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Kurukshetra News: बारना गांव, 200 से ज्यादा फौजी, युवाओं में कूट-कूटकर भरी है देशभक्ति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 01:56 AM IST
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Barna village has more than 200 soldiers, the youth are full of patriotism
कुरुक्षेत्र। जिले के गांव बारना की पहचान फौजियों के गांव के रूप में होने लगी है। यहां युवाओं में जुनून ऐसा कि विदेशी डॉलर की खनक भी उन्हें आकर्षित नहीं कर पा रही है। गांव के अधिकतर युवा विदेश में जाकर डॉलर कमाने के बजाय फौजी बनकर सीमा पर देश की रक्षा करने को तव्वजो दे रहे हैं। यही कारण है कि सेना की होने वाली भर्तियों में गांव का कोई न कोई युवा सैनिक के तौर पर फिट हो रहा है। करीब पांच हजार मतदाताओं वाले इस गांव में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है और यही कारण है कि आज भी गांव के 200 से ज्यादा युवा फौजी बनकर देश की रक्षा में तैनात है। इससे भी ज्यादा युवा फौजी बनने के लिए सुबह-शाम सड़कों पर पसीना बहा रहा है। युवा फौजी बनकर न केवल गौरवांवित महसूस करते हैं बल्कि देश सेवा का जज्बा भी उन्हें यहां तक ले जाता है।
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युवाओं की इस सोच को देख गांव के बुजुर्गों तक में उत्साह है। 1990 के दशक से अब तक गांव के तीन लाल, हीरा लाल, लक्खी राम व सुरेंद्र कुमार देश की रक्षा में बलिदान दे चुके हैं, जिसके बावजूद युवाओं में जज्बा कम होने के बजाय बढ़ा है। आज भी गांव के पूर्व सैनिक ही नहीं आम बुजुर्ग तक देश के लिए हर बाजी लगाने को तैयार है।
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किसी का इकलौता तो किसी के दो से तीन बेटे फौजी
ग्रामीण बताते हैं कि अनेक ऐसे फौजी हैं, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। वहीं हरि सिंह, मियां सिंह, अजमेर, बलवंत सिंह व चंदगी राम जैसे अनेक लोग हैं, जिनके दो-दो बेटे सेना में तैनात है। गांव के दो युवक अग्निवीर भी बन चुके हैं।
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फौजी हर साल करते हैं भंडारा, युवाओं को देते हैं प्रशिक्षण
गांव बढ़ के पेड़ के नीचे बैठे बुजुर्ग पवन कुमार, राजपाल, ब्रिजलाल, ईश्वर दयाल, सतपाल तायल व फूल कुमार के साथ युवा सुरेंद्र कुमार का जज्बा किसी फौजी से कम नहीं था। भारत-पाकिस्तान के बने युद्ध के हालात पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यहां के लाल फौज को ही प्राथमिकता देते हैं। जुनून ऐसा है कि सभी फौजी हर साल गांव में अपने स्तर पर भंडारा कर एकता व भाईचारे का संदेश देते हैं और छुट्टी आने पर युवाओं को फौज की तरह प्रशिक्षण भी देते हैं, जिससे युवा फौजी बनने के लिए जल्दी तैयार हो रहे हैं। युद्ध के हालात के बीच आज भी सैकड़ों युवा फौजी बनने को तैयार है।


देश की आन न हो कम, डटे रहना
भारत-पाक के युद्ध के हालात के बीच माता-पिता व ग्रामीणों में फौजी जैसा उत्साह है। उक्त ग्रामीण बताते हैं कि बेटे देश की रक्षा में तैनात है तो माता-पिता व अन्य परिजन उन्हें कॉल कर यही संदेश दे रहे हैं कि देश की आन कम न होने देना, डटे रहना। ग्रामीणों ने चर्चा में कहा कि ऐसे हालात में देश के किसी काम आ सकें तो वे भी तैयार है। देश से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। भारत को अब करारा जवाब दे ही देना चाहिए।


2001 में शहीद हुए थे सुरेंद्र कुमार

24 नवंबर 2001 को जम्मू-कश्मीर के कारगिल सेक्टर के गांव जंगलपुरा में 9वीं जाट बटालियन के राइफलमैन सुरेंद्र कुमार शहीद हो गए थे। 25 अगस्त 1978 को माता धनी देवी व पिता रोनकी राम के घर में जन्में सुरेंद्र कुमार ने गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 10वीं तक पढ़ाई की थी। आज उनके नाम पर ही इस विद्यालय का नामकरण किया हुआ है और गांव का एक मुख्य द्वार भी उनके नाम पर बनाया जा रहा है। जून 1997 में वे आर्मड फोर्स में भर्ती हुए।


शहीद लक्खी राम ने 1971 के युद्ध में लिया था हिस्सा
गरदोरी देवी और प्रसन्ना राम के घर जन्में लक्खी राम चार अक्तूबर 1966 को आर्मी की यूनिट सीमा सड़क विकास मंडल में भर्ती हो गए थे। एक जनवरी 1990 को नए साल के दिन आर्मी की तरफ से एक तार आया कि लक्खी राम शहीद हो गए। बताया कि 27 दिसंबर 1989 को नागालैंड में घुसपैठियों की फायरिंग के दौरान एक गोली लक्खी राम के कंधे पर लगी, जिससे वे शहीद हो गए। उस वक्त लक्खी राम 1628 पीएनआर सीओवाई जनरल रोड इंजीनियरिंग फोर्स में सिपाही के पद कार्यरत थे। बारना निवासी देवीलाल के मुताबिक शहीद लक्खी राम ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भी हिस्सा लिया था





जाट बटालियन में राइफलमैन थे हीरालाल
जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जाट बटालियन के राइफल मैन हीरालाल का दो फरवरी 1967 को माता माड़ो देवी व पिता मानसिंह के घर जन्में हीरालाल सात अगस्त 1986 को आर्मी में सिपाही भर्ती हो गए। जबलपुर में ट्रेनिंग के बाद उन्हें जम्मू में भेज दिया गया। 17 जून 1990 को जब हीरालाल अपने फौजी उच्चाधिकारियों के साथ बस में वैष्णो देवी जा रहे थे तो पहाड़ी इलाके में हादसा हुआ। उनकी बस सैकड़ों फुट गहरी खाई में जा गिरी थी जिससे बस में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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