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बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत : प्रो. सचदेवा
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभागियों को संबोधित करते कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग एवं पंजाबी विभाग की बाबा बंदा सिंह बहादुर चेयर के तत्वावधान में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (पंजाबी विंग) पंचकूला स्वतंत्रता सेनानी राजा अजीत सिंह लाडवा मेमोरियल ट्रस्ट और बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख संप्रदाय भारत के सहयोग से बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की जयंती के उपलक्ष्य में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की भारतीय इतिहास को देन विषय पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर केवल एक योद्धा ही नहीं बल्कि एक दूरदर्शी समाज सुधारक और न्यायप्रिय प्रशासक भी थे। इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर ने बाबा बंदा सिंह बहादुर को भारतीय इतिहास का महान योद्धा एवं समाज सुधारक बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि जम्मू कश्मीर के बाबा जतिंदर पाल सिंह सोढी, 10वें वंशज व वर्तमान गद्दीनशीन, डेरा बाबा बंदा बहादुर रियासी ने विवि में बाबा बंदा सिंह बहादुर चेयर को 10 लाख रुपये अनुदान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का योगदान न केवल सिख इतिहास तक सीमित है बल्कि वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक थे।
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मुख्य वक्ता वाइस चांसलर, देशभगत विश्वविद्यालय मंडी गोबिंदगढ़, प्रो. अमरजीत सिंह ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने किसानों, आम जनता और वंचित वर्ग को आत्मसम्मान और स्वराज्य का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश) ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की गाथा भारतीय इतिहास की अमर धरोहर है तथा उनकी शिक्षाएं आज के समाज के लिए भी प्रासंगिक हैं। डॉ. शिव शंकर सिंह पाहवा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख संप्रदाय भारत), स. हरपाल सिंह गिल (निदेशक, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला), स. लखविंदर पाल सिंह ग्रेवाल (अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी राजा अजीत सिंह लाडवा मेमोरियल ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र) ने भी अपने विचार साझा किए। सेमिनार की रूपरेखा डॉ. कुलदीप सिंह और मंच संचालन डॉ. लता खेड़ा सचदेवा ने किया।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए शोध पत्र
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. परमवीर सिंह, अध्यक्ष, सिख विश्वकोश विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विवि के डॉ. आंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह रहे। इस सत्र में डॉ. अनुराग शर्मा (गुरु नानक खालसा कॉलेज, यमुनानगर), डॉ. विरेन्द्र सिंह ढिल्लों (महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय, जगाधरी), डॉ. शालू बत्रा, डॉ. जगदीश, डॉ. गुरमीत, डॉ. धर्मवीर व डॉ. रेनू बालियान ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अपने शोध पत्रों में बाबा बंदा सिंह बहादुर के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर केवल एक योद्धा ही नहीं बल्कि एक दूरदर्शी समाज सुधारक और न्यायप्रिय प्रशासक भी थे। इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर ने बाबा बंदा सिंह बहादुर को भारतीय इतिहास का महान योद्धा एवं समाज सुधारक बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
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मुख्य अतिथि जम्मू कश्मीर के बाबा जतिंदर पाल सिंह सोढी, 10वें वंशज व वर्तमान गद्दीनशीन, डेरा बाबा बंदा बहादुर रियासी ने विवि में बाबा बंदा सिंह बहादुर चेयर को 10 लाख रुपये अनुदान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का योगदान न केवल सिख इतिहास तक सीमित है बल्कि वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक थे।
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मुख्य वक्ता वाइस चांसलर, देशभगत विश्वविद्यालय मंडी गोबिंदगढ़, प्रो. अमरजीत सिंह ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने किसानों, आम जनता और वंचित वर्ग को आत्मसम्मान और स्वराज्य का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री (पूर्व कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश) ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर जी की गाथा भारतीय इतिहास की अमर धरोहर है तथा उनकी शिक्षाएं आज के समाज के लिए भी प्रासंगिक हैं। डॉ. शिव शंकर सिंह पाहवा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख संप्रदाय भारत), स. हरपाल सिंह गिल (निदेशक, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला), स. लखविंदर पाल सिंह ग्रेवाल (अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी राजा अजीत सिंह लाडवा मेमोरियल ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र) ने भी अपने विचार साझा किए। सेमिनार की रूपरेखा डॉ. कुलदीप सिंह और मंच संचालन डॉ. लता खेड़ा सचदेवा ने किया।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए शोध पत्र
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. परमवीर सिंह, अध्यक्ष, सिख विश्वकोश विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विवि के डॉ. आंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह रहे। इस सत्र में डॉ. अनुराग शर्मा (गुरु नानक खालसा कॉलेज, यमुनानगर), डॉ. विरेन्द्र सिंह ढिल्लों (महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय, जगाधरी), डॉ. शालू बत्रा, डॉ. जगदीश, डॉ. गुरमीत, डॉ. धर्मवीर व डॉ. रेनू बालियान ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अपने शोध पत्रों में बाबा बंदा सिंह बहादुर के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।

कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभागियों को संबोधित करते कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा।