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सवा पांच लाख आहुतियों के साथ संपन्न हुआ पांच दिवसीय 25 वां बगलामुखी महायज्ञ
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मां पीतांबरा पीठ धनीरामपुरा में चल रहे पांच दिवसीय 25वें मां बगलामुखी महायज्ञ का सवा पांच लाख आहुतियों के साथ संपन्न हुआ। समापन कार्यक्रम में संत-महात्माओं के प्रवचन, कन्या पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
यज्ञाचार्य अभिषेक कुश सहित 41 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधिविधान व मंत्र उच्चारण के साथ सभी यजमानों से पूर्णाहुति डलवाई गई। महायज्ञ में सुरेंद्र पहलवान इस्हाक, मनीष कौशिक, राजू शर्मा सहित हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड से शामिल हुए श्रद्धालुओं द्वारा सवा पांच लाख आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की गई। यज्ञशाला सहित पूरा पंडाल मां पीतांबरा के प्रिय पीले रंग में रंगा दिखाई दे रहा था।
कार्यक्रम में पहुंची महामंडलेश्वर विद्या गिरी ने कहा कि जीवन में कैसा भी दुख और कष्ट आए पर भक्ति मत छोड़िए। कष्ट आता है तो क्या आप भोजन करना छोड़ देते हैं ? क्या बीमारी आती है तो आप सांस लेना छोड़ देते हैं ? नहीं तो फिर जरा सी परेशानी आने पर भक्ति करना क्यों छोड़ देते हैं। सही तरीके से जीवन यापन के लिए भजन और भोजन दोनों ही जरूरी है। भोजन छोड़ दोगे तो जिंदा नहीं रहेंगे और भजन छोड़ दोगे तो कहीं के नहीं रहेंगे।
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मंदिर के महंत भीम पुरी ने कहा कि हरियाणा, पंजाब व दिल्ली क्षेत्र में मां बगलामुखी की यह एकमात्र सिद्ध पीठ है, जिसे वैदिक मंत्रों व तांत्रिक विद्याओं द्वारा स्थापित किया गया है। मंदिर को भारतीय दक्षिण शैली में भव्य रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए किया गया यह महायज्ञ शत्रुओं पर विजय, मोक्ष की प्राप्ति असाध्य रोगों से मुक्ति एवं मनोकामना पूर्ण करने में यकीनन सिद्ध होगा।
मां बगलामुखी के कई स्वरूप हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। श्री संगमेश्वर धाम के महंत विश्वनाथ गिरि ने कहा कि धर्म ग्रंथों के अनुसार, यज्ञ के माध्यम से हर मनोकामना पूरी हो सकती है। धन प्राप्ति, कर्मों के प्रायश्चित, अनिष्ट को रोकने के लिए, दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए, रोगों के निवारण के लिए भारतीय संस्कृति में यज्ञ करने का विधान देवताओं के समय से है।
देवताओं को प्रसन्न करने तथा धन-धान्य की अधिक उपज आदि के लिए भी यज्ञ किए जाते हैं। मंदिर के प्रमुख सेवादार विकल चौबे ने आए हुए सभी मुख्य अतिथियों व संत-महात्माओं का अभिनंदन किया। इस अवसर पर षड्दर्शन साधु समाज के अध्यक्ष परमहंस ज्ञानेश्वर, महंत जगन्नाथ पुरी, स्वामी वेद पुरी, महंत वासुदेवानंद गिरी, महंत सर्वेश्वरी गिरी, स्वामी रोशन पुरी, बड़ा अखाड़ा के महंत महेश मुनि, विशाल दास, महंत चमन गिरी, महंत लाल गिरी, स्वामी खटवांग पुरी, महंत मनोहर गिरी, देवी शरण दास, स्वामी भूपेंद्र गिरी, महंत निर्भया गिरी, महंत कृष्ण पुरी, सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम, पूर्व मंत्री बलबीर सैनी, आशीष चक्रपाणि सहित अन्य मौजूद रहे।
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यज्ञाचार्य अभिषेक कुश सहित 41 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पूरे विधिविधान व मंत्र उच्चारण के साथ सभी यजमानों से पूर्णाहुति डलवाई गई। महायज्ञ में सुरेंद्र पहलवान इस्हाक, मनीष कौशिक, राजू शर्मा सहित हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड से शामिल हुए श्रद्धालुओं द्वारा सवा पांच लाख आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की गई। यज्ञशाला सहित पूरा पंडाल मां पीतांबरा के प्रिय पीले रंग में रंगा दिखाई दे रहा था।
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कार्यक्रम में पहुंची महामंडलेश्वर विद्या गिरी ने कहा कि जीवन में कैसा भी दुख और कष्ट आए पर भक्ति मत छोड़िए। कष्ट आता है तो क्या आप भोजन करना छोड़ देते हैं ? क्या बीमारी आती है तो आप सांस लेना छोड़ देते हैं ? नहीं तो फिर जरा सी परेशानी आने पर भक्ति करना क्यों छोड़ देते हैं। सही तरीके से जीवन यापन के लिए भजन और भोजन दोनों ही जरूरी है। भोजन छोड़ दोगे तो जिंदा नहीं रहेंगे और भजन छोड़ दोगे तो कहीं के नहीं रहेंगे।
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मंदिर के महंत भीम पुरी ने कहा कि हरियाणा, पंजाब व दिल्ली क्षेत्र में मां बगलामुखी की यह एकमात्र सिद्ध पीठ है, जिसे वैदिक मंत्रों व तांत्रिक विद्याओं द्वारा स्थापित किया गया है। मंदिर को भारतीय दक्षिण शैली में भव्य रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए किया गया यह महायज्ञ शत्रुओं पर विजय, मोक्ष की प्राप्ति असाध्य रोगों से मुक्ति एवं मनोकामना पूर्ण करने में यकीनन सिद्ध होगा।
मां बगलामुखी के कई स्वरूप हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। श्री संगमेश्वर धाम के महंत विश्वनाथ गिरि ने कहा कि धर्म ग्रंथों के अनुसार, यज्ञ के माध्यम से हर मनोकामना पूरी हो सकती है। धन प्राप्ति, कर्मों के प्रायश्चित, अनिष्ट को रोकने के लिए, दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए, रोगों के निवारण के लिए भारतीय संस्कृति में यज्ञ करने का विधान देवताओं के समय से है।
देवताओं को प्रसन्न करने तथा धन-धान्य की अधिक उपज आदि के लिए भी यज्ञ किए जाते हैं। मंदिर के प्रमुख सेवादार विकल चौबे ने आए हुए सभी मुख्य अतिथियों व संत-महात्माओं का अभिनंदन किया। इस अवसर पर षड्दर्शन साधु समाज के अध्यक्ष परमहंस ज्ञानेश्वर, महंत जगन्नाथ पुरी, स्वामी वेद पुरी, महंत वासुदेवानंद गिरी, महंत सर्वेश्वरी गिरी, स्वामी रोशन पुरी, बड़ा अखाड़ा के महंत महेश मुनि, विशाल दास, महंत चमन गिरी, महंत लाल गिरी, स्वामी खटवांग पुरी, महंत मनोहर गिरी, देवी शरण दास, स्वामी भूपेंद्र गिरी, महंत निर्भया गिरी, महंत कृष्ण पुरी, सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम, पूर्व मंत्री बलबीर सैनी, आशीष चक्रपाणि सहित अन्य मौजूद रहे।