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Kurukshetra News: रोगियों के लिए नई उम्मीद बना आयुष विवि
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कुरुक्षेत्र। रोगी की नाड़ी जांचते चिकित्सक। विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली ने एक बार फिर खुद को कारगर साबित किया है। 13 वर्षों से ऑटोइम्यून हेमोलीटिक एनीमिया (एआईएचए) से जूझ रहे नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी एक रोगी को अब न तो खून चढ़वाने की जरूरत पड़ रही है और न ही वह थकान, कमजोरी या सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान है।
हालात ऐसे बन गए थे कि रोगी को एक समय में चार-चार यूनिट रक्त की चढ़वानी पड़ती थी। बावजूद इसके शरीर में बार-बार खून की कमी होना, बुखार, पीलिया, कमजोरी और सांस फूलना जैसी कई तरह की दिक्कतें रहना आम बात थी।
कई जगह भटकने के बाद रोगी कुरुक्षेत्र के सेक्टर-आठ स्थित श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के पंचकर्म विभाग में प्रो. राजा सिंगला के पास अपना इलाज कराने पहुंचा। यहां डॉ. सिंगला ने मरीज के खून की जांच करा बीमारी की नब्ज को पकड़ा और फिर आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार करके रोगी को स्वस्थ किया।
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दिल्ली के नजफगढ़ निवासी रविंद्र सिंह (43) पिछले 13 वर्षों से गंभीर एनीमिया से ग्रस्त थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें हर साल अस्पताल में भर्ती होकर चार यूनिट तक खून चढ़वाना पड़ता था, फिर भी हीमोग्लोबिन का स्तर कभी आठ ग्राम/डीएल से ऊपर नहीं गया। डॉक्टरों ने उन्हें जीवनभर दवा लेने और तिल्ली (स्प्लीन) हटाने की सलाह दी थी, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। रविंद्र का कहना है कि साल 2012 में पहली बार सांस फूलने लगी। जब जांच कराई तो शरीर में सिर्फ चार ग्राम/डीएल रक्त पाया गया। तब से लेकर 13 साल तक अस्पताल और दवाइयों के चक्कर चलते रहे। आशा की एक किरण तब जगी जब सोनीपत निवासी उसके मामा जो स्वयं भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के प्रो. राजा सिंगला से उपचार कराकर स्वस्थ हुए।
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कुरुक्षेत्र। आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली ने एक बार फिर खुद को कारगर साबित किया है। 13 वर्षों से ऑटोइम्यून हेमोलीटिक एनीमिया (एआईएचए) से जूझ रहे नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी एक रोगी को अब न तो खून चढ़वाने की जरूरत पड़ रही है और न ही वह थकान, कमजोरी या सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान है।
हालात ऐसे बन गए थे कि रोगी को एक समय में चार-चार यूनिट रक्त की चढ़वानी पड़ती थी। बावजूद इसके शरीर में बार-बार खून की कमी होना, बुखार, पीलिया, कमजोरी और सांस फूलना जैसी कई तरह की दिक्कतें रहना आम बात थी।
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कई जगह भटकने के बाद रोगी कुरुक्षेत्र के सेक्टर-आठ स्थित श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के पंचकर्म विभाग में प्रो. राजा सिंगला के पास अपना इलाज कराने पहुंचा। यहां डॉ. सिंगला ने मरीज के खून की जांच करा बीमारी की नब्ज को पकड़ा और फिर आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार करके रोगी को स्वस्थ किया।
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दिल्ली के नजफगढ़ निवासी रविंद्र सिंह (43) पिछले 13 वर्षों से गंभीर एनीमिया से ग्रस्त थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें हर साल अस्पताल में भर्ती होकर चार यूनिट तक खून चढ़वाना पड़ता था, फिर भी हीमोग्लोबिन का स्तर कभी आठ ग्राम/डीएल से ऊपर नहीं गया। डॉक्टरों ने उन्हें जीवनभर दवा लेने और तिल्ली (स्प्लीन) हटाने की सलाह दी थी, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। रविंद्र का कहना है कि साल 2012 में पहली बार सांस फूलने लगी। जब जांच कराई तो शरीर में सिर्फ चार ग्राम/डीएल रक्त पाया गया। तब से लेकर 13 साल तक अस्पताल और दवाइयों के चक्कर चलते रहे। आशा की एक किरण तब जगी जब सोनीपत निवासी उसके मामा जो स्वयं भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के प्रो. राजा सिंगला से उपचार कराकर स्वस्थ हुए।