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चढूनी के आप से संबंध, पंजाब में जाकर दिलाएं किसानों को सूरजमुखी के अच्छे भाव : विर्क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jun 2023 02:33 AM IST
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Chadhuni's relationship with AAP, go to Punjab and get farmers good prices for sunflower: Virk
कुरुक्षेत्र। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी किसानों को गुमराह कर राजनीति कर रहे हैं। उनके संबंध आम आदमी पार्टी से अच्छे हैं। उनकी धर्मपत्नी ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से आप की टिकट पर चुनाव लड़ा था। ऐसे में वे हरियाणा के किसानों को गुमराह करने के बजाय पंजाब जाकर वहां के किसानों को अच्छे भाव दिलाएं।
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ये आरोप भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मनदीप सिंह विर्क ने लगाए। सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि हरियाणा को छोड़कर देश के सभी राज्यों में सूरजमुखी की फसल को लेकर किसानों का शोषण हो रहा है। यहां किसानों को देश में सबसे ज्यादा 4800 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसके साथ ही एक हजार रुपये प्रति क्विंटल भावांतर भाव भी तय किया गया है।
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उन्होंने पंजाब के किसानों के सूरजमुखी फसल बेचने के जे फार्म दिखाते हुए कहा कि पंजाब में किसानों को सूरजमुखी का भाव चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल रहा है। जबकि हरियाणा के किसानों के जे फार्म भी दिखाते हुए कहा कि शाहाबाद की मंडियों में सूरजमुखी का 4800 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसके अलावा भावांतर भरपाई योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति क्विंटल भावांतर भरपाई का भाव तय किया गया है यह भाव देश की सभी मंडियों से ज्यादा है।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 36,414 एकड़ के लिए 8,528 किसानों को अंतरिम भावांतर भरपाई राशि के रूप में 29 करोड़ 13 लाख 12 हजार रुपये की राशि डिजिटल माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजी। उन्होंने कहा कि बाजार मूल्य के बारे में एक विस्तृत अध्ययन चल रहा है और एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद महत्वपूर्ण घोषणा करेंगे।


पोर्टल ने बिगाड़ दिया सूरजमुखी का खेल, 17 हजार एकड़ रकबा फर्जी
सूरजमुखी को लेकर सरकार व किसान आमने-सामने हैं, लेकिन सूरजमुखी का यह खेल सरकार द्वारा ही खोले गए पोर्टल ने बिगाड़ दिया। किसान मोर्चा के सह मीडिया प्रमुख कर्णराज तूर ने यह राज खोला। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पहले पोर्टल पर किसानों ने सूरजमुखी की फसल के लिए 40 हजार एकड़ क्षेत्र को पंजीकृत किया था, लेकिन किसानों की मांग पर सरकार ने तीन दिन के लिए पोर्टल फिर से खोला, ताकि कुछ बचे हुए किसानों को भी मौका मिल सके। इन तीन दिनों के दौरान लगभग 17 हजार एकड़ क्षेत्र का फिर से पंजीकरण कराया गया। यह पाया गया कि पंजीकरण उस भूमि पर भी किया गया था जहां गेहूं जैसी कोई अन्य फसल भी बोयी गई थी। सत्यापन के बाद लगभग नौ हजार एकड़ क्षेत्र को हटाया गया और लगभग छह हजार एकड़ का सत्यापन अभी चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि पहली बार सूरजमुखी की फसल की खरीद भाजपा सरकार ने ही शुरू की थी। पिछले आठ वर्षों से सरकार सूरजमुखी की खरीद कर रही है। वर्तमान में, हरियाणा में सूरजमुखी की खरीद 4800 रुपये प्रति क्विंटल पर की जा रही है, जबकि पंजाब में 4000-4200 रुपये में खरीद हो रही है। इसलिए संदेह है कि पंजाब से भी हमारी मंडियों में फसल आ सकती है।
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