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बैंक ने कर्जदार किसानों भेजे नोटिस, किसान भड़के
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:10 AM IST
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कर्जदार किसानों ने बैंक में ताला लगाकर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन।
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की भगवानपुर शाखा द्वारा दिए कर्ज तले दबे किसानों को कर्ज चुकाने के लिए परेशान करने व ऋण से चार गुना अधिक राशि के नोटिस भेजने के विरोध में किसान भड़क उठे। उन्होंने बैंक को ताला लगाकर धरना दिया तो जमकर रोष भी प्रकट किया। इस दौरान धरने की अध्यक्षता भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज किसान को 2 लाख रुपये का कर्जा लेने के लिए बैंक के पास 20 लाख की जमीन रहन करनी पड़ रही है, जबकि कारोबारियों को बैंकों के अधिकारियों के साथ सांठगांठ के चलते एक लाख की प्रापर्टी के बदले 2 लाख तक का कर्ज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश में बैंकों के शोषण के चलते कर्ज के बोझ तले दबे प्रतिवर्ष 15-20 हजार किसान आत्महत्याएं करने पर मजबूर हो रहे है। उन्होंने कहा कि विजय माल्या जैसे लोग देश के बैंकों का 12 हजार करोड़ रुपया हजम कर सरकार के आर्शीवाद से विदेशों में मौज उड़ा रहे है जबकि 25 हजार रुपये कर्ज लेने वाले किसानों को सरकार जेल में डाल कर डरा रही है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार अपने चुनावी वायदे के अनुसार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दे तो इसके लागू होने से किसानों को आत्म हत्याएं करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष ने घोषणा कि कि जब तक बैंक किसानों के साथ सर्वमान्य समझौता करके किसानों को राहत नहीं पहुंचाएगा भाकियू बैंक की भगवान पुर शाखा को खुलने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि आज सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज के तले डूब कर आत्म हत्याएं करने पर मजबूर हैं, लेकिन सरकार उनकी कोई सुध नहीं ले रही है। आज किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य नहीं मिल रहा है और उल्टा सरकार किसानों द्वारा अगली फसल की तैयारी के खेत तैयार करने के लिए धान के फानें जलाने वाले किसानों के खिलाफ केस दर्ज करने के अलावा उन पर जुर्माना लगाकर उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि वायुमंडल प्रदूषित होने के लिए किसान नहीं बल्कि उद्योगों व वाहनों से निकलने वाला धुआं जिम्मेदार है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन।
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की भगवानपुर शाखा द्वारा दिए कर्ज तले दबे किसानों को कर्ज चुकाने के लिए परेशान करने व ऋण से चार गुना अधिक राशि के नोटिस भेजने के विरोध में किसान भड़क उठे। उन्होंने बैंक को ताला लगाकर धरना दिया तो जमकर रोष भी प्रकट किया। इस दौरान धरने की अध्यक्षता भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज किसान को 2 लाख रुपये का कर्जा लेने के लिए बैंक के पास 20 लाख की जमीन रहन करनी पड़ रही है, जबकि कारोबारियों को बैंकों के अधिकारियों के साथ सांठगांठ के चलते एक लाख की प्रापर्टी के बदले 2 लाख तक का कर्ज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज देश में बैंकों के शोषण के चलते कर्ज के बोझ तले दबे प्रतिवर्ष 15-20 हजार किसान आत्महत्याएं करने पर मजबूर हो रहे है। उन्होंने कहा कि विजय माल्या जैसे लोग देश के बैंकों का 12 हजार करोड़ रुपया हजम कर सरकार के आर्शीवाद से विदेशों में मौज उड़ा रहे है जबकि 25 हजार रुपये कर्ज लेने वाले किसानों को सरकार जेल में डाल कर डरा रही है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार अपने चुनावी वायदे के अनुसार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कर दे तो इसके लागू होने से किसानों को आत्म हत्याएं करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष ने घोषणा कि कि जब तक बैंक किसानों के साथ सर्वमान्य समझौता करके किसानों को राहत नहीं पहुंचाएगा भाकियू बैंक की भगवान पुर शाखा को खुलने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि आज सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज के तले डूब कर आत्म हत्याएं करने पर मजबूर हैं, लेकिन सरकार उनकी कोई सुध नहीं ले रही है। आज किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य नहीं मिल रहा है और उल्टा सरकार किसानों द्वारा अगली फसल की तैयारी के खेत तैयार करने के लिए धान के फानें जलाने वाले किसानों के खिलाफ केस दर्ज करने के अलावा उन पर जुर्माना लगाकर उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि वायुमंडल प्रदूषित होने के लिए किसान नहीं बल्कि उद्योगों व वाहनों से निकलने वाला धुआं जिम्मेदार है।