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सैंया भए कोतवाल से रंग उत्सव का आगाज, कलाकारों ने पेश किया शानदार अभिनय

Sun, 03 Mar 2019 10:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Mar 2019 10:58 PM IST
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सैंया भए कोतवाल से रंग उत्सव का आगाज, कलाकारों ने पेश किया शानदार अभिनय

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सिस्टम के भ्रष्टाचार पर की करारी चोट
- नाटक सैंयय भए कोतवाल से रंग उत्सव का आगाज
-पुलवामा शहीदों की शहादत को किया गया नमन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। भाई-भतीजावाद की नीति अपनाकर कोई भी लंबे समय तक अपने पांव नहीं जमा सकता। व्यवस्था में भ्रष्टाचार के जरिए पांव जमाने वाले लोग जब फंसते हैं तो कोई भी उनका सहारा नहीं बनता। ऐसा ही कुछ कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने रंग उत्सव में नाटक सैंया भए कोतवाल का मंचन कर दिखाया। मौका था न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप द्वारा रंग उत्सव का। उत्सव के पहले दिन मैक की ओर से संजय भसीन के निर्देशन में कलाकारों ने वसंत सबनीस के लिखे नाटक सैंया भए कोतवाल का मंचन किया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला तथा मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर के संयुक्त सहयोग से उत्सव के उद्घाटन पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डा. रामेंद्र सिंह बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री, विनोद कौशिक तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्या संतोष शर्मा रही। मंच संचालन डा. मोहित गुप्ता ने किया। शुभारंभ शहीदों को नमन करके किया गया। न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के सदस्य नरेश सगवाल तथा विकास शर्मा ने अतिथियों का आभार जताया।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे तीन दिवसीय रंग उत्सव में नाटक से पूर्व टैलेंट हंट कार्यक्रम हुआ। इसमें सिद्धार्थ, हिमांश भारद्वाज तथा पियूष ने मधुर गायकी से समां बांधा। वहीं नाटक में भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए दिखाया कि काबिल लोगों की बजाय सत्ता में भ्रष्ट लोग अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। तमाशा शैली में मंचित नाटक में सूर्यपुर नगर की कहानी को दिखाया गया। मूर्ख राजा रणधीरा के कोतवाल के मरने के बाद सभी को नए कोतवाल की चिंता लग जाती है, जिसका फायदा प्रधान उठाता है और अपने बेवकूफ साले को कोतवाल बना देता है। कोतवाल की भूमिका रंगकर्मी शिवकुमार किरमच ने निभाई। उन्होंने उम्दा कलाकारी से सभी को लोटपोट कर दिया। हवलदार की भूमिका में साजन कालड़ा, सिपाही गौरव दीपक जांगड़ा, मैनावती बनी पारुल कौशिक ने अभिनय की अनूठी छाप छोड़ी।
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