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मारकंडा नदी में डूबने से दो सगे भाईयों की मौत
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
शाहाबाद की मारकंडा नदी में डूबने से दो सगे नाबालिग भाइयों की मौत हो गई। दोनों भाइयों के शव एक दूसरे से लिपटे हुए बुधवार तड़के 5 बजे मारकंडा नदी में दामली गांव के पास खानपुर घाट से मिले हैं। दोनों बच्चों की पहचान पंकज 12 साल और शंकर 10 साल पुत्र रामसेवक निवासी शाहाबाद के रूप में हुई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
हालांकि दोनों बच्चों को नदी में नहाते किसी ने नहीं देखा लेकिन नदी किनारे मिली साइकिल व चप्पल से कयास लगाया गया है कि दोनों बच्चों की मौत डूबने से हुई है। उधर, बच्चों के पिता रामसेवक ने इस घटना में किसी पर शक नहीं जताया है। माता सरिता देवी का कहना है कि उनका परिवार शांति से यहां रह रहा था और किसी से किसी तरह का झगड़ा नहीं था। उनका परिवार बराड़ा रोड पर गाबा कोल्ड स्टोर के पास कालोनी में किराए के मकान में रहता है। मूल रूप से यह परिवार बिहार के मधुबनी जिले के लोकाठारी का रहने वाला है और पिछले करीब 10 साल से शाहाबाद में रह रहा है। पुलिस को दी शिकायत में मृतकों के पिता रामसेवक ने कहा कि उनके पुत्र पंकज तथा शंकर माजरी मोहल्ला फायर ब्रिगेड के पास स्थित सरकारी स्कूल में कक्षा 6 तथा 4 में पड़ते थे और मंगलवार को दोपहर 3 बजे स्कूल से घर पहुंचे थे। दोपहर का खाना खाने के बाद बच्चों की माता सरिता, पिता रामसेवक दिहाड़ी पर चले गए जबकि बड़ा भाई संतोष सुबह से ही काम पर गया हुआ था। घर में बच्चे अकेले थे और पंकज व शंकर घर पर अपनी छोटी बहन प्रियंका को घर छोड़कर घूमने निकल गए। रामसेवक ने बताया कि जब सायं 6 बजे तक दोनों घर नहीं पहुंचे थेे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की तथा कक्षा में पढ़ने वाले दोस्तों से भी संपर्क किया लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा।
रात 10 बजे के करीब परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी। जिस पर पुलिस व परिजन बच्चों की तलाश में जुट गई और ढूंढते-ढूंढते मारकंडा नदी के खानपुर घाट पर जा पहुंची। जहां नदी किनारे उन बच्चों की साइकिल व चप्पल मिली जिससे पुलिस व परिजनों ने यही अंदाजा लगाया कि बच्चे नदी में डूब गए हैं। अंधेरा होने के कारण नदी में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जिस पर परिजन तड़के 5 बजे नदी पर पहुंचे तो पंकज व शंकर के शव के एक दूसरे के साथ लिपटे हुए नदी में कबाड़ के साथ अटके दिखाई दे रहे थे। परिजनों ने अन्य लोगों की मदद से नदी में उतरे और शवों को बाहर निकालकर घर पर ले आए। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है और कार्रवाई शुरू कर दी है।
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नदी का जल स्तर कम था, लेकिन गड्ढे में डूब गए बच्चे
मारकंडा नदी का जल स्तर पिछले दिनों से अधिक नहीं है, लेकिन नदी में जिस जगह यह हादसा हुआ वहां घाट है और वहां पर ट्रैक्टरों का आना-जाना लगा रहता है। इस कारण वहां गड्ढे बने हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि बच्चे इन गड्ढों की दल-दल में धंसते चले गए हो और यहीं उनकी मृत्यु हो गई। थाना प्रभारी अजायब सिंह ने कहा कि बच्चों की मौत डूबने के कारण हुई और परिजनों ने इस बारे में किसी तरह की आशंका व शक जाहिर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं।
