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होटल, मैरिज पैलेस, ढाबा व रेस्टोरेंट को अपने लिक्विड वेस्ट वाटर को करना पड़ेगा ट्रीट
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होटल, मैरिज पैलेस, बैंक्वेट हॉल, ढाबा, रेस्टोरेंट, मोटल से निकलने वाले लिक्विड वेस्ट वाटर को ट्रीट करने के लिए वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना होगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के इस आदेश के बाद हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन संस्थानों को लिक्विड वेस्ट वाटर को ट्रीट करने के लिए नोटिस दे रहा है। इसके साथ ही इन संस्थानों को अग्निशमन विभाग से फायर संबंधी तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेनी होगी।
एनजीटी के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी हरकत में आ गया है। बोर्ड के अधिकारी शहर में दिन-प्रतिदिन होटल और रेस्टोरेंट की जांच कर रहे हैं। खामी पाए जाने पर संस्थान को नोटिस दिया जा रहा है। नोटिस देने के बाद भी कोई संस्थान आदेश नहीं मानता तो उस संस्थान को सील करने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस तरह की कार्रवाई बोर्ड पिपली स्थित दो होटल एच-5 और जश्न पर कर चुका है। इन दोनों होटल को बोर्ड ने सील कर दिया है।
जिलेभर में 200 से ज्यादा होटल, 50 से अधिक मैरिज पैलेस तथा छोटे-बड़े 400 से ज्यादा ढाबे हैं। इन संस्थानों से लिक्विड वेस्ट वाटर खुले और सीवरेज में छोड़ा जा रहा है, जिससे बीमारियां फैलने की अंदेशा बना हुआ है। वहीं जो खाना बचता है उसे फेंकने से मिथेन गैस बनती है। यह गैस पर्यावरण को दूषित करती है। इसलिए इन संस्थानों को वेस्ट वाटर के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना जरूरी है, ताकि लिक्विड वेस्ट वाटर को ट्रीट किया जा सके।
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अधिकतर संस्थानों की ओर से सीवरेज में लिक्विड वेस्ट वाटर छोड़ा रहा है। इसके लिए भी संस्थानों को संबंधित विभाग से एनओसी लेनी होगी। हालांकि सीवरेज में ऑयली और ग्रीस युक्त पानी न जाए उसके लिए उसे ट्रीट करना ही होगा।
एनजीटी के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बेहद सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। बोर्ड की ओर से शहर के 30 होटलों की जांच की जा चुकी है। वहीं बोर्ड की ओर से नीलकंठी यात्री निवास को भी नोटिस दिया गया। यह नोटिस गत सप्ताह शुक्रवार को दिया गया। नीलकंठ यात्री निवास को प्लांट लगाने सहित सभी नियम पूरे करने का नोटिस थमाया गया है। बावजूद तय समय पर नियम पूरे नहीं किए गए तो इसे भी सील किया जा सकता है।
बोर्ड की कार्रवाई को लेकर होटल संचालकों ने विधायक सुभाष सुधा से मुलाकात की। विधायक ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से होटलों के नियमों-कायदों के बारे में फीडबैक ली। उन्होंने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से भी औपचारिकताओं को पूरा करने के बारे में रिपोर्ट हासिल की। विधायक ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की अनुपालना प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए। सभी होटल, रेस्टोरेंट संचालकों व ढाबों संचालक अगले सात दिन के अंदर एनजीटी के नियमानुसार दस्तावेजों से संबंधित तमाम औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।
होटल एसोसिएशन के प्रधान बाबूराम टाया ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो साल से होटलों का कारोबार बंद ही पड़ा था। अब कुछ काम शुरू होने की उम्मीद है। एनजीटी के आदेशों का सभी संचालक पालन करेंगे। सरकार उन्हें कुछ रियायत दे ताकि उनका कारोबार रफ्तार पकड़ सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ अमित कुमार ने बताया कि शहर के करीब 30 होटलों की जांच करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। आदेश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी के आदेश का पालन करना ही होगा। हाल ही में नीलकंठी यात्री निवास को नोटिस भेजा गया है।
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एनजीटी के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी हरकत में आ गया है। बोर्ड के अधिकारी शहर में दिन-प्रतिदिन होटल और रेस्टोरेंट की जांच कर रहे हैं। खामी पाए जाने पर संस्थान को नोटिस दिया जा रहा है। नोटिस देने के बाद भी कोई संस्थान आदेश नहीं मानता तो उस संस्थान को सील करने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इस तरह की कार्रवाई बोर्ड पिपली स्थित दो होटल एच-5 और जश्न पर कर चुका है। इन दोनों होटल को बोर्ड ने सील कर दिया है।
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जिलेभर में 200 से ज्यादा होटल, 50 से अधिक मैरिज पैलेस तथा छोटे-बड़े 400 से ज्यादा ढाबे हैं। इन संस्थानों से लिक्विड वेस्ट वाटर खुले और सीवरेज में छोड़ा जा रहा है, जिससे बीमारियां फैलने की अंदेशा बना हुआ है। वहीं जो खाना बचता है उसे फेंकने से मिथेन गैस बनती है। यह गैस पर्यावरण को दूषित करती है। इसलिए इन संस्थानों को वेस्ट वाटर के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना जरूरी है, ताकि लिक्विड वेस्ट वाटर को ट्रीट किया जा सके।
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अधिकतर संस्थानों की ओर से सीवरेज में लिक्विड वेस्ट वाटर छोड़ा रहा है। इसके लिए भी संस्थानों को संबंधित विभाग से एनओसी लेनी होगी। हालांकि सीवरेज में ऑयली और ग्रीस युक्त पानी न जाए उसके लिए उसे ट्रीट करना ही होगा।
एनजीटी के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बेहद सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। बोर्ड की ओर से शहर के 30 होटलों की जांच की जा चुकी है। वहीं बोर्ड की ओर से नीलकंठी यात्री निवास को भी नोटिस दिया गया। यह नोटिस गत सप्ताह शुक्रवार को दिया गया। नीलकंठ यात्री निवास को प्लांट लगाने सहित सभी नियम पूरे करने का नोटिस थमाया गया है। बावजूद तय समय पर नियम पूरे नहीं किए गए तो इसे भी सील किया जा सकता है।
बोर्ड की कार्रवाई को लेकर होटल संचालकों ने विधायक सुभाष सुधा से मुलाकात की। विधायक ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से होटलों के नियमों-कायदों के बारे में फीडबैक ली। उन्होंने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से भी औपचारिकताओं को पूरा करने के बारे में रिपोर्ट हासिल की। विधायक ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की अनुपालना प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए। सभी होटल, रेस्टोरेंट संचालकों व ढाबों संचालक अगले सात दिन के अंदर एनजीटी के नियमानुसार दस्तावेजों से संबंधित तमाम औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।
होटल एसोसिएशन के प्रधान बाबूराम टाया ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो साल से होटलों का कारोबार बंद ही पड़ा था। अब कुछ काम शुरू होने की उम्मीद है। एनजीटी के आदेशों का सभी संचालक पालन करेंगे। सरकार उन्हें कुछ रियायत दे ताकि उनका कारोबार रफ्तार पकड़ सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ अमित कुमार ने बताया कि शहर के करीब 30 होटलों की जांच करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। आदेश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी के आदेश का पालन करना ही होगा। हाल ही में नीलकंठी यात्री निवास को नोटिस भेजा गया है।