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Kurukshetra News: चेक बाउंस मामले में तीनों दोषियों को किया प्रोबेशन पर रिहा
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कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दविंदर की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में सजा का आदेश पारित करते हुए दो महिलाओं सहित ओम प्रकाश को दोषी ठहराया है। पहली बार अपराधी होने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए प्रोबेशन (परिवीक्षा) पर रिहा कर दिया गया।
2017 में अदालत में दर्ज रघुबीर सिंह बनाम ओम प्रकाश के मामले में अदालत ने आरोपियों पर दोष सिद्ध किए थे। सजा पर बहस के दौरान दोषियों ने कहा कि उनके खिलाफ कोई पुराना मामला नहीं है। ओम प्रकाश ने बताया कि वे परिवार के इकलौते कमाने वाले हैं और उन पर दो अविवाहित बच्चों की जिम्मेदारी हैं। वहीं महिला दोषी ने भी दो अविवाहित बच्चों का हवाला दिया, दूसरी महिला ने खुद को अविवाहित बताया। सभी ने ट्रायल के दौरान उपस्थित रहने और कभी न भागने की बात कही। बचाव पक्ष के वकील ने प्रोबेशन की मांग की।
शिकायतकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया, कहा कि अपराध गंभीर है और कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने दोषियों के बयान, उम्र, चरित्र, पूर्व रिकॉर्ड और अपराध की प्रकृति को देखते हुए प्रोबेशन उपयुक्त माना। क्योंकि दोषी 2023 से ट्रायल का सामना कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि दोषी पहली बार अपराधी हैं और कोई सबूत नहीं कि वे आदतन अपराधी हैं। तीनों दोषियों को एक-एक 30 हजार रुपये के बांड और इतनी ही राशि के एक जमानती के साथ एक वर्ष की प्रोबेशन अवधि के लिए रिहा किया गया। इस दौरान शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
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2017 में अदालत में दर्ज रघुबीर सिंह बनाम ओम प्रकाश के मामले में अदालत ने आरोपियों पर दोष सिद्ध किए थे। सजा पर बहस के दौरान दोषियों ने कहा कि उनके खिलाफ कोई पुराना मामला नहीं है। ओम प्रकाश ने बताया कि वे परिवार के इकलौते कमाने वाले हैं और उन पर दो अविवाहित बच्चों की जिम्मेदारी हैं। वहीं महिला दोषी ने भी दो अविवाहित बच्चों का हवाला दिया, दूसरी महिला ने खुद को अविवाहित बताया। सभी ने ट्रायल के दौरान उपस्थित रहने और कभी न भागने की बात कही। बचाव पक्ष के वकील ने प्रोबेशन की मांग की।
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शिकायतकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया, कहा कि अपराध गंभीर है और कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने दोषियों के बयान, उम्र, चरित्र, पूर्व रिकॉर्ड और अपराध की प्रकृति को देखते हुए प्रोबेशन उपयुक्त माना। क्योंकि दोषी 2023 से ट्रायल का सामना कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि दोषी पहली बार अपराधी हैं और कोई सबूत नहीं कि वे आदतन अपराधी हैं। तीनों दोषियों को एक-एक 30 हजार रुपये के बांड और इतनी ही राशि के एक जमानती के साथ एक वर्ष की प्रोबेशन अवधि के लिए रिहा किया गया। इस दौरान शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
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