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Kurukshetra News: कलाकारों ने नाटक कालचक्र में दिखाया बुजुर्गों का दर्द

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 02:01 AM IST
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Artists showed the pain of the elderly in the drama Kalachakra
कला कीर्ति भवन में नाटक कालचक्र मंचन करते कलाकार।
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से शनिवार को कला कीर्ति भवन में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नाटक कालचक्र का मंचन किया गया। कला सृष्टि मंच कुरुक्षेत्र के कलाकारों की ओर से वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा के लेखन व निर्देशन में मंचित नाटक कालचक्र में बुजुर्ग माता-पिता की तड़प और अकेलेपन को दिखाने का प्रयास किया गया।
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मुख्यातिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. वीरेंद्र पाल रहे। नाटक कालचक्र एक बुजुर्ग दंपती धनपत और लीला के अकेलेपन की कहानी को दर्शाता है। नाटक में दिखाया गया कि धनपत और लीला अपने छोटे बेटे श्याम और बहू रेवती के साथ रहते हैं लेकिन आए दिन उन्हें अपने बेटे-बहू के ताने सुनने को मिलते हैं। अपने मां-बाप से परेशान श्याम अपने बड़े भाई नवीन को फोन करके मां-बाबू जी को अपने पास रखने को कहता है लेकिन नवीन अपनी समाजसेविका पत्नी शशि के डर के कारण अपने माता-पिता को रखने से मना कर देता है। दोनों बच्चों की अनदेखी और बेरुखी से परेशान होकर धनपत एक दिन अखबार में विज्ञापन देता है जिसमें वह अपनी पत्नी सहित स्वयं को गोद लेने की सिफारिश करता है।
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एक दिन एक पढ़े-लिखे दंपती डाॅ. बजाज और आशा विज्ञापन पढ़कर धनपत के घर आ जाते हैं और दोनों बुजुर्गों को माता-पिता के रूप में गोद लेने की बात करते हैं। धनपत के दोनों बेटे और बहुएं समाज में अपनी बेइज्जती का हवाला देते हुए इन्कार कर देते हैं लेकिन धनपत उनकी नहीं सुनता और पत्नी सहित उनके घर चले जाते हैं। वहां दोनों बुजुर्गों को खूब मान-सम्मान मिलता है लेकिन धीरे-धीरे बच्चों से बिछड़ने का गम भी बुजुर्ग दंपती को खोखला करता रहता है। एक दिन लीला की मौत हो जाती है और उसका सदमा धनपत भी नहीं सह पाता और अपने बच्चों को याद करते हुए दम तोड़ देता है।
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इस प्रकार नाटक बुजुर्ग के तिरस्कार और अनदेखी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का संदेश देता है। नाटक में धनपत का किरदार स्वयं बृज शर्मा ने निभाया। लीला की भूमिका रेणू खुग्गर ने अदा की। अन्य भूमिकाओं में जय भगवान सिंगला, दीपक कौशिक, नीरज आश्री, अन्नपूर्णा शर्मा, आशी क्षेत्रपाल, दीपक शर्मा, सत्यभूषण, साक्षी गौतम, सुरेखा, आशा सिंगला, शालिनी शर्मा, सुदेश मदान, नमिता, संजीव छाबड़ा, शशि अहलावादी, जयश्री, मानिनी सेतिया, भावना, सहदेव, स्वरित, सुशील, अमरजीत आदि ने सहयोग दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी व प्रेरणा संस्थान के संरक्षक डॉ. जयभगवान सिंगला ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में पैनोरमा के निदेशक डाॅ. सुरेश सोनी रहे।
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