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नादरस में शास्त्रीय गायन एवं तबले की थाप से बिखेरी संगीत की चमक

Sat, 16 Feb 2019 01:23 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 16 Feb 2019 01:23 AM IST
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नादरस में शास्त्रीय गायन एवं तबले की थाप से बिखेरी संगीत की चमक
फोटो नंबर - 10, 11
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तबला गुरु पंडित सुशील जैन को नादरस सम्मान
-विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान ने संगीत संध्या नादरस का किया आयोजन
- स्वर साधक डॉ. अलंकार सिंह की मधुर गायन प्रस्तुति काफी सराही गई
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान एवं आरुण्य के संयुक्त तत्वाधान में शास्त्रीय संगीत संध्या ‘नादरस’ आयोजित की गई। विद्या भारती के सभागार में प्रख्यात तबला गुरु एवं रचनाकार (पंजाब घराना) पंडित सुशील जैन को नादरस सम्मान से विभूषित किया गया। वहीं पटियाला विश्वविद्यालय से स्वर साधक डॉ. अलंकार सिंह की मधुर गायन प्रस्तुति काफी सराही गई। पंडित गणेश प्रसाद के शिष्य डॉ. अलंकार ने राग पूरिया कल्याण में विलंबित तथा द्रुत खयाल के अलावा राग बसंत प्रस्तुति देकर दीर्घकालिक शिक्षा की झलक पेश की। तबले पर उनका साथ डा. ज्ञान सागर तथा हारमोनियम पर तरुण जोशी ने दिया। पंडित किशन महाराज के शिष्य पंडित कृष्ण भागवत का एकल तबला वादन विशेष रूप से चर्चा में रहा। तबला वादन तथा शास्त्रीय गायन में समान रूप से दक्ष पंडित भागवत की बेहतरीन प्रस्तुति ने सभागार को स्वर लहरियों से गुंजायमान कर दिया। वादन की शुरुआत बनारस घराने के पारंपरिक अंदाज में पीर-गंभीर तथा सुंदर उठान से हुई। इसके बाद उपज अंग से आमद प्रस्तुत कर गुरुओं द्वारा प्राप्त विद्या का आभास कराया और छंद, कायदा, रेला तथा बनारसी फर्द, गत आदि की सर्वोत्कृष्ट प्रस्तुति द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
देर रात तक चले कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि मैक अंबाला मंडल के निदेशक संजय भसीन ने किया, जबकि विशिष्ट अतिथि प्रेरणा संस्था से जयभगवान सिंगला रहे। कार्यक्रम संयोजक एवं संस्थान निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह एवं आरुण्य के सचिव डॉ. सुशील कुमार ने अतिथियों को श्रीफल भेंट किया। भसीन ने कहा कि नादरस जैसे कार्यक्रम भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में सहायक हैं। बनारस और काशी का नाम संगीत के लिए अकसर सुनते हैं और कुरुक्षेत्र में ऐसी विधाएं देखना आयोजकों का सराहनीय प्रयास है। डॉ. रामेंद्र ने कहा कि संगीत की कोई जात-धर्म नहीं। ‘अलबेला सजन आयो’, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, मन तरपत हरि दर्शन को आज’ जैसे गानों का जिक्र करते हुए कहा कि ये गीत अलग-अलग धर्म-मजहब के बड़े-बड़े शास्त्रीय गायक भी गाते हैं। इस अवसर पर मंच संचालक डॉ. विवेक जैन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संगीत विभागाध्यक्षा प्रो. शुचिस्मिता शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्षा डॉ. शकुंतला नागर, डा. शशि मित्तल, डॉ. आईसी मित्तल, परीक्षा नियंत्रक डॉ. हुकम सिंह, कैप्टन परमजीत सिंह तथा डॉ. आर ऋषि सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद रहे।
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कत्थक नृत्यांगना सुरभि ने लिए डॉ. अलंकार से टिप्स
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अप्रैल माह में थाईलैंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कत्थक प्रस्तुति देने के लिए चयनित कुरुक्षेत्र की बेटी सुरभि काठपाल ने डॉ. अलंकार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने डा. अलंकार से स्वर साधना, स्टेज पर प्रस्तुति, गायन, वादन एवं नृत्य के समय खुद को कैसे संयमित रखें, सहित विभिन्न बारीकियों के टिप्स लिए। स्वर साधक से शिक्षा पाकर सुरभि सहित अन्य संगीत प्रेमी गदगद हुए और उन्होंने हर्ष जताकर डा. अलंकार का आभार व्यक्त किया।
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