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किसी भी पार्टी ने किसानों की मांगों का समर्थन नहीं किया तो अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारेगी भाकियू
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। लोकसभा चुनाव में किसानों की मांगों का जो भी राजनीतिक दल समर्थन करेगा, किसान उसी पार्टी को वोट देंगे। इसके उलट किसी दल द्वारा किसानों की मांगों के समर्थन में न आने पर देशभर के किसान नोटा का बटन दबा सकते हैं। इसके अलावा भाकियू देश भर में अपने प्रत्याशी भी चुनाव में उतार सकती है।
पिपली अनाज मंडी में रविवार को भारतीय किसान यूनियन की किसान-मजदूर राज रैली में मौजूद तमाम किसान नेताओं ने इसका एलान किया। इस रैली में भाकियू के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय नेता गुरनाम सिंह चढूनी, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह, पंजाब से सरदार बलबीर सिंह राजोवाल, कमांडो राम ईश्वर श्योराम, राजस्थान से इंद्रजीत सिंह पन्नीवाला, छत्तीसगढ़ से राजकुमार गुप्ता, कर्नाटक से देवकुमार, सुरेश कौथ सहित आदि मौजूद रहे।
रैली को संबोधित करते हुए वीएम सिंह ने कहा कि किसान आज भी कर्ज से दबकर आत्महत्या कर रहे है और वर्तमान केंद्र सरकार ने आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या ही वर्ष 2014 से जारी नहीं की है। किसान नेताओं ने गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाई। वहीं सरकार के अंतरिम बजट में भी दो हेक्टेयर जोत वाले किसानों को 6 हजार रुपये सलाना देने के बजटीय प्रावधान को मजाक बताया गया।
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रैली में किसान नेताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहाकि स्वामीनाथन आयोग के फार्मुले अनुसार सभी फसलों का भाव लागत से 50 फसीद अधिक दिया जाए। दूध, सब्जी, फल व अन्य सभी फसलों का एमएसपी तय किया जाए। सभी उत्पादों की एमएसपी पर खरीदने की गारंटी का कानून बनें, इससे कम भाव पर खरीद करने पर सजा का हो प्रावधान। सभी किसानों व मजदूरों का कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए। सभी उद्योगों व कंपनियों में न्यूनतम मजदूरी से कम पारिश्रमिक पर काम करवाना दंडनीय अपराध हो। बेरोजगारों को बिना ब्याज पांच लाख रुपयेे ऋण दिया जाए। रैली को भाकियू हरियाणा के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, पंजाब से बूटा सिंह, राजस्थान से रणजीत सिंह राजू, छत्तीसगढ़ से राजकुमार गुप्ता, बिहार से धीरेंद्र सिंह, कर्नाटक से देव कुमार, उत्तरप्रदेश से सतेंद्र सिंह, जल संर्घष समिति से दिलबाग सिंह हुडडा, भादसों गन्ना संर्घष समिति से रामकुमार चहल के अलावा अन्य किसान नेताओं ने भी संबोधित किया।
किसान- मजदूर राज रैली में विभिन्न प्रदेशों से आए किसान नेताओं के निशाने पर केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकारें रहीं। गुरनाम सिंह चढूनी से लेकर लगभग मौजूद सभी नेताओं ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया । पूरी रैली के दौरान आगामी चुनावों में भाजपा को सत्ता से दूर करने का लक्ष्य सभी वक्ता साधते रहे तो किसानों को एकजुट होने का आह्वान भी किया। इस दौरान सभी वक्ताओं ने गुरनाम सिंह चढूनी को किसानों की राजनीतिक कमान सौंपे जाने व आगामी चुनावों में उनके हाथ मजबूत करने का भी आह्वान किया।
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कुरुक्षेत्र। लोकसभा चुनाव में किसानों की मांगों का जो भी राजनीतिक दल समर्थन करेगा, किसान उसी पार्टी को वोट देंगे। इसके उलट किसी दल द्वारा किसानों की मांगों के समर्थन में न आने पर देशभर के किसान नोटा का बटन दबा सकते हैं। इसके अलावा भाकियू देश भर में अपने प्रत्याशी भी चुनाव में उतार सकती है।
पिपली अनाज मंडी में रविवार को भारतीय किसान यूनियन की किसान-मजदूर राज रैली में मौजूद तमाम किसान नेताओं ने इसका एलान किया। इस रैली में भाकियू के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय नेता गुरनाम सिंह चढूनी, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह, पंजाब से सरदार बलबीर सिंह राजोवाल, कमांडो राम ईश्वर श्योराम, राजस्थान से इंद्रजीत सिंह पन्नीवाला, छत्तीसगढ़ से राजकुमार गुप्ता, कर्नाटक से देवकुमार, सुरेश कौथ सहित आदि मौजूद रहे।
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रैली को संबोधित करते हुए वीएम सिंह ने कहा कि किसान आज भी कर्ज से दबकर आत्महत्या कर रहे है और वर्तमान केंद्र सरकार ने आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या ही वर्ष 2014 से जारी नहीं की है। किसान नेताओं ने गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाई। वहीं सरकार के अंतरिम बजट में भी दो हेक्टेयर जोत वाले किसानों को 6 हजार रुपये सलाना देने के बजटीय प्रावधान को मजाक बताया गया।
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रैली में किसान नेताओं ने सरकार से मांग करते हुए कहाकि स्वामीनाथन आयोग के फार्मुले अनुसार सभी फसलों का भाव लागत से 50 फसीद अधिक दिया जाए। दूध, सब्जी, फल व अन्य सभी फसलों का एमएसपी तय किया जाए। सभी उत्पादों की एमएसपी पर खरीदने की गारंटी का कानून बनें, इससे कम भाव पर खरीद करने पर सजा का हो प्रावधान। सभी किसानों व मजदूरों का कर्ज पूरी तरह माफ किया जाए। सभी उद्योगों व कंपनियों में न्यूनतम मजदूरी से कम पारिश्रमिक पर काम करवाना दंडनीय अपराध हो। बेरोजगारों को बिना ब्याज पांच लाख रुपयेे ऋण दिया जाए। रैली को भाकियू हरियाणा के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, पंजाब से बूटा सिंह, राजस्थान से रणजीत सिंह राजू, छत्तीसगढ़ से राजकुमार गुप्ता, बिहार से धीरेंद्र सिंह, कर्नाटक से देव कुमार, उत्तरप्रदेश से सतेंद्र सिंह, जल संर्घष समिति से दिलबाग सिंह हुडडा, भादसों गन्ना संर्घष समिति से रामकुमार चहल के अलावा अन्य किसान नेताओं ने भी संबोधित किया।
किसान- मजदूर राज रैली में विभिन्न प्रदेशों से आए किसान नेताओं के निशाने पर केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकारें रहीं। गुरनाम सिंह चढूनी से लेकर लगभग मौजूद सभी नेताओं ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया । पूरी रैली के दौरान आगामी चुनावों में भाजपा को सत्ता से दूर करने का लक्ष्य सभी वक्ता साधते रहे तो किसानों को एकजुट होने का आह्वान भी किया। इस दौरान सभी वक्ताओं ने गुरनाम सिंह चढूनी को किसानों की राजनीतिक कमान सौंपे जाने व आगामी चुनावों में उनके हाथ मजबूत करने का भी आह्वान किया।