{"_id":"59fcbd1a4f1c1bce408b47ba","slug":"81509735706-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनुष्य के जीवन में रामनाम रूपी बैंक बैलेंस भी आवश्यक : अनिल शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनुष्य के जीवन में रामनाम रूपी बैंक बैलेंस भी आवश्यक : अनिल शास्त्री
Updated Sat, 04 Nov 2017 01:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनुष्य के जीवन में रामनाम रूपी बैंक बैलेंस भी आवश्यक : अनिल शास्त्री
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र ।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में रामनाम रूपी बैंक बैलेंस भी आवश्यक है। यही बैलेंस परलोक में उसके काम आएगा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नॉन टीचिंग क्लब सभागार में गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति की श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शास्त्री ने राजा परिक्षित के जन्म, भगवान विष्णु के अवतार, देवर्षि नारद का पूर्व चरित्र आदि प्रसंग सुनाए। कथा आयोजकों ने भागवत पूजन करके कथावाचक शास्त्री को तिलक लगाया।
प्रवचनों में शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत श्रवण करने से मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण होते है। पुण्यदायिनी भागवत कथा का आयोजन स्थल एक तीर्थ का रूप ले लेता है। तीर्थों में मर्यादा के अनुकूल ही रहना चाहिए। इससे तीर्थराज प्रसन्न होकर अपने स्थान के निवासियों को प्रत्येक आपत्ति से बचाते है। उन्होंने कहा कि सत्य परेशान तो होता है, किंतु पराजित नहीं होता। सत्य और धर्म का पालन करने वाले मनुष्यों की कभी पराजय नहीं होती। भागवत आरती में आचार्य श्रीकांत तिवारी, चिकित्साधिकारी डॉ. पी. कुमार, मदनगोपाल शर्मा, मदन कुमार रंगा, अजय चौधरी, हेमंत वधवा पिपली, विशाल, अमित, अशोक बंसल, ताराचंद जोशी, कृष्ण चंद सैनी, रणबीर, विष्णु दत्त, राजेश, दिनेश मित्तल, रीना चौधरी, सोना देवी, पुष्पा गौड़, सुनीता बिष्ट, आशा, सरिता भंडारी, मीनू, शोभा रावत, ज्ञान्ती देवी मौजूद रहे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र ।
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में रामनाम रूपी बैंक बैलेंस भी आवश्यक है। यही बैलेंस परलोक में उसके काम आएगा। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नॉन टीचिंग क्लब सभागार में गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति की श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शास्त्री ने राजा परिक्षित के जन्म, भगवान विष्णु के अवतार, देवर्षि नारद का पूर्व चरित्र आदि प्रसंग सुनाए। कथा आयोजकों ने भागवत पूजन करके कथावाचक शास्त्री को तिलक लगाया।
प्रवचनों में शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत श्रवण करने से मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण होते है। पुण्यदायिनी भागवत कथा का आयोजन स्थल एक तीर्थ का रूप ले लेता है। तीर्थों में मर्यादा के अनुकूल ही रहना चाहिए। इससे तीर्थराज प्रसन्न होकर अपने स्थान के निवासियों को प्रत्येक आपत्ति से बचाते है। उन्होंने कहा कि सत्य परेशान तो होता है, किंतु पराजित नहीं होता। सत्य और धर्म का पालन करने वाले मनुष्यों की कभी पराजय नहीं होती। भागवत आरती में आचार्य श्रीकांत तिवारी, चिकित्साधिकारी डॉ. पी. कुमार, मदनगोपाल शर्मा, मदन कुमार रंगा, अजय चौधरी, हेमंत वधवा पिपली, विशाल, अमित, अशोक बंसल, ताराचंद जोशी, कृष्ण चंद सैनी, रणबीर, विष्णु दत्त, राजेश, दिनेश मित्तल, रीना चौधरी, सोना देवी, पुष्पा गौड़, सुनीता बिष्ट, आशा, सरिता भंडारी, मीनू, शोभा रावत, ज्ञान्ती देवी मौजूद रहे।
विज्ञापन