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विश्व एड्स दिवस स्वास्थ्य कर्मचारियों ने काला दिवस के रूप में मनाया
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कुरुक्षेत्र। विश्व एड्स दिवस को काला दिवस के रूप में मनाते स्वास्थ्य कर्मचारी।
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण यूनियन के आह्वान पर एड्स नियंत्रण कर्मचारियों ने विश्व एड्स दिवस को पहली बार काला दिवस के रूप में मनाया। विभाग से जुड़े कर्मचारी सुबह काले कपड़े पहनकर ड्यूटी पर पहुंचे। कर्मचारियों ने ब्लड बैंक के बाहर धरना दिया और सरकार पर मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी भी की।
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव ध्यान चंद, बलविंदर, निशा, अनीता, मीत, रामकुमार, वरुण कौशिक, गुरप्रीत सिंह, गुरचरण, गुरजीत कौर, नेहा, पूनम और हरदीप ने बताया कि विश्व एड्स दिवस को एड्स कंट्रोल विभाग के कर्मचारी जागरूकता दिवस के रूप में मनाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से 20 सालों से अनुबंधित कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। इसलिए वे इतने महत्वपूर्ण दिन को भी काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में एड्स नियंत्रण विभाग में काउंसिलिंग टेस्टिंग शुरू हुई तब अनुबंधित कर्मचारी को 6500 रुपये मिलते थे।
समय बदलने के साथ काम का बोझ तो बड़ा, लेकिन कर्मचारियों के मानदेय में नाम मात्र की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि एक दिसंबर 2017 में वेतन में बढ़ोतरी होगी, लेकिन 5 साल से इंतजार कर रहे कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में एक एआरटी सेंटर सहित पांच आईसीटीसी सेंटर में करीब 13 कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन्होंने लगातार कोविड काल में सेवाएं दी, लेकिन प्रदेश सरकार ने एनएचएम के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा देकर उन्हें 5 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी, लेकिन उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने मांग की कि सरकार एड्स नियंत्रण कर्मचारियों को समान काम समान वेतन दे।
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एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव ध्यान चंद, बलविंदर, निशा, अनीता, मीत, रामकुमार, वरुण कौशिक, गुरप्रीत सिंह, गुरचरण, गुरजीत कौर, नेहा, पूनम और हरदीप ने बताया कि विश्व एड्स दिवस को एड्स कंट्रोल विभाग के कर्मचारी जागरूकता दिवस के रूप में मनाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से 20 सालों से अनुबंधित कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। इसलिए वे इतने महत्वपूर्ण दिन को भी काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में एड्स नियंत्रण विभाग में काउंसिलिंग टेस्टिंग शुरू हुई तब अनुबंधित कर्मचारी को 6500 रुपये मिलते थे।
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समय बदलने के साथ काम का बोझ तो बड़ा, लेकिन कर्मचारियों के मानदेय में नाम मात्र की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि एक दिसंबर 2017 में वेतन में बढ़ोतरी होगी, लेकिन 5 साल से इंतजार कर रहे कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में एक एआरटी सेंटर सहित पांच आईसीटीसी सेंटर में करीब 13 कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन्होंने लगातार कोविड काल में सेवाएं दी, लेकिन प्रदेश सरकार ने एनएचएम के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा देकर उन्हें 5 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी, लेकिन उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने मांग की कि सरकार एड्स नियंत्रण कर्मचारियों को समान काम समान वेतन दे।
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