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पति की शहादत पर रोती हुई पत्नी बोली, पति देश के काम आया

Tue, 25 Oct 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला Updated Tue, 25 Oct 2016 12:35 AM IST
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विलाप करती परिवार की महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तानी सेना की ओर से रविवार देर रात को की गई गोलीबारी में जिले के पिहोवा निवासी सुशील कुमार शहीद हो गए हैं। सुशील कुमार बीएसएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। उनकी शहादत की खबर सुनकर जहां परिजन गम में डूब गए वहीं पिहोवा सहित पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। शहादत की सूचना मिलते ही सुबह से ही सुशील के घर पर नेताओं, धार्मिक, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग सांत्वना देने पहुंचे।

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सीमा सुरक्षा बल में हेड कांस्टेबल सुशील बीती रात जम्मू कश्मीर के आरएस पुरा में सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। सुशील के छोटे भाई संजय ने बताया कि उनका भाई जम्मू कश्मीर के आरएस पुरा में सीमा सुरक्षा बल की 127वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल के रूप में तैनात था। बीती रात सीमा पर हुई फायरिंग में उसे सीने पर गोली लगी। घायलावस्था में अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई।
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संजय ने बताया कि सुशील पिछले 24 साल से सीमा सुरक्षा बल में तैनात था। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती, विधायक जसविंद्र सिंह संधू, पूर्व मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, तहसीलदार अनिल  बंसल, पालिका प्रधान अशोक सिंगला, उपप्रधान दीपक अत्री,भाजपा नेता जयभगवान  शर्मा, हरमनदीप सिंह विर्क, सचिन मित्तल एवं धार्मिक संस्थाओं ने शहीद  सुशील कुमार की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया।
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पत्नी बोली पति आया देश के काम
सुशील की शहादत की खबर अलसुबह ही परिजनों को मिल चुकी थी। इसके बाद से ही घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि परिजनों को सुशील की शहादत पर गर्व है, लेकिन घर के सबसे बड़े बेटे को खोने का दुख भी हैं। सुशील की पत्नी सुनीता देवी भी बार-बार बेसुध हो रही है। हालांकि इस बीच उन्होंने पति की शहादत को नमन करते हुए कहा कि मेरा पति देश के काम आ गया, हालांकि उसकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती। सुशील के एक बेटा मोहित और एक बेटी महक हैं। 17 वर्षीय मोहित 12वीं कक्षा का विद्यार्थी है और 14 साल की महक दसवीं की छात्रा है।

भाई बहनों में सबसे बड़े थे सुशील
संजय ने बताया कि वे मूलत: हिमाचल के गुलैर कांगड़ा के रहने वाले हैं। लेकिन पिता यहां प्रितमपाल फारेस्ट गार्ड थे। ऐसे में उनका पूरा परिवार यहां आकर बस गया था। उसके पिता प्रितमपाल की पिछले वर्ष 23 फरवरी को मृत्यु हो गई थी। सुशील भाई बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी एक बहन मीनूरानी चंडीगढ़ में ब्याही गई है। जबकि दो छोटे भाई संजय और रमन कुमार हैं। संजय जूस की दुकान चलाते हैं, जबकि रमन फोरमेन का काम करता हैं। सुशील 1992 में बतौर कांस्टेबल बीएसएफ में भर्ती हुआ था।

बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे सुशील
संजय ने बताया कि सुशील दोनों बच्चों को लेकर हमेशा सोचते रहते थे। वह दोनों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे। साथ ही अपनी क्षमता के अनुरूप निर्णय लेने की सलाह भी बच्चों को देते थे। शायद इसी वजह से मोहित ने भी 11 वीं तक कॉमर्स विषय से पढ़ाई की और बाद में 12वीं आर्ट्स में आ गया। दोनों बच्चों का भी पिता को खोने से बुरा हाल है।


आज होगा अंतिम संस्कार
संजय ने बताया कि गांव के ही गिरीराज भी उनके साथ ही बीएसएफ में भर्ती हुए थे। सुशील का शव लेकर वह ही गांव आ रहे हैं। संजय ने बताया कि सूचना है कि शव दिल्ली लाया जा चुका है। देर रात तक या कल सुबह तक पिहोवा लाया जाएगा। इसके बाद यहां उनका दाह संस्कार किया जाएगा।

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