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कुंटिया चुनाव को लेकर आमने-सामने हुए निवर्तमान कार्यकारिणी व अन्य ग्रुप
Updated Wed, 31 Oct 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ कार्यकारिणी का कार्यकाल 4 अक्तूबर को समाप्त हो चुका है। अब कर्ण सिंह व सुनील कक्कड़ ग्रुप सहित अन्य ग्रुप कुंटिया का चुनावी शेड्यूल जारी न करने का विरोध कर रहे हैं। इनका आरोप है कि कुंटिया की निवर्तमान कार्यकारिणी जानबूझ कर चुनाव नहीं करना चाहती।
चुनावी शेड्यूल जारी करने की मांग को लेकर कुंटिया ने मंगलवार को केयू के स्टूडेंट होम के पार्क में जरनल बॉडी की बैठक बुलाई। जरनल बॉडी की यह बैठक करीब सवा तीन घंटे चली। इस दौरान पांच बार जोरदार हंगामा हुआ। हंगामे के दौरान कर्मचारियों को संबोधित कर रही कर्मचारी नेत्री रजवंत कौर का कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने माइक छीन लिया। इस दौरान कर्ण सिंह व सुनील कक्कड़ ग्रुप ने विरोध कर बैठक का बहिष्कार करने का फैसला लिया। गुर्जर ग्रुप ने उन्हें मनाकर दोबारा बैठक में बैठा लिया। रजवंत कौर ने आरोप लगाया कि पिछले चार साल से कुंटिया की कार्यकारिणी द्वारा उनकी आवाज को दबाया गया। कभी किसी ने बोलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए एक कमेटी का गठन किया जाए। जो चुनाव का फैसला लें। बैठक में कर्ण सिंह ग्रुप व सुनील कक्कड़ ग्रुप ने कुंटिया के निवर्तमान प्रधान रामकुमार गुर्जर सहित समस्त कार्यकारिणी पर गंभीर आरोप लगाए।
कार्यकारिणी की गतिविधियों से कुंटिया 40 साल पीछे गई
एसकेएस के पूर्व प्रधान संत कुमार ने कहा कि कर्मचारी हड़ताल करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन कार्यकारिणी ने 27 अगस्त से हड़ताल करने का फैसला लिया, जिसका हर्जाना कर्मचारियों ने 3 से 10 हजार रुपये तक का भुगता। उन्होंने आरोप लगाया है कि कार्यकारिणी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए विधायक सुभाष सुधा को मांगों पर सहमति बनाने के लिए बुलाया था। विधायक सुधा ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि वे कर्मचारियों का वेतन नहीं कटने देंगे, लेकिन विधायक ने डेढ़ माह तक भी कोई मांग पूरी नहीं कराई। विधायक ने कर्मचारियों को सिर्फ गुमराह किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 26 अक्तूबर को हड़ताल कर रहे रोडवेज कर्मियों को समर्थन देने पहुंचे कुंटिया पदाधिकारी दाएं बाएं हो गए। कार्यकारिणी की इस प्रकार की गतिविधियों से कुंटिया 40 वर्ष पीछे चली गई है। इस दौरान गुर्जर ग्रुप ने हंगामा किया।
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15 बाद कार्यकारिणी को कार्यालय में न बैठने देने की चेतावनी
पूर्व महासचिव भारत भूषण शर्मा ने कहा कि कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुंटिया कार्यालय गए थे, लेकिन वहां बेइज्जत कर बाहर निकाल दिया गया। कर्मचारी नई कार्यकारिणी का चुनाव कराना चाहते हैं। इस कार्यकारिणी को 4 अक्तूबर से पहले चुनाव का शेड्यूल जारी करना चाहिए था, लेकिन अभी तक इनकी नीयत में चुनाव करना नहीं है। केयू प्रशासन ने सिर्फ हड़ताल के लिए स्टे लिया था न कि चुनाव के लिए। ये नहीं चाहते कि कुंटिया का चुनाव हो। उन्होंने कहा कि यदि यह कार्यकारिणी 15 दिनों में चुनाव का शड्यूल नहीं लेकर आए तो कार्यकारिणी को कार्यालय में बैठने नहीं देंगे।
जब पूर्व प्रधान माइक छोड़ चल पड़े
इसके बाद जब पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़ कर्मचारियों को संबोधित करने लगे तो निवर्तमान प्रधान रामकुमार गुर्जर सहित अन्य पदाधिकारी साइड में खड़े होकर चर्चा करने लेगे। इस दौरान कक्कड़ मैं अपनी बात न रखू....बोल माइक छोड़कर चल पड़े। इस दौरान कक्कड़ ग्रुप ने कड़ा रोष जताया। कक्कड़ ने सवाल उठाया कि यह कार्यकारिणी 4 से 30 अक्तूबर तक कैसे कुंटिया चला सकती है। अब इस कार्यकारिणी को कुंटिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। कार्यकारिणी चुनाव का शेड्यूल लेकर आए, कुंटिया चुनाव करवा सकती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कर्मचारियों की एक एडहॉक कमेटी बनाने की मांग की है। जो चुनाव का फैसला ले सके।
कुंटिया के 37 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ चल रहा कोर्ट केस
बैठक का मंच संचालन कर रहे निवर्तमान महासचिव नीलकंठ शर्मा ने कहा कि कुंटिया के 37 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कोर्ट केस चला हुआ है। केयू प्रशासन कुंटिया के प्रति अड़ियल रवैया अपना रहा है। संगठन पर तलवार लटकी हुई है। हम अपने संगठन को बचाना चाहते है। जो कर्मचारी चुनाव कराना चाहता है। वो अपनी जिम्मेदारी लें। जिस समय जरनल बॉडी कहेगी कि चुनाव करना है तभी शड्यूल जारी कर दिया जाएगा।
