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लंपी बीमारी को लेकर प्रशासन पूरी तरह सर्तक: सोनू राम
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उपमंडल अधिकारी नागरिक सोनू राम ने कहा कि लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम को लेकर प्रशासन व पशुपालन एवं डेयरी विभाग पूरी तरह से सतर्क है। उन्होंने कहा है कि पशुपालक सावधानी बरतें और लंपी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर पशुपालन विभाग के चिकित्सकों से तुरंत संपर्क करें।
एसडीएम सोनू राम ने कहा कि लंपी स्किन बीमारी एक वायरल बीमारी है, जो मक्खियों व मच्छरों के काटने से फैलती है। इसमें शुरू में दो-तीन दिन तक बुखार आता है। इसके बाद पशु के शरीर में गांठे बन जाती है। यह गांठे गोल व उभरी हुई होती है। इस बीमारी से पशु कमजोर हो जाता है व दूध उत्पादन कम हो जाता है। कभी- कभी पशु का गर्भपात भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाता है। यह बीमारी मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है तथा संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचाव हेतु गोशालाएं व पशुपालक संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखें। बीमार पशु का तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज शुरू करवाएं, पशुओं के बाड़े को साफ सुथरा रखें, स्वस्थ पशुओं को फिटकरी या लाल दवा से दिन मे दो बार नहलाएं, बीमार पशुओं को बाहर चरने न लेकर जाए, एक स्थान से दूसरे स्थान पर पशुओं को न लेकर जाएं तथा गोशालाओं में फॉगिंग करवाएं।
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एसडीएम सोनू राम ने कहा कि लंपी स्किन बीमारी एक वायरल बीमारी है, जो मक्खियों व मच्छरों के काटने से फैलती है। इसमें शुरू में दो-तीन दिन तक बुखार आता है। इसके बाद पशु के शरीर में गांठे बन जाती है। यह गांठे गोल व उभरी हुई होती है। इस बीमारी से पशु कमजोर हो जाता है व दूध उत्पादन कम हो जाता है। कभी- कभी पशु का गर्भपात भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, मुंह से पानी गिरना, भूख नहीं लगना, दूध उत्पादन में गिरावट, पशु के शरीर पर गांठे बनना जोकि फूट कर जख्म भी बन जाता है। यह बीमारी मक्खी-मच्छर व चीचड़ के माध्यम से, संक्रमित पशुओं की लार व दूषित चारा, पानी से फैलता है तथा संक्रमित पशु के स्वस्थ पशु के संपर्क में आने से भी फैलती है।
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उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचाव हेतु गोशालाएं व पशुपालक संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखें। बीमार पशु का तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज शुरू करवाएं, पशुओं के बाड़े को साफ सुथरा रखें, स्वस्थ पशुओं को फिटकरी या लाल दवा से दिन मे दो बार नहलाएं, बीमार पशुओं को बाहर चरने न लेकर जाए, एक स्थान से दूसरे स्थान पर पशुओं को न लेकर जाएं तथा गोशालाओं में फॉगिंग करवाएं।
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