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Updated Sun, 03 Sep 2017 11:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
मारकंडा नदी रविवार को 18 हजार क्यूसिक छोड़ने से उफान पर आ गई, जिसकी मार आधा दर्जन से अधिक गांवों में हुई तो गोशालाएं भी जलमग्न हो गई। सबसे अधिक प्रभावित गांव कठवा, कलसाना, अरूप नगर, कठवा, मलिक पुर, गुमटी, मदन पुर, कलसाना रहे, लेकिन गांव कलसाना में पानी ग्रामीणों के घरों में भीे घुस गया।
पानी घरों में घुसने के कारण लोगों को कुछ सामान खराब होने का नुकसान पहुंचा है। गांव कलसाना के प्रवीन कुमार ने बताया कि रविवार तड़के सबकुछ ठीकठाक था, लेकिन 10 बजे अचानक ही गांव की सड़कों पर पानी आ गया जो देखते ही देखते पानी घरों में घुसा गया। हालांकि इस पानी से जान माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन लोगों में दहशत का माहौल है। अगर पानी की मात्रा इसी तरह से बढ़ती रही तो यह खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए लोग पूरी तरह से भयभीत हैं और लोगों ने अपनी छतों पर बिस्तर डाल लिए हैं। गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह ने कहा कि गांव में पानी के कारण बुरा हाल है और लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया। इस पानी के कारण पेयजल व पशुओं के लिए चारे की दिक्कत पैदा हो गई है। नदी का पानी डेरों पर भी गया है, लेकिन डेरों से सभी लोग सुरक्षित बाहर आ गए हैं। इस पानी की मार से गोशालाएं जलमग्न हो गई हैं और गायों को ऊंचे स्थानों पर बांधा गया है। नदी के साथ लगती मारकंडा कालोनी भी जलमग्न हुई है जिस कारण वहां बसे लोगों की झुग्गी झोपड़ियां प्रभावित हुई हैं और पानी के डर से लोगों ने सड़क साथ कच्चे पर रहने की व्यवस्था की है। हालांकि प्रशासन ने पहले ही साथ लगे गांवों, नदी के पास स्थित डेरों, गोशालाओं को अलर्ट किया था कि नदी में पानी आ सकता है। इसलिए लोगों ने पहले से ही राहत की व्यवस्था की हुई थी ताकि पानी से किसी तरह का नुकसान न हो सके। हालांकि प्रशासन ने भी राहत के पूरे प्रबंध किए थे और सभी पटवारी भी रात की ड्यूटी पर थे। मारकंडा नदी के साथ लहला रहे खेतों में पानी ही पानी नजर आ रहा है और फसल का बड़ा नुकसान पहुंचा है।
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राहत व्यवस्था का पुख्ता प्रबंध : तहसीलदार
तहसीलदार तरुण सहोता व बीडीओ संदीप भारद्वाज का कहना है कि नदी में पानी आने से साथ लगते दो गांव कलसाना व कठवा ज्यादा प्रभावित होते हैं। दोनों गांवों में पानी की निकासी के लिए पंपों व इंजन की व्यवस्था की हुई है। गांव में पानी घुसते ही यह काम करना शुरू कर देते हैं। तहसीलदार ने कहा कि वाटर बोट व कश्तियों का भी प्रबंध है। उन्होंने कहा कि साथ लगते गांवों की पंचायतों को निर्देश दिए हुए थे कि वह कट्टों की व्यवस्था भी करके रखे अगर पानी ज्यादा आता है तो उससे बचाव किया जा सके।
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अपने स्तर पर भी राहत में जुटे ग्रामीण
हालांकि ग्रामीण अपने स्तर पर राहत व्यवस्था को लेकर जुटे हुए हैं। गांव कलसाना के लोगों प्रदीप कुमार, संतोष, लक्की ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी इंजन की व्यवस्था की हुई है अगर पानी अधिक आता है तो उससे बचाव हो सके। ग्रामीणों ने स्वयं भी ऐसे स्थानों पर नाके लगाए जहां से पानी की मार अधिक हो सकती थी।
