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भगवान की भक्ति करने वाला मनुष्य को होता है वैकुंड प्राप्त : शास्त्री
Tue, 28 Apr 2026 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:45 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ कथावाचक अनिल शास्त्री। स्वयं
- फोटो : 1
कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित दयानंद कॉलोनी में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा जारी रही, जिसमें भागवत प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि तुंगभंगा नदी के किनारे के एक गांव था वहां पर आत्म देव नाम का एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी धुंधली रहती थी।
अनिल शास्त्री ने कहा आत्म देव तो सज्जन थे, लेकिन उनकी पत्नी दुष्ट प्रवृति की थी। आत्म देव की कोई संतान नहीं हो रही थी। आत्म देव ने बहुत बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए। एक दिन हताश होकर जंगल की तरफ आत्महत्या करने निकल गए। रास्ते में उन्हें एक ऋषि मिले और फिर आत्म देव ऋषि को अपनी कहानी सुना कर रोने लगे और उपाय पूछने लगे।
ऋषि ने कहा मेरे पास अभी तो ऐसा कुछ नहीं की, जिससे मैं तुम्हें कुछ दे पाऊं, लेकिन आत्म देव ने बताया की उसकी गाय को कोई बच्चा नहीं हो रहा है और जब आत्म देव ऋषि को बार बार बोलने लगे तो ऋषि ने उन्हें एक फल दिया और उसको अपनी पत्नी को खिलाने को कहा और कहा की एक साल तक तुम्हारी पत्नी को सात्विक जीवन जीना पड़ेगा।
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लेकिन धुंधली सोचती है अगर बच्चा हुआ तो उसको बहुत कष्ट का सामना करना पड़ेगा यही सोच कर वह उस फल को नहीं खाया और जाकर सारी बात अपने छोटी बहन को बताई तो उसकी बहन ने उसे एक रास्ता बताया और कहा की मैं गर्भवती हूं और मुझे बालक होने वाला है। यह बालक तू ही ले लेना और उस फल को गाय को खिला दे। इससे उस ऋषि की शक्ति का भी पता चल जाएगा। धुंधली ने ऐसा ही किया और अपने पति आत्म देव के सामने गर्भावस्था का नाटक करने लगी और कुछ दिन बाद जाकर अपने बहन से बच्चा लेकर आ गयी।
भागवत कथा के मुख्य आयोजक सुरेश मित्तल, सीमा मित्तल, अभिषेक मित्तल, शैली मित्तल, आशीष मित्तल, सोनाक्षी मित्तल, कनव मित्तल, तृषिका, काव्या मित्तल ने व्यासपीठ एवं अपने पितरों का पूजन किया।
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अनिल शास्त्री ने कहा आत्म देव तो सज्जन थे, लेकिन उनकी पत्नी दुष्ट प्रवृति की थी। आत्म देव की कोई संतान नहीं हो रही थी। आत्म देव ने बहुत बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए। एक दिन हताश होकर जंगल की तरफ आत्महत्या करने निकल गए। रास्ते में उन्हें एक ऋषि मिले और फिर आत्म देव ऋषि को अपनी कहानी सुना कर रोने लगे और उपाय पूछने लगे।
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ऋषि ने कहा मेरे पास अभी तो ऐसा कुछ नहीं की, जिससे मैं तुम्हें कुछ दे पाऊं, लेकिन आत्म देव ने बताया की उसकी गाय को कोई बच्चा नहीं हो रहा है और जब आत्म देव ऋषि को बार बार बोलने लगे तो ऋषि ने उन्हें एक फल दिया और उसको अपनी पत्नी को खिलाने को कहा और कहा की एक साल तक तुम्हारी पत्नी को सात्विक जीवन जीना पड़ेगा।
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लेकिन धुंधली सोचती है अगर बच्चा हुआ तो उसको बहुत कष्ट का सामना करना पड़ेगा यही सोच कर वह उस फल को नहीं खाया और जाकर सारी बात अपने छोटी बहन को बताई तो उसकी बहन ने उसे एक रास्ता बताया और कहा की मैं गर्भवती हूं और मुझे बालक होने वाला है। यह बालक तू ही ले लेना और उस फल को गाय को खिला दे। इससे उस ऋषि की शक्ति का भी पता चल जाएगा। धुंधली ने ऐसा ही किया और अपने पति आत्म देव के सामने गर्भावस्था का नाटक करने लगी और कुछ दिन बाद जाकर अपने बहन से बच्चा लेकर आ गयी।
भागवत कथा के मुख्य आयोजक सुरेश मित्तल, सीमा मित्तल, अभिषेक मित्तल, शैली मित्तल, आशीष मित्तल, सोनाक्षी मित्तल, कनव मित्तल, तृषिका, काव्या मित्तल ने व्यासपीठ एवं अपने पितरों का पूजन किया।

कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ कथावाचक अनिल शास्त्री। स्वयं- फोटो : 1