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Kurukshetra News: युग परिवर्तन नाटक में कलाकारों ने दर्शाई देशप्रेम की नई परिभाषा
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कुरुक्षेत्र। कला परिषद और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के सहयोग से न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप ने युग परिवर्तन नाटक का मंचन किया। यह मंचन स्थापना दिवस की 17वीं वर्षगांठ पर उत्सव के दूसरे दिन हुआ। नाटक की पटकथा वर्तमान और फ्लैशबैक के तालमेल पर आधारित थी। इसकी शुरुआत में एक 70 वर्षीय देशभक्त दादा अपनी पोती काव्या को वंदे मातरम गीत की कहानी सुनाते हैं। रंगमंच सन् 1770 के बंगाल के भयावह अकाल में चला जाता है। उस समय लोग दाने-दाने को तरस रहे थे, जबकि क्रूर अंग्रेज अधिकारी जबरन लगान वसूलते थे। अत्याचार के खिलाफ आनंदमठ के संन्यासी योद्धा भवानंद और आम नागरिक तलवारें उठाकर अंग्रेजी सेना पर टूट पड़े।
अंग्रेजी सरकार में डिप्टी मजिस्ट्रेट बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम गीत लिखा। बंकिम बाबू और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी के संवादों ने देशप्रेम को नए सिरे से परिभाषित किया। नाटक में 19 साल के क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जेल यातनाएं दिखाई गईं। लंदन में मदन लाल ढींगड़ा ने ब्रिटिश अफसर कर्जन वायली को गोली मारी और वीर सावरकर ने अदालत में अपना बचाव किया। प्रो. शुचिस्मिता शर्मा ने कहा कि आजादी पुरखों के खून और अनगिनत बलिदानों की लंबी दास्तां है।
इन्होंने किया विभिन्न पात्रों का अभिनय
नाटक में दादा जी सागर शर्मा, पोती नव्या मेहता, बंकिम चंद्र, जेलर और जज डाॅ. राजीव, खुदीराम बोस और महेंद्र हितेश जंगम, भवानंद और मदन लाल ढींगड़ा चंचल शर्मा बने। राजलक्ष्मी और सीता की भूमिका अंजली धीमान, सावरकर और अंग्रेज अमरदीप जांगड़ा, वकील कपिल बत्रा, हरिराम गौरव दीपक जांगड़ा, माणिक आकाशदीप, अंग्रेज सूर्यांश चावला, लक्ष्य, सुमित, संन्यासी ध्रुवम, यश ने निभाई। प्रकाश व्यवस्था पवन भारद्वाज, रूप सज्जा यशु भारद्वाज की रही।
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अंग्रेजी सरकार में डिप्टी मजिस्ट्रेट बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम गीत लिखा। बंकिम बाबू और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी के संवादों ने देशप्रेम को नए सिरे से परिभाषित किया। नाटक में 19 साल के क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जेल यातनाएं दिखाई गईं। लंदन में मदन लाल ढींगड़ा ने ब्रिटिश अफसर कर्जन वायली को गोली मारी और वीर सावरकर ने अदालत में अपना बचाव किया। प्रो. शुचिस्मिता शर्मा ने कहा कि आजादी पुरखों के खून और अनगिनत बलिदानों की लंबी दास्तां है।
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इन्होंने किया विभिन्न पात्रों का अभिनय
नाटक में दादा जी सागर शर्मा, पोती नव्या मेहता, बंकिम चंद्र, जेलर और जज डाॅ. राजीव, खुदीराम बोस और महेंद्र हितेश जंगम, भवानंद और मदन लाल ढींगड़ा चंचल शर्मा बने। राजलक्ष्मी और सीता की भूमिका अंजली धीमान, सावरकर और अंग्रेज अमरदीप जांगड़ा, वकील कपिल बत्रा, हरिराम गौरव दीपक जांगड़ा, माणिक आकाशदीप, अंग्रेज सूर्यांश चावला, लक्ष्य, सुमित, संन्यासी ध्रुवम, यश ने निभाई। प्रकाश व्यवस्था पवन भारद्वाज, रूप सज्जा यशु भारद्वाज की रही।
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