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प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण बदलें : गोपाल आर्य
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कार्यक्रम में हिस्सा लेते केयू के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व अन्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। पर्यावरण हमें अन्न देता है, नदी जल देती है, सांस लेने के लिए वायु है। प्रकृति को पर्यावरण प्रदूषण से बचाने के लिए हमें उसके प्रति दृष्टिकोण को बदलना होगा। प्रकृति केवल मात्र उपभोग की वस्तु नहीं है। यह कहना है पर्यावरण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य का। वे रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पर्यावरण यूथ संसद-2022 नर्चरिंग एनवायरमेंट लीडर्स विषय पर आयोजित प्रतियोगिता के क्षेत्रीय चरण के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति के प्रति अपनापन लाना होगा। जल ही जीवन है, वायु प्राण देवता है और अन्न भगवान है। वर्तमान दौर में पर्यावरण संरक्षण के लिए मनुष्य को अपनी जीवनशैली को भी बदलना होगा। इससे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रतियोगिता में सवा सौ से अधिक प्रतिभागी भागीदारी कर रहे हैं। प्रतियोगिता का परिणाम सोमवार को घोषित किया जाएगा।
विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण गतिविधि समाज में जनजागरण व जन सहभागिता के माध्यम से विरोध नहीं विकल्प के आधार पर पर्यावरण का जन अभियान खड़ा करने का एक प्रयास है। पर्यावरण संरक्षण के उपायों की जानकारी हर स्तर तथा हर उम्र के व्यक्ति के लिए आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण की चेतना की सार्थकता तभी हो सकती है, जब हम अपनी नदियां, पर्वत, पेड़, पशु-पक्षी, प्राणवायु और हमारी धरती को बचाएंगे।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति तथा नए आविष्कारों की स्पर्धा के कारण आज का मानव प्रकृति पर पूर्णतया विजय प्राप्त करना चाहता है। इस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। प्रगति की दौड़ में आज का मानव अपनी सुख सुविधाओं के लिए कुछ भी करने को तैयार है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है। पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है।
कार्यक्रम के शिक्षक समन्वयक डॉ. दीपक राय ने मंच का संचालन किया। ऑनलाइन कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं पर्यावरण नोडल अधिकारी प्रो. अनिल वशिष्ठ, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के हरियाणा प्रांत के प्रभारी श्रीभगवान, विभिन्न विश्वविद्यालयों के पर्यावरण नोडल अधिकारी पद्मश्री कमल सिंह चौहान, सोहन लाल सैनी, केडीबी सदस्य सौरभ चौधरी, आईआईटी तिरुपति से डॉ. सुरेश जैन, प्रो. आर भास्कर, प्रो. स्मिता चौधरी, प्रो. विनोद कुमार, डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. पूजा अरोड़ा, डॉ. सुनील नैन व डॉ. संगीता सैनी सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया।
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कुरुक्षेत्र। पर्यावरण हमें अन्न देता है, नदी जल देती है, सांस लेने के लिए वायु है। प्रकृति को पर्यावरण प्रदूषण से बचाने के लिए हमें उसके प्रति दृष्टिकोण को बदलना होगा। प्रकृति केवल मात्र उपभोग की वस्तु नहीं है। यह कहना है पर्यावरण गतिविधि के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल आर्य का। वे रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पर्यावरण यूथ संसद-2022 नर्चरिंग एनवायरमेंट लीडर्स विषय पर आयोजित प्रतियोगिता के क्षेत्रीय चरण के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमें प्रकृति के प्रति अपनापन लाना होगा। जल ही जीवन है, वायु प्राण देवता है और अन्न भगवान है। वर्तमान दौर में पर्यावरण संरक्षण के लिए मनुष्य को अपनी जीवनशैली को भी बदलना होगा। इससे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रतियोगिता में सवा सौ से अधिक प्रतिभागी भागीदारी कर रहे हैं। प्रतियोगिता का परिणाम सोमवार को घोषित किया जाएगा।
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विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण गतिविधि समाज में जनजागरण व जन सहभागिता के माध्यम से विरोध नहीं विकल्प के आधार पर पर्यावरण का जन अभियान खड़ा करने का एक प्रयास है। पर्यावरण संरक्षण के उपायों की जानकारी हर स्तर तथा हर उम्र के व्यक्ति के लिए आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण की चेतना की सार्थकता तभी हो सकती है, जब हम अपनी नदियां, पर्वत, पेड़, पशु-पक्षी, प्राणवायु और हमारी धरती को बचाएंगे।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति तथा नए आविष्कारों की स्पर्धा के कारण आज का मानव प्रकृति पर पूर्णतया विजय प्राप्त करना चाहता है। इस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। प्रगति की दौड़ में आज का मानव अपनी सुख सुविधाओं के लिए कुछ भी करने को तैयार है। प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है। पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है।
कार्यक्रम के शिक्षक समन्वयक डॉ. दीपक राय ने मंच का संचालन किया। ऑनलाइन कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं पर्यावरण नोडल अधिकारी प्रो. अनिल वशिष्ठ, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के हरियाणा प्रांत के प्रभारी श्रीभगवान, विभिन्न विश्वविद्यालयों के पर्यावरण नोडल अधिकारी पद्मश्री कमल सिंह चौहान, सोहन लाल सैनी, केडीबी सदस्य सौरभ चौधरी, आईआईटी तिरुपति से डॉ. सुरेश जैन, प्रो. आर भास्कर, प्रो. स्मिता चौधरी, प्रो. विनोद कुमार, डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. पूजा अरोड़ा, डॉ. सुनील नैन व डॉ. संगीता सैनी सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया।