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Kurukshetra News: प्रश्नपत्र में पंडित को अशोभनीय ऑप्शन में दिखाने पर ब्राह्मण समाज में रोष
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कुरुक्षेत्र। उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में 14 मार्च को पूछे गए सवालों में पंडित को अवसरवादी विकल्प के रूप में दर्शाने पर ब्राह्मण समाज में रोष व्याप्त है। इसके लिए समाज के लोगों ने विकृत मानसिकता जाहिर करने वालों के खिलाफ कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है।
इसी कड़ी में शहर के परशुराम दल ने गहरी नाराजगी जताते हुए प्रश्नपत्र बनाने वालों की सोच पर सवाल खड़ा किया। परशुराम दल के जिलाध्यक्ष डॉ. महावीर कौशल ने कहा कि पंडित को गलत अर्थ में प्रस्तुत करना अनुचित और अशोभनीय है। इस कृत्य की जितनी घोर निंदा की जाए कम है। यह मामला विद्वत व सम्मानित समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण समाज सदियों से ज्ञान, संस्कृति, सनातन परंपरा और वैदिक मूल्यों का संवाहक रहा है। सनातन और वैदिक परंपरा को स्थापित व संरक्षित रखने में अमूल्य योगदान दिया। पंडित शब्द भारतीय परंपरा में ज्ञान, विद्वता और सम्मान का प्रतीक है। ऐसे सम्मानित शब्द को प्रतियोगी परीक्षा में नकारात्मक अर्थ में प्रस्तुत करना अनुचित व अशोभनीय है। प्रतिष्ठित मंच पर ऐसे शब्द प्रयोग कर प्रश्न पत्र तैयार करने वालों की गंभीर लापरवाही और अज्ञानता दिखती है। प्रश्नपत्र समिति के सदस्यों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच करके दोषी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए निलंबन किया जाए। इस अपमानजनक प्रश्न के लिए जो भी जिम्मेदार हो, ब्राह्मण समाज से बिना शर्त माफी मांगे। परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र सत्यापन प्रक्रिया में संवेदनशीलता और सामाजिक-धार्मिक शब्दों की विशेष समीक्षा अनिवार्य की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय परशुराम दल की ओर से देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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इसी कड़ी में शहर के परशुराम दल ने गहरी नाराजगी जताते हुए प्रश्नपत्र बनाने वालों की सोच पर सवाल खड़ा किया। परशुराम दल के जिलाध्यक्ष डॉ. महावीर कौशल ने कहा कि पंडित को गलत अर्थ में प्रस्तुत करना अनुचित और अशोभनीय है। इस कृत्य की जितनी घोर निंदा की जाए कम है। यह मामला विद्वत व सम्मानित समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण समाज सदियों से ज्ञान, संस्कृति, सनातन परंपरा और वैदिक मूल्यों का संवाहक रहा है। सनातन और वैदिक परंपरा को स्थापित व संरक्षित रखने में अमूल्य योगदान दिया। पंडित शब्द भारतीय परंपरा में ज्ञान, विद्वता और सम्मान का प्रतीक है। ऐसे सम्मानित शब्द को प्रतियोगी परीक्षा में नकारात्मक अर्थ में प्रस्तुत करना अनुचित व अशोभनीय है। प्रतिष्ठित मंच पर ऐसे शब्द प्रयोग कर प्रश्न पत्र तैयार करने वालों की गंभीर लापरवाही और अज्ञानता दिखती है। प्रश्नपत्र समिति के सदस्यों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच करके दोषी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए निलंबन किया जाए। इस अपमानजनक प्रश्न के लिए जो भी जिम्मेदार हो, ब्राह्मण समाज से बिना शर्त माफी मांगे। परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र सत्यापन प्रक्रिया में संवेदनशीलता और सामाजिक-धार्मिक शब्दों की विशेष समीक्षा अनिवार्य की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय परशुराम दल की ओर से देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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