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दिल्ली घेराव को लेकर प्रदेश में किसान गन्नौर और बहादुरगढ़ से करेंगे कूच
Updated Tue, 06 Feb 2018 12:53 AM IST
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दिल्ली घेराव को लेकर प्रदेश में किसान गन्नौर और बहादुरगढ़ से करेंगे कूच
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
देशव्यापी आंदोलन के चलते 23 फरवरी को किए जाने वाले दिल्ली घेराव के लिए हरियाणा के किसान दो मोर्चे लगाएंगे। इसमें आधे पंजाब और उत्तरी हरियाणा के किसान गन्नौर से, जबकि शेष पंजाब के हरियाणा के अन्य जिलों के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के किसान बहादुरगढ़ से दिल्ली की ओर कूच करेंगे। यह रणनीति सोमवार को जाट धर्मशाला में हुई पंजाब एवं हरियाणा के पांच संगठनों के किसानों की बैठक में बनाई गई।
जाट धर्मशाला में हुई इस बैठक में पंजाब से हरमीत कादयान, गुरमीत सिंह, जगदेव सिंह, जगजीत सिंह, बुंड सिंह, हरियाणा से गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कौथ, कर्म सिंह मथाना, राकेश बैंस, अमर सिंह ने मुख्य रूप से भाग लिया। बैठक में दिल्ली घेराव आंदोलन को सफल बनाने और केंद्र सरकार की किसानों के प्रति नीतियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान निर्णय लिया गया कि पंजाब के लुधियाना, पटियाला, अमृतसर आदि जिलों के अलावा उत्तरी हरियाणा के किसान भारी संख्या में 22 फरवरी को पिपली अनाज मंडी में एकत्रित होंगे। वहां से सभी गन्नौर होते हुए दिल्ली कूच करेंगे। भठिंडा और मानसा सहित अन्य जिलों के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के किसान हिसार में एकत्रित होंगे और वहां से बहादुरगढ़ होते हुए दिल्ली जाएंगे। किसान नेताओं ने बताया कि यह आंदोलन सरकार से आर-पार का आंदोलन होगा।
‘बजट में किया गया किसानों से धोखा’
उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश किया गया बजट किसानों के साथ धोखा है। किसानों को आंकड़ेबाजी में उलझाने का प्रयास किया गया है। लेकिन, किसान इस आंदोलन से सरकार को सोचने के लिए मजबूर कर देंगे।। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के फार्मूले को बदलकर भाजपा ने अपना फार्मूला बनाया है। इसमें फसलों के रेट कम करने की योजना बनाई है। यह सरकार का किसानों के साथ सरेआम धोखा है। आज भी किसान सरकार की विरोधी नीतियों के चलते कर्ज से दब रहे हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। किसानों को बजट में उम्मीद थी कि सरकार उनके कर्ज माफ करने के साथ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को अमल में लाने का कार्य करेगी। सरकार ने पहले की तरह किसान विरोधी होने का प्रमाण दिया है। किसान सड़कों पर आने के लिए मजबूर हैं। अब किसान सरकार की मनमानी नीतियों के आगे बेबस नहीं होंगे, बल्कि आंदोलन करेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
देशव्यापी आंदोलन के चलते 23 फरवरी को किए जाने वाले दिल्ली घेराव के लिए हरियाणा के किसान दो मोर्चे लगाएंगे। इसमें आधे पंजाब और उत्तरी हरियाणा के किसान गन्नौर से, जबकि शेष पंजाब के हरियाणा के अन्य जिलों के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के किसान बहादुरगढ़ से दिल्ली की ओर कूच करेंगे। यह रणनीति सोमवार को जाट धर्मशाला में हुई पंजाब एवं हरियाणा के पांच संगठनों के किसानों की बैठक में बनाई गई।
जाट धर्मशाला में हुई इस बैठक में पंजाब से हरमीत कादयान, गुरमीत सिंह, जगदेव सिंह, जगजीत सिंह, बुंड सिंह, हरियाणा से गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कौथ, कर्म सिंह मथाना, राकेश बैंस, अमर सिंह ने मुख्य रूप से भाग लिया। बैठक में दिल्ली घेराव आंदोलन को सफल बनाने और केंद्र सरकार की किसानों के प्रति नीतियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान निर्णय लिया गया कि पंजाब के लुधियाना, पटियाला, अमृतसर आदि जिलों के अलावा उत्तरी हरियाणा के किसान भारी संख्या में 22 फरवरी को पिपली अनाज मंडी में एकत्रित होंगे। वहां से सभी गन्नौर होते हुए दिल्ली कूच करेंगे। भठिंडा और मानसा सहित अन्य जिलों के साथ ही दक्षिणी हरियाणा के किसान हिसार में एकत्रित होंगे और वहां से बहादुरगढ़ होते हुए दिल्ली जाएंगे। किसान नेताओं ने बताया कि यह आंदोलन सरकार से आर-पार का आंदोलन होगा।
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‘बजट में किया गया किसानों से धोखा’
उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश किया गया बजट किसानों के साथ धोखा है। किसानों को आंकड़ेबाजी में उलझाने का प्रयास किया गया है। लेकिन, किसान इस आंदोलन से सरकार को सोचने के लिए मजबूर कर देंगे।। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के फार्मूले को बदलकर भाजपा ने अपना फार्मूला बनाया है। इसमें फसलों के रेट कम करने की योजना बनाई है। यह सरकार का किसानों के साथ सरेआम धोखा है। आज भी किसान सरकार की विरोधी नीतियों के चलते कर्ज से दब रहे हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। किसानों को बजट में उम्मीद थी कि सरकार उनके कर्ज माफ करने के साथ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को अमल में लाने का कार्य करेगी। सरकार ने पहले की तरह किसान विरोधी होने का प्रमाण दिया है। किसान सड़कों पर आने के लिए मजबूर हैं। अब किसान सरकार की मनमानी नीतियों के आगे बेबस नहीं होंगे, बल्कि आंदोलन करेंगे।
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