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आयुर्वेद ने बदली कविता की जिंदगी: व्हीलचेयर छोड़कर अपने पैरों पर संभाली घर की कमान, पंचकर्म चिकित्सा का कमाल

Wed, 02 Jul 2025 03:11 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 02 Jul 2025 03:11 PM IST
सार

कविता को एक महीने के लिए विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां उन्हें महानारायण तेल से कटी बस्ति, ग्रीवा बस्ति, निरुह बस्ति और आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन कराया गया।

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Ayurveda changed Kavita life She left wheelchair and took charge of house on her own feet Panchkarma treatment
कविता और डॉ राजा सिंगला - फोटो : संवाद

विस्तार

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। कुरुक्षेत्र के गुमथला गांव की 35 वर्षीय कविता, जो रीढ़ की गंभीर बीमारी के कारण व्हीलचेयर पर निर्भर हो चुकी थीं, अब आयुर्वेद के चमत्कार से न केवल अपने पैरों पर चल रही हैं, बल्कि घर के सारे कामकाज भी संभाल रही हैं। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग ने बिना सर्जरी के कविता को नया जीवन दिया है।

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कविता की कहानी तब शुरू हुई जब साल 2014 में डिलीवरी के बाद उन्हें हल्का कमर दर्द हुआ। शुरुआत में दवाइयों से राहत मिली, लेकिन 2022 तक दर्द इतना बढ़ गया कि कविता चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं और व्हीलचेयर पर आ गईं। एमआरआई जांच में पता चला कि उनकी रीढ़ की हड्डी में एल-4 और एल-5 डिस्क बल्ज के साथ सेकेंडरी स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस की समस्या है, जिसके कारण रीढ़ पर दबाव पड़ रहा था। स्ट्रेट लेग रेजिंग (एसएलआर) टेस्ट में उनका पैर मात्र 10 डिग्री तक ही उठ पा रहा था।
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कविता के पति गुरदेव ने कुरुक्षेत्र, कैथल, दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला के तमाम विशेषज्ञों से संपर्क किया, लेकिन हर जगह सर्जरी की सलाह मिली। सर्जरी के डर से परेशान दंपती ने लगभग निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराने का मन बना लिया था। तभी उनकी मुलाकात श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला से हुई।डॉ. सिंगला ने कविता की स्थिति का गहन अध्ययन किया और आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा शुरू की।
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कविता को एक महीने के लिए विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां उन्हें महानारायण तेल से कटी बस्ति, ग्रीवा बस्ति, निरुह बस्ति और आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन कराया गया। उपचार के 25वें दिन से कविता की हालत में सुधार दिखना शुरू हुआ। अब 75 प्रतिशत रिकवरी के साथ कविता बिना सहारे चलने, उठने और घर के सभी काम करने में सक्षम हैं।


डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि कविता का केस आयुर्वेद की शक्ति का जीवंत उदाहरण है। डिस्क बल्ज और स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस जैसी जटिल बीमारी को बिना सर्जरी के ठीक करना एक बड़ी उपलब्धि है। परंपरागत चिकित्सा और धैर्य से चमत्कार संभव हैं।"कविता ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं फिर से अपने पैरों पर चल पाऊंगी। आयुर्वेद और डॉ. सिंगला की मेहनत ने मुझे नया जीवन दिया। उनके पति गुरदेव ने भी विश्वविद्यालय और डॉ. सिंगला का आभार जताया।

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