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शिक्षा के उद्देश्य की बदल दी तस्वीर

Mon, 05 Sep 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,सेवा सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला,सेवा सिंह Updated Mon, 05 Sep 2016 01:01 AM IST
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Changed the picture of the purpose of education, Kurukshetra
दलबीर सिंह - फोटो : Amar Ujala
नाम: दलबीर मलिक, पद : एलिमेंटरी हेडमास्टर, पहचान : राज्य शिक्षक से भी अधिक समाज सेवक। राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर के मुख्याध्यापक एवं थानेसर निवासी दलबीर मलिक हर दिन एक नई पहल करने के रूप में जाने जाने लगे हैं।
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वर्ष 1988 में संस्कृत शिक्षक के रूप में शिक्षण क्षेत्र में प्रवेश करते ही उन पर सबसे बेहतर शिक्षक साबित होने की धुन सवार हुई तो उनके पढ़ाए हर बच्चे का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। नई से नई विधा व तकनीक के सहारे छात्रों में ज्ञान की लौ जगाते हुए तत्कालीन सरकार ने उन्हें वर्ष 2007 में शिक्षक दिवस पर राज्य शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया। इसके बाद उनका हौसला और भी भी बढ़ता चला गया और हर दिन स्कूल प्रबंधन से भी बच्चों की पढ़ाई से अधिक लगाव रखने वाले दलबीर मलिक दूसरे अध्यापकों के लिए भी एक प्रेरणा बन गए।
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स्काउटिंग में दिलाई कुरुक्षेत्र को पहचान
दलबीर मलिक एक शिक्षक के तौर पर खरे उतरे तो उन्होंने जिला स्काउट अधिकारी की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। उनके नेतृत्व में ही कुरुक्षेत्र जिले की पहचान पूरे प्रदेश में बन पाई और वर्ष 2010 से 2014 तक लगातार प्रदेश भर में प्रथम रहा तो वर्ष 2015 में प्रदेश भर में दूसरे स्थान पर रहने का गौरव हासिल किया।
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बन गए शान-ए हरियाणा
कहने को तो दलबीर मलिक एलिमेंटरी हेडमास्टर हैं, लेकिन समाज सेवा का इतना जुनून कि वे  शान-ए हरियाणा साबित हुए। वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उन्हें समाज सेवा के चलते ही इस अवार्ड से सम्मानित किया है। यह उनका समाज सेवा का ही परिणाम है कि वे राज्य शिक्षक होने से भी अधिक समाजसेवक के रूप में पहचाने जाते हैं। हाल ही में समाज सेवा व शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के चलते ही उन्हें राष्ट्रीय संस्था अवंतिका ने नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पुरुषोत्तम रुपाला की ओर से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अवार्ड से सम्मानित किया है। इससे पूर्व कई सामाजिक संस्थाएं भी उनकी समाज सेवा को बड़ा सम्मान दे चुकी हैं।

हर क्षेत्र में बना दिया कारवां
दलबीर मलिक ने खुद अगुवाई कर स्काउट के सहयोग से रक्तदान, सड़क सुरक्षा, पौधारोपण व गांवों को खुले से शौच मुक्त बना जाने जैसे अभियान चलाकर जगह-जगह कारवां खड़े किए तो वहीं बिहार में बाढ़ पीड़ितों को स्काउट के सहयोग से 51 हजार की सहायता राशि दी। उत्तराखंड में आई त्रासदी के दौरान भी पूर्व कांग्रेस सरकार को एक लाख रुपये का चेक सौंपा तो नेपाल में आए भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को 2 लाख रुपये का चेक सौंपा।


पौधे लगे गमले कर रहे दान
जब पौधरोपण की धुन सवार हुई तो उन्होंने पौध लगे गमले ही दान करने की पहल शुरू कर दी। अपने स्कूल में दान किए ऐसे पौध लगे गमलों से पूरे स्कूल का वातावरण हरा-भरा एवं आकर्षक बन चुका है तो पूरे जिला भर में उनकी पहल का असर भी दिखाई देने लगा है। जहां दूसरे स्कूलों के शिक्षक इस स्कूल में भी ऐसे ही गमले दान करने लगे हैं तो कई दूसरे स्कूलों में भी यह पहल प्राथमिक स्तर पर आरंभ कर दी गई है।
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