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सरस मेले के स्टॉल संचालकों के खाने पर चली कैंची
Updated Tue, 21 Nov 2017 12:14 AM IST
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सरस मेले के स्टॉल संचालकों पेट पर चली कैंची
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी तट पर आयोजित सरस मेले मेें देश के 22 राज्यों से आए सेल्फ हेल्प ग्रुप के सदस्यों को खाने के लिए लाले पड़े गए हैं। प्रशासन ने बजट के अभाव में इनके खाने पर कैंची चला दी है। इसके चलते मेले में स्टॉल संचालकों में रोष है। इस बार बिजली के लिए केवल पॉवर पॉइंट ही उपलब्ध कराए गए हैं। कलाकारों को सीएफएल से लेकर अन्य उपकरण तक अपने खरीदने पड़ रहे हैं। इससे मेले में आए शिल्पियों को धक्का लगा है।
खरीद कर खा रहे खाना : सुरेंद्र
उत्तर प्रदेश के हरदोई से शिवानी यशस्वी सेल्फ हेल्प ग्रुप के स्टॉल संचालक सुरेंद्र कुमार का कहना है कि इस बार उन्हें खाना खरीदना पड़ रहा है। पहले हर बार उनके लिए खाने की व्यवस्था प्रशासन और सरकार करती थी। खाने के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मेला होने के चलते यहां कार्य भी बढ़ा है। उनके लिए खाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
खाने के साथ-साथ बिस्तर भी नहीं : रमन
सरस मेले में हर बार आते रहे स्टॉल संचालक अंबाला वासी रमन का कहना है कि उन्हें खाने के साथ बिस्तर के भी लाले हैं। हर बार प्रशासन उनके लिए बेहतर व्यवस्था करता था, लेकिन इस बार उन्हें निराशा हो रही है।
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मेले के तीसरे दिन जागा प्रशासन, जारी किए आईकार्ड
17 नवंबर को शुरू हो चुके सरस मेले में पहले दिन से ही विभिन्न राज्यों से सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से स्टॉलें लगा ली गई थीं। इसके लिए अधिकतर स्टॉल संचालक एक दिन पहले ही पहुंच गए थे। मेला शुरू होने के तीसरे दिन प्रशासन की नींद खुली है और रविवार को स्टॉल संचालकों को आई कार्ड जारी किए गए हैं। सरस मेले के साथ क्राफ्ट मेले में भी स्टॉल संचालकों को तीसरे दिन ही आईकार्ड जारी किए गए। प्रशासन तीसरे दिन भी इनकी व्यवस्था को लेकर ही उलझा रहा।
खाने के लिए नहीं है बजट : एडीसी
एडीसी धर्मवीर का कहना है कि सरस मेले में 22 राज्यों के सेल्फ हेल्प ग्रुप ने स्टॉल लगाए हैं, लेकिन स्टॉल संचालकों को खाना देने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। पिछले वर्ष भी उनके खाने के लिए बजट नहीं था। इसके बावजूद केडीबी ने व्यवस्था कराई थी। बिस्तर और बिजली आदि के पूरे प्रबंध हैं। कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी तट पर आयोजित सरस मेले मेें देश के 22 राज्यों से आए सेल्फ हेल्प ग्रुप के सदस्यों को खाने के लिए लाले पड़े गए हैं। प्रशासन ने बजट के अभाव में इनके खाने पर कैंची चला दी है। इसके चलते मेले में स्टॉल संचालकों में रोष है। इस बार बिजली के लिए केवल पॉवर पॉइंट ही उपलब्ध कराए गए हैं। कलाकारों को सीएफएल से लेकर अन्य उपकरण तक अपने खरीदने पड़ रहे हैं। इससे मेले में आए शिल्पियों को धक्का लगा है।
खरीद कर खा रहे खाना : सुरेंद्र
उत्तर प्रदेश के हरदोई से शिवानी यशस्वी सेल्फ हेल्प ग्रुप के स्टॉल संचालक सुरेंद्र कुमार का कहना है कि इस बार उन्हें खाना खरीदना पड़ रहा है। पहले हर बार उनके लिए खाने की व्यवस्था प्रशासन और सरकार करती थी। खाने के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मेला होने के चलते यहां कार्य भी बढ़ा है। उनके लिए खाने की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
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खाने के साथ-साथ बिस्तर भी नहीं : रमन
सरस मेले में हर बार आते रहे स्टॉल संचालक अंबाला वासी रमन का कहना है कि उन्हें खाने के साथ बिस्तर के भी लाले हैं। हर बार प्रशासन उनके लिए बेहतर व्यवस्था करता था, लेकिन इस बार उन्हें निराशा हो रही है।
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मेले के तीसरे दिन जागा प्रशासन, जारी किए आईकार्ड
17 नवंबर को शुरू हो चुके सरस मेले में पहले दिन से ही विभिन्न राज्यों से सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से स्टॉलें लगा ली गई थीं। इसके लिए अधिकतर स्टॉल संचालक एक दिन पहले ही पहुंच गए थे। मेला शुरू होने के तीसरे दिन प्रशासन की नींद खुली है और रविवार को स्टॉल संचालकों को आई कार्ड जारी किए गए हैं। सरस मेले के साथ क्राफ्ट मेले में भी स्टॉल संचालकों को तीसरे दिन ही आईकार्ड जारी किए गए। प्रशासन तीसरे दिन भी इनकी व्यवस्था को लेकर ही उलझा रहा।
खाने के लिए नहीं है बजट : एडीसी
एडीसी धर्मवीर का कहना है कि सरस मेले में 22 राज्यों के सेल्फ हेल्प ग्रुप ने स्टॉल लगाए हैं, लेकिन स्टॉल संचालकों को खाना देने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। पिछले वर्ष भी उनके खाने के लिए बजट नहीं था। इसके बावजूद केडीबी ने व्यवस्था कराई थी। बिस्तर और बिजली आदि के पूरे प्रबंध हैं। कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।