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होटल, इंडस्ट्री व स्कूलों व अन्य संस्थानों में गहरा सकता है पानी का संकट 21-15-27
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:36 AM IST
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सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र।
औद्योगिक इकाईयों, होटल, शिक्षण व अन्य संस्थानों में अब न धड़ल्ले से पानी बहेगा बल्कि यहां पानी का संकट भी गहरा सकता है। इन पर प्रदेश सरकार व अधिकारियों ने अपनी नजरें गढ़ा ली है और व्यर्थ में पानी बहने पर जल्द ही शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए ऐसे सभी संस्थानों व इकाईयों से पानी के स्रोतों की जानकारी ली जाएगी, जिसके लिए जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे तो खामियां पाए जाने पर तत्काल ही पानी के स्रोत को सील भी कर दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए न केवल हर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए है बल्कि ग्रांउड वाटर सैल व जिला प्रशासन को अपने स्तर पर नोडल एजेंसियां बनाकर निगरानी करनी होगी। पानी का दोहन रोकने के लिए पहले प्रदेेेश के चिंहित किए गए 36 ब्लॉक को गंभीरता से लिया जाएगा, जहां विशेष तौर पर जिला उपायुक्त की निगरानी में गठित कमेटी कार्य करेगी बल्कि इसकी रिपोर्ट भी लगातार सरकार को देनी होगी। बता दें कि महेंद्रगढ़ के बाद कुरुक्षेत्र ही प्रदेश में दूसरा ओवर एक्सपलोएटिड जिला है, जहां भू-जल स्तर सबसे अधिक गिरा है और यहां भी सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति शाहाबाद ब्लॉक की है।
बिना एनओसी भू-जल का नहीं कर सकेंगे व्यवसायिक प्रयोग
औद्योगिक इकाई से लेकर होटल, शिक्षण व अन्य संस्थानों में बिना एनओसी भू-जल का व्यवसायिक प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। यहां तक कि कैंपरों में सप्लाई किए जाने वाले पानी को लेकर भी एनओसी लेनी होगी तो वहीं विभिन्न संस्थानों व अन्य जगहों पर बनाए गए वाटर पार्क व स्विमिंग पुल में भी पीने के पानी के स्रोत से सीधे पानी प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इसके लिए भी बाकायदा एनओसी लेनी होगी। यही नहीं विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पीने के पानी के स्रोत से गार्डन नहीं सींच सकेंगे तो औद्योगिक इकाईयों में भी पीने के अलावा प्रयोग किए जाने वाले पानी की एनओसी दर्शानी होगी।
प्रधान सचिव कर रहे निगरानी
गिरते भू-जल स्तर को जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बेहद गंभीरता से लिया है वहीं इस संबंध में अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की निगरानी सीधे प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव द्वारा की जा रही है। यहां तक कि हर माह कार्य की पूरी रिपोर्ट ली जा रही है तो वहीं पानी संचय की जानकारी भी तत्काल ली जा रही है।
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अब पीने के पानी के लिए भी बहाना पड़ेगा पसीना
अब पीने केे पानी के लिए भी पसीना बहाना पड़ेेगा। पहले ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर में भी जनप्रतिनिधियों से लेकर व्यक्तिगत तौर पर भी धड़ाधड़ सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाए जाते रहे है, लेकिन अब पंचायत विभाग के मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर निर्देश दिए है कि पहले निगरानी कमेटी संबंधित स्थल का निरीक्षण करेगी और बेहद जरूरत होने पर ही पीने केे पानी के लिए भी सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाए जाने की मंजूरी व ग्रांट जारी करनी होगी।
गुलडेहरा में एक ट्यूबवेल किया सील, कई की जांच
पिछले कुछ दिनों के दौरान ही पूरे मामले के जिला नोडल अधिकारी एवं एडीसी धर्मवीर सिंह की मौजूदगी में ग्राउंड वाटर सैल की ओर से जहां गांव गुलडेहरा में एक ट्यूबवेल सील कर दिया गया तो वहीं तीन अन्य की जांच की जा रही है।
1999 के बाद हर वर्ष 1 मीटर से भी अधिक गिरता रहा भू-जल स्तर
जिला में भू-जल स्तर गिरने की सबसे भयावह स्थिति वर्ष 1999 से शुरू हुई। इस वर्ष से लेकर वर्ष 2016 तक जहां 19़75 मीटर भू-जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई वहीं इससे पहले वर्ष 1974 से वर्ष 1999 तक महज सवा छह मीटर तक भू-जल स्तर गिरा। ग्रांउड वाटर सैल के अनुसार जिला में वर्तमान में 3505 मीटर तक भू-जल स्तर गिर चुका है जबकि वर्ष 1974 में 10़55 मीटर पर भू-जल स्तर रिकार्ड किया गया था। वर्तमान में शाहाबाद ब्लॉक में सबसे अधिक 38़85 मीटर, पिहोवा में 33़22, बाबैन में 37़19 मीटर, लाडवा में 30़35 व थानेसर में 31़48 मीटर तक भू-जल स्तर गिर चुका है। जिला में औसतन भू-जल स्तर 355 मीटर तक गिर चुका है, जिसमें सबमर्सिबल ट्यूबवेल को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
बनाई जा रही सूची, जल्