना हुआ है। समर्पण और आस्था के इस पर्व में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। वहीं श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से साफ-सफाई और सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता कर दिए गए हैं।
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छठ महापर्व का केंद्र बनने लगी धर्मनगरी
धर्मनगरी छठ महापर्व का केंद्र बनती जा रही है, जिसमें हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचकर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते हैं। सेवा समिति हरियाणा के अध्यक्ष संतोष पासवान का कहना है कि छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए पूरे इंतजाम किए जाते हैं। पिछले दस से 15 सालों में 70 से 80 हजार श्रद्धालुओं की संख्या यहां बढ़ी है। इससे पहले पांच से छह हजार श्रद्धालु ही यहां पहुंचते थे। संख्या में वृद्धि का कारण प्रशासनिक और संस्थाओं द्वारा दी जाने वाली व्यवस्थागत सुविधाएं हैं। अब धर्मनगरी के साथ लगते सभी जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रत्येक वर्ष उनकी संस्था द्वारा श्रद्धालुओं के रहने खाने-पीने को लेकर व्यवस्था की जाती है। इस बार तीनों संस्थाएं संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैं, जिसमें मुख्यातिथि मुख्यमंत्री नायब सैनी पहुंच रहे हैं।
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व्रत रखने से बच्चों और परिवार में खुशहाली रहती है : गीता
महापर्व के चलते ही करनाल के तरावड़ी से गीता गुप्ता सोमवार काे ब्रह्मसरोवर पर स्नान करने अपने परिवार के साथ पहुंची। उन्होंने पर्व को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि इस व्रत में शुद्धता का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है। यह व्रत बेहद कठोर होता है लेकिन छठी मैया की कृपा से संतोष रहता है। व्रत रखने से बच्चों और परिवार में खुशहाली रहती है।
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नहाय-खाय से पांच नवंबर से व्रत की शुरुआत होगा, जोकि चार दिन तक चलेगा। छठ पर्व में विशेष रूप से सूर्य उपासना का महत्व है और इस पर्व में व्रती बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास रखकर सूर्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं। छह नवंबर को व्रत का दूसरा दिन होगा, जिसे खरना कहा जाता है। इसमें वर्ती पूरा दिन व्रत रखती हैं तथा शाम को छठ मैया की पूजा कर गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर स्वयं भी वही प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद निर्जला व्रत शुरु होगा। व्रत के तीसरे दिन सूर्य को संध्या अर्घ्य और आठ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य की विधि से व्रत संपन्न होगा है।
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इसी के चलते धर्मनगरी की सड़कों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो कई किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं। विभिन्न जिलों व राज्यों से भी इस व्रत के लिए लोग कुरुक्षेत्र पहुंचते हैं। ब्रह्मसरोवर तट पर व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बाजारों में भी खूब रौनक देखी जा रही है। वहीं ब्रह्मसरोवर पर मेले जैसा माहौल बना हुआ है। समर्पण और आस्था के इस पर्व में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। वहीं श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से साफ-सफाई और सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता कर दिए गए हैं।
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छठ महापर्व का केंद्र बनने लगी धर्मनगरी
धर्मनगरी छठ महापर्व का केंद्र बनती जा रही है, जिसमें हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचकर पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाते हैं। सेवा समिति हरियाणा के अध्यक्ष संतोष पासवान का कहना है कि छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए पूरे इंतजाम किए जाते हैं। पिछले दस से 15 सालों में 70 से 80 हजार श्रद्धालुओं की संख्या यहां बढ़ी है। इससे पहले पांच से छह हजार श्रद्धालु ही यहां पहुंचते थे। संख्या में वृद्धि का कारण प्रशासनिक और संस्थाओं द्वारा दी जाने वाली व्यवस्थागत सुविधाएं हैं। अब धर्मनगरी के साथ लगते सभी जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रत्येक वर्ष उनकी संस्था द्वारा श्रद्धालुओं के रहने खाने-पीने को लेकर व्यवस्था की जाती है। इस बार तीनों संस्थाएं संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैं, जिसमें मुख्यातिथि मुख्यमंत्री नायब सैनी पहुंच रहे हैं।
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व्रत रखने से बच्चों और परिवार में खुशहाली रहती है : गीता
महापर्व के चलते ही करनाल के तरावड़ी से गीता गुप्ता सोमवार काे ब्रह्मसरोवर पर स्नान करने अपने परिवार के साथ पहुंची। उन्होंने पर्व को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि इस व्रत में शुद्धता का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है। यह व्रत बेहद कठोर होता है लेकिन छठी मैया की कृपा से संतोष रहता है। व्रत रखने से बच्चों और परिवार में खुशहाली रहती है।