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शाहाबाद।
मारकंडा नदी रविवार को 18 हजार क्यूसिक छोड़ने से उफान पर आ गई, जिसकी मार आधा दर्जन से अधिक गांवों में हुई तो गोशालाएं भी जलमग्न हो गई। सबसे अधिक प्रभावित गांव कठवा, कलसाना, अरूप नगर, कठवा, मलिक पुर, गुमटी, मदन पुर, कलसाना रहे, लेकिन गांव कलसाना में पानी ग्रामीणों के घरों में भीे घुस गया।
पानी घरों में घुसने के कारण लोगों को कुछ सामान खराब होने का नुकसान पहुंचा है। गांव कलसाना के प्रवीन कुमार ने बताया कि रविवार तड़के सबकुछ ठीकठाक था, लेकिन 10 बजे अचानक ही गांव की सड़कों पर पानी आ गया जो देखते ही देखते पानी घरों में घुसा गया। हालांकि इस पानी से जान माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन लोगों में दहशत का माहौल है। अगर पानी की मात्रा इसी तरह से बढ़ती रही तो यह खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए लोग पूरी तरह से भयभीत हैं और लोगों ने अपनी छतों पर बिस्तर डाल लिए हैं। गांव कठवा के सरपंच अमरेंद्र सिंह ने कहा कि गांव में पानी के कारण बुरा हाल है और लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया। इस पानी के कारण पेयजल व पशुओं के लिए चारे की दिक्कत पैदा हो गई है। नदी का पानी डेरों पर भी गया है, लेकिन डेरों से सभी लोग सुरक्षित बाहर आ गए हैं। इस पानी की मार से गोशालाएं जलमग्न हो गई हैं और गायों को ऊंचे स्थानों पर बांधा गया है। नदी के साथ लगती मारकंडा कालोनी भी जलमग्न हुई है जिस कारण वहां बसे लोगों की झुग्गी झोपड़ियां प्रभावित हुई हैं और पानी के डर से लोगों ने सड़क साथ कच्चे पर रहने की व्यवस्था की है। हालांकि प्रशासन ने पहले ही साथ लगे गांवों, नदी के पास स्थित डेरों, गोशालाओं को अलर्ट किया था कि नदी में पानी आ सकता है। इसलिए लोगों ने पहले से ही राहत की व्यवस्था की हुई थी ताकि पानी से किसी तरह का नुकसान न हो सके। हालांकि प्रशासन ने भी राहत के पूरे प्रबंध किए थे और सभी पटवारी भी रात की ड्यूटी पर थे। मारकंडा नदी के साथ लहला रहे खेतों में पानी ही पानी नजर आ रहा है और फसल का बड़ा नुकसान पहुंचा है।
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राहत व्यवस्था का पुख्ता प्रबंध : तहसीलदार
तहसीलदार तरुण सहोता व बीडीओ संदीप भारद्वाज का कहना है कि नदी में पानी आने से साथ लगते दो गांव कलसाना व कठवा ज्यादा प्रभावित होते हैं। दोनों गांवों में पानी की निकासी के लिए पंपों व इंजन की व्यवस्था की हुई है। गांव में पानी घुसते ही यह काम करना शुरू कर देते हैं। तहसीलदार ने कहा कि वाटर बोट व कश्तियों का भी प्रबंध है। उन्होंने कहा कि साथ लगते गांवों की पंचायतों को निर्देश दिए हुए थे कि वह कट्टों की व्यवस्था भी करके रखे अगर पानी ज्यादा आता है तो उससे बचाव किया जा सके।
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अपने स्तर पर भी राहत में जुटे ग्रामीण
हालांकि ग्रामीण अपने स्तर पर राहत व्यवस्था को लेकर जुटे हुए हैं। गांव कलसाना के लोगों प्रदीप कुमार, संतोष, लक्की ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी इंजन की व्यवस्था की हुई है अगर पानी अधिक आता है तो उससे बचाव हो सके। ग्रामीणों ने स्वयं भी ऐसे स्थानों पर नाके लगाए जहां से पानी की मार अधिक हो सकती थी।