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Kurukshetra News: तीन साल में 66 बच्चों के दिल में मिला छेद
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कुरुक्षेत्र। बेहतर चिकित्सा सुविधा व जागरूकता के बाद भी इन दिनों बीमारी के साथ शिशु पैदा हो रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिशु दिल के रोग के साथ जन्म ले रहे हैं। ऐसा खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से हुआ है। चिकित्सक इसके पीछे अनुवांशिक व गर्भावस्था के दौरान दवा के ज्यादा सेवन को बता रहे हैं। जिला अस्पताल अब तक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत करीब 400 बच्चों का इलाज करा चुका है।
विशेषज्ञों की माने तो देशभर में लगातार हृदय से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। एक रिसर्च के अनुसार हर 10 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। पिछले तीन साल में जिले में 60 बच्चों में दिल की बीमारी मिली है। बच्चों के दिलों में छेद मिला है। वहीं 2021 से 2025 तक 66 जन्मजात बच्चों के दिलों में छेद मिल चुका है, जिनका विभाग इलाज करा चुका है। जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी बीमारी है जो नवजात बच्चे में जन्म के दौरान से ही शरीर में मौजूद होती है। ये बीमारी आगे चलकर काफी खतरनाक साबित हो सकती है। अभी तक विभाग बच्चों के इलाज पर तीन करोड़ 28 लाख रुपये खर्च कर चुका है।
अनुवांशिक कारण दिल के छेद की मुख्य वजह : डॉ. अनिल त्यागी
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल त्यागी बताते हैं कि अनुवांशिक कारणों से जन्मजात हृदय रोग होने की संभावना ज्यादा रहती है। अगर माता पिता या उनके खून में किसी को भी जन्मजात हृदय रोग है तो होने वाले शिशु में भी ये बीमारी आसानी से देखी जा सकती है। कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कई तरह की दवाइयों का सेवन करती हैं। ऐसे में पैदा होने वाले बच्चों को जन्मजात दिल से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।
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योजना के तहत पांच साल तक के शिशु का नि:शुल्क इलाज
प्रदेश के जिला अस्पतालों में शून्य से पांच साल तक के बच्चों की जांच के लिए जिले में नौ टीमों का गठन किया गया है। टीमें आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों से डाटा जुटाकर जिला अस्पताल में बने डीआईसी सेंटर में जन्मजात रोगों की जांच के लिए बच्चों को भेजती हैं। उसके बाद बच्चों को ऑपरेशन आदि के लिए पीजीआई चंडीगढ़ व अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है।
अब सुन पा रहे मानविक व शौर्य
श्याम कॉलोनी वासी ढाई साल के मानविक सिलवाल के पिता मनीष बताते हैं बेटे को जन्मजात बहरापन था। दोनों कानों से सुन नहीं पाता था। जिला अस्पताल के स्टाफ सदस्यों ने चंडीगढ़ में इलाज कराया। अब मानविक सुन पाता है। वहीं सुनहेड़ी खालसा निवासी प्रदीप ने बताया उनका बेटा शौर्य पहले सुन नहीं पाता था ऑपरेशन के बाद अब बोल व सुन पाता है।
सांस लेने में होती थी दिक्कत अब ठीक
गुमती गांव निवासी प्रदीप ने बताया बच्चे को जन्मजात दिल की बीमारी थी। सांस लेने में दिक्कत होती थी जिसका जिला अस्पताल के माध्यम से चंडीगढ़ में इलाज हुआ। अब बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है।
नवजात शिशुओं की सेहत में हो रहा सुधार : डॉ. करुणा ढींगरा
उप सिविल सर्जन स्कूल हेल्थ डॉ. करुणा ढींगरा का कहना है कि सरकार की योजना के तहत पांच साल तक के जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चों का इलाज कराया जा रहा है। डायरेक्टर डॉ. सुखबीर सिंह के दिशा निर्देशानुसार केस बनाकर चंडीगढ़ भेजे जा रहे हैं। अभी तक करीब 400 नवजात ठीक हो चुके हैं।
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विशेषज्ञों की माने तो देशभर में लगातार हृदय से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। एक रिसर्च के अनुसार हर 10 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। पिछले तीन साल में जिले में 60 बच्चों में दिल की बीमारी मिली है। बच्चों के दिलों में छेद मिला है। वहीं 2021 से 2025 तक 66 जन्मजात बच्चों के दिलों में छेद मिल चुका है, जिनका विभाग इलाज करा चुका है। जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी बीमारी है जो नवजात बच्चे में जन्म के दौरान से ही शरीर में मौजूद होती है। ये बीमारी आगे चलकर काफी खतरनाक साबित हो सकती है। अभी तक विभाग बच्चों के इलाज पर तीन करोड़ 28 लाख रुपये खर्च कर चुका है।
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अनुवांशिक कारण दिल के छेद की मुख्य वजह : डॉ. अनिल त्यागी
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल त्यागी बताते हैं कि अनुवांशिक कारणों से जन्मजात हृदय रोग होने की संभावना ज्यादा रहती है। अगर माता पिता या उनके खून में किसी को भी जन्मजात हृदय रोग है तो होने वाले शिशु में भी ये बीमारी आसानी से देखी जा सकती है। कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कई तरह की दवाइयों का सेवन करती हैं। ऐसे में पैदा होने वाले बच्चों को जन्मजात दिल से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।
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योजना के तहत पांच साल तक के शिशु का नि:शुल्क इलाज
प्रदेश के जिला अस्पतालों में शून्य से पांच साल तक के बच्चों की जांच के लिए जिले में नौ टीमों का गठन किया गया है। टीमें आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों से डाटा जुटाकर जिला अस्पताल में बने डीआईसी सेंटर में जन्मजात रोगों की जांच के लिए बच्चों को भेजती हैं। उसके बाद बच्चों को ऑपरेशन आदि के लिए पीजीआई चंडीगढ़ व अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है।
अब सुन पा रहे मानविक व शौर्य
श्याम कॉलोनी वासी ढाई साल के मानविक सिलवाल के पिता मनीष बताते हैं बेटे को जन्मजात बहरापन था। दोनों कानों से सुन नहीं पाता था। जिला अस्पताल के स्टाफ सदस्यों ने चंडीगढ़ में इलाज कराया। अब मानविक सुन पाता है। वहीं सुनहेड़ी खालसा निवासी प्रदीप ने बताया उनका बेटा शौर्य पहले सुन नहीं पाता था ऑपरेशन के बाद अब बोल व सुन पाता है।
सांस लेने में होती थी दिक्कत अब ठीक
गुमती गांव निवासी प्रदीप ने बताया बच्चे को जन्मजात दिल की बीमारी थी। सांस लेने में दिक्कत होती थी जिसका जिला अस्पताल के माध्यम से चंडीगढ़ में इलाज हुआ। अब बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है।
नवजात शिशुओं की सेहत में हो रहा सुधार : डॉ. करुणा ढींगरा
उप सिविल सर्जन स्कूल हेल्थ डॉ. करुणा ढींगरा का कहना है कि सरकार की योजना के तहत पांच साल तक के जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चों का इलाज कराया जा रहा है। डायरेक्टर डॉ. सुखबीर सिंह के दिशा निर्देशानुसार केस बनाकर चंडीगढ़ भेजे जा रहे हैं। अभी तक करीब 400 नवजात ठीक हो चुके हैं।