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Kurukshetra News: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना से दूर होंगे सभी कष्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:42 AM IST
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All troubles will go away by worshiping Lord Vishnu and Mother Lakshmi
कुरुक्षेत्र। शरद पूर्णिमा इस बार 16 अक्टूबर को है, जिसके चलते शुभ संयोग होने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से विशेष कृपा होती है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि के दिन पूजा-पाठ, स्नान-दान करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन शरद पूर्णिमा व्रत का पालन किया जाता है। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना का विधान है।
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शरद पूर्णिमा के दिन पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन चांद की चांदनी में खीर रखकर सुबह खाने से अनेक लाभ मिलते हैं और शरीर निरोग रहता है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर के दिन पड़ेगी। इस दिन पूर्णिमा तिथि और चंद्रमा पूरी रात भर रहेंगे। जबकि अगले दिन रात्रि में पूर्णिमा तिथि नहीं है। माना जाता है कि इस रात्रि आसमान से अमृत की बरसात होती है।
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शरद पूर्णिमा तिथि और चंद्रोदय
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर रात आठ बजकर 40 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 17 अक्टूबर शाम चार बजकर 55 मिनट पर होगा। शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ चंद्र देव की भी उपासना की जाती है। इसलिए इस वर्ष शरद पूर्णिमा व्रत का पालन 16 अक्टूबर बुधवार के दिन किया जाएगा।


शरद पूर्णिमा व्रत का क्या है महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा सभी 16 कलाओं से पूर्ण रहता है। भगवान श्री कृष्ण ही केवल एक ऐसे योगीराज हैं, जो 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं। शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु भगवान श्री कृष्ण और माता लक्ष्मी की उपासना के साथ-साथ चंद्र देव की उपासना का भी विधान है। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है।
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