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ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर उत्तरी ध्रुव पर फहराया तिरंगा
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भारूलता पटेल का स्वागत करतीं प्रधानाचार्या उषा व अन्य स्टाफ सदस्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। भारतीय मूल की ब्रिटिश महिला सलो ड्राइविंग में हजारों किलोमीटर गाड़ी चलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली गुजरात के नवसारी की भारूलता पटेल शुक्रवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीपला में पहुंची। वहां वे छात्राओं के साथ रूबरू हुईं। इस अवसर पर प्रधानाचार्या उषा एवं समस्त स्टाफ ने उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वह ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर 14 देश घूम कर 10 हजार किलोमीटर के सफर के बाद उन्होंने उत्तरी ध्रुव पर भारत का तिरंगा लहराया। फिलहाल गुजरात में रह रहे भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक भारुलता के पति डॉ. सुबोध कांबले एक प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट यूरो-ओंको व रोबोटिक्स सर्जन हैं। भारूलता आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 15 अगस्त को भारत मिशन पर निकली हैं। वह पूरे भारत में 65 हजार किलोमीटर की यात्रा कर रहीं हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों बेटे प्रियम (16) और आरुष (14) भी उनके साथ मिशन भारत पर हैं। उनका लक्ष्य दुनिया भर में भारतीय मूल के बच्चों को उनके ब्रिटिश जन्म के बच्चों के माध्यम से उनके मूल देश (मातृभूमि) भारत से जोड़ना है। उन्हें अविश्वसनीय भारत, विविध संस्कृतियों, विरासत, हजारों साल प्राचीन इतिहास, मातृभूमि की एकता और विविधता दिखाना है।
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प्राध्यापिका केतकी राणा ने छात्राओं को कहा कि बेटियां किसी क्षेत्र में आज पीछे नहीं हैं । आज अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर दुनिया की किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम हैं। वे आगे आ रहीं हैं और अपने परिवारों, अन्य महिलाओं और समाज के लिए शांति और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में स्थापित कर रही हैं।
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कुरुक्षेत्र। भारतीय मूल की ब्रिटिश महिला सलो ड्राइविंग में हजारों किलोमीटर गाड़ी चलाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली गुजरात के नवसारी की भारूलता पटेल शुक्रवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कनीपला में पहुंची। वहां वे छात्राओं के साथ रूबरू हुईं। इस अवसर पर प्रधानाचार्या उषा एवं समस्त स्टाफ ने उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वह ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर 14 देश घूम कर 10 हजार किलोमीटर के सफर के बाद उन्होंने उत्तरी ध्रुव पर भारत का तिरंगा लहराया। फिलहाल गुजरात में रह रहे भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक भारुलता के पति डॉ. सुबोध कांबले एक प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट यूरो-ओंको व रोबोटिक्स सर्जन हैं। भारूलता आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 15 अगस्त को भारत मिशन पर निकली हैं। वह पूरे भारत में 65 हजार किलोमीटर की यात्रा कर रहीं हैं।
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उन्होंने बताया कि दोनों बेटे प्रियम (16) और आरुष (14) भी उनके साथ मिशन भारत पर हैं। उनका लक्ष्य दुनिया भर में भारतीय मूल के बच्चों को उनके ब्रिटिश जन्म के बच्चों के माध्यम से उनके मूल देश (मातृभूमि) भारत से जोड़ना है। उन्हें अविश्वसनीय भारत, विविध संस्कृतियों, विरासत, हजारों साल प्राचीन इतिहास, मातृभूमि की एकता और विविधता दिखाना है।
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प्राध्यापिका केतकी राणा ने छात्राओं को कहा कि बेटियां किसी क्षेत्र में आज पीछे नहीं हैं । आज अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर दुनिया की किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम हैं। वे आगे आ रहीं हैं और अपने परिवारों, अन्य महिलाओं और समाज के लिए शांति और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में स्थापित कर रही हैं।