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कुरुक्षेत्र। केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ कार्यकारिणी का कार्यकाल 4 अक्तूबर को समाप्त हो चुका है। अब कर्ण सिंह व सुनील कक्कड़ ग्रुप सहित अन्य ग्रुप कुंटिया का चुनावी शेड्यूल जारी न करने का विरोध कर रहे हैं। इनका आरोप है कि कुंटिया की निवर्तमान कार्यकारिणी जानबूझ कर चुनाव नहीं करना चाहती।
चुनावी शेड्यूल जारी करने की मांग को लेकर कुंटिया ने मंगलवार को केयू के स्टूडेंट होम के पार्क में जरनल बॉडी की बैठक बुलाई। जरनल बॉडी की यह बैठक करीब सवा तीन घंटे चली। इस दौरान पांच बार जोरदार हंगामा हुआ। हंगामे के दौरान कर्मचारियों को संबोधित कर रही कर्मचारी नेत्री रजवंत कौर का कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने माइक छीन लिया। इस दौरान कर्ण सिंह व सुनील कक्कड़ ग्रुप ने विरोध कर बैठक का बहिष्कार करने का फैसला लिया। गुर्जर ग्रुप ने उन्हें मनाकर दोबारा बैठक में बैठा लिया। रजवंत कौर ने आरोप लगाया कि पिछले चार साल से कुंटिया की कार्यकारिणी द्वारा उनकी आवाज को दबाया गया। कभी किसी ने बोलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए एक कमेटी का गठन किया जाए। जो चुनाव का फैसला लें। बैठक में कर्ण सिंह ग्रुप व सुनील कक्कड़ ग्रुप ने कुंटिया के निवर्तमान प्रधान रामकुमार गुर्जर सहित समस्त कार्यकारिणी पर गंभीर आरोप लगाए।
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कार्यकारिणी की गतिविधियों से कुंटिया 40 साल पीछे गई
एसकेएस के पूर्व प्रधान संत कुमार ने कहा कि कर्मचारी हड़ताल करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन कार्यकारिणी ने 27 अगस्त से हड़ताल करने का फैसला लिया, जिसका हर्जाना कर्मचारियों ने 3 से 10 हजार रुपये तक का भुगता। उन्होंने आरोप लगाया है कि कार्यकारिणी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए विधायक सुभाष सुधा को मांगों पर सहमति बनाने के लिए बुलाया था। विधायक सुधा ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि वे कर्मचारियों का वेतन नहीं कटने देंगे, लेकिन विधायक ने डेढ़ माह तक भी कोई मांग पूरी नहीं कराई। विधायक ने कर्मचारियों को सिर्फ गुमराह किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 26 अक्तूबर को हड़ताल कर रहे रोडवेज कर्मियों को समर्थन देने पहुंचे कुंटिया पदाधिकारी दाएं बाएं हो गए। कार्यकारिणी की इस प्रकार की गतिविधियों से कुंटिया 40 वर्ष पीछे चली गई है। इस दौरान गुर्जर ग्रुप ने हंगामा किया।
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15 बाद कार्यकारिणी को कार्यालय में न बैठने देने की चेतावनी
पूर्व महासचिव भारत भूषण शर्मा ने कहा कि कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कुंटिया कार्यालय गए थे, लेकिन वहां बेइज्जत कर बाहर निकाल दिया गया। कर्मचारी नई कार्यकारिणी का चुनाव कराना चाहते हैं। इस कार्यकारिणी को 4 अक्तूबर से पहले चुनाव का शेड्यूल जारी करना चाहिए था, लेकिन अभी तक इनकी नीयत में चुनाव करना नहीं है। केयू प्रशासन ने सिर्फ हड़ताल के लिए स्टे लिया था न कि चुनाव के लिए। ये नहीं चाहते कि कुंटिया का चुनाव हो। उन्होंने कहा कि यदि यह कार्यकारिणी 15 दिनों में चुनाव का शड्यूल नहीं लेकर आए तो कार्यकारिणी को कार्यालय में बैठने नहीं देंगे।
जब पूर्व प्रधान माइक छोड़ चल पड़े
इसके बाद जब पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़ कर्मचारियों को संबोधित करने लगे तो निवर्तमान प्रधान रामकुमार गुर्जर सहित अन्य पदाधिकारी साइड में खड़े होकर चर्चा करने लेगे। इस दौरान कक्कड़ मैं अपनी बात न रखू....बोल माइक छोड़कर चल पड़े। इस दौरान कक्कड़ ग्रुप ने कड़ा रोष जताया। कक्कड़ ने सवाल उठाया कि यह कार्यकारिणी 4 से 30 अक्तूबर तक कैसे कुंटिया चला सकती है। अब इस कार्यकारिणी को कुंटिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। कार्यकारिणी चुनाव का शेड्यूल लेकर आए, कुंटिया चुनाव करवा सकती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ कर्मचारियों की एक एडहॉक कमेटी बनाने की मांग की है। जो चुनाव का फैसला ले सके।
कुंटिया के 37 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ चल रहा कोर्ट केस
बैठक का मंच संचालन कर रहे निवर्तमान महासचिव नीलकंठ शर्मा ने कहा कि कुंटिया के 37 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कोर्ट केस चला हुआ है। केयू प्रशासन कुंटिया के प्रति अड़ियल रवैया अपना रहा है। संगठन पर तलवार लटकी हुई है। हम अपने संगठन को बचाना चाहते है। जो कर्मचारी चुनाव कराना चाहता है। वो अपनी जिम्मेदारी लें। जिस समय जरनल बॉडी कहेगी कि चुनाव करना है तभी शड्यूल जारी कर दिया जाएगा।