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शाहाबाद।
शाहाबाद की मारकंडा नदी में डूबने से दो सगे नाबालिग भाइयों की मौत हो गई। दोनों भाइयों के शव एक दूसरे से लिपटे हुए बुधवार तड़के 5 बजे मारकंडा नदी में दामली गांव के पास खानपुर घाट से मिले हैं। दोनों बच्चों की पहचान पंकज 12 साल और शंकर 10 साल पुत्र रामसेवक निवासी शाहाबाद के रूप में हुई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
हालांकि दोनों बच्चों को नदी में नहाते किसी ने नहीं देखा लेकिन नदी किनारे मिली साइकिल व चप्पल से कयास लगाया गया है कि दोनों बच्चों की मौत डूबने से हुई है। उधर, बच्चों के पिता रामसेवक ने इस घटना में किसी पर शक नहीं जताया है। माता सरिता देवी का कहना है कि उनका परिवार शांति से यहां रह रहा था और किसी से किसी तरह का झगड़ा नहीं था। उनका परिवार बराड़ा रोड पर गाबा कोल्ड स्टोर के पास कालोनी में किराए के मकान में रहता है। मूल रूप से यह परिवार बिहार के मधुबनी जिले के लोकाठारी का रहने वाला है और पिछले करीब 10 साल से शाहाबाद में रह रहा है। पुलिस को दी शिकायत में मृतकों के पिता रामसेवक ने कहा कि उनके पुत्र पंकज तथा शंकर माजरी मोहल्ला फायर ब्रिगेड के पास स्थित सरकारी स्कूल में कक्षा 6 तथा 4 में पड़ते थे और मंगलवार को दोपहर 3 बजे स्कूल से घर पहुंचे थे। दोपहर का खाना खाने के बाद बच्चों की माता सरिता, पिता रामसेवक दिहाड़ी पर चले गए जबकि बड़ा भाई संतोष सुबह से ही काम पर गया हुआ था। घर में बच्चे अकेले थे और पंकज व शंकर घर पर अपनी छोटी बहन प्रियंका को घर छोड़कर घूमने निकल गए। रामसेवक ने बताया कि जब सायं 6 बजे तक दोनों घर नहीं पहुंचे थेे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की तथा कक्षा में पढ़ने वाले दोस्तों से भी संपर्क किया लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा।
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रात 10 बजे के करीब परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी। जिस पर पुलिस व परिजन बच्चों की तलाश में जुट गई और ढूंढते-ढूंढते मारकंडा नदी के खानपुर घाट पर जा पहुंची। जहां नदी किनारे उन बच्चों की साइकिल व चप्पल मिली जिससे पुलिस व परिजनों ने यही अंदाजा लगाया कि बच्चे नदी में डूब गए हैं। अंधेरा होने के कारण नदी में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जिस पर परिजन तड़के 5 बजे नदी पर पहुंचे तो पंकज व शंकर के शव के एक दूसरे के साथ लिपटे हुए नदी में कबाड़ के साथ अटके दिखाई दे रहे थे। परिजनों ने अन्य लोगों की मदद से नदी में उतरे और शवों को बाहर निकालकर घर पर ले आए। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है और कार्रवाई शुरू कर दी है।
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नदी का जल स्तर कम था, लेकिन गड्ढे में डूब गए बच्चे
मारकंडा नदी का जल स्तर पिछले दिनों से अधिक नहीं है, लेकिन नदी में जिस जगह यह हादसा हुआ वहां घाट है और वहां पर ट्रैक्टरों का आना-जाना लगा रहता है। इस कारण वहां गड्ढे बने हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि बच्चे इन गड्ढों की दल-दल में धंसते चले गए हो और यहीं उनकी मृत्यु हो गई। थाना प्रभारी अजायब सिंह ने कहा कि बच्चों की मौत डूबने के कारण हुई और परिजनों ने इस बारे में किसी तरह की आशंका व शक जाहिर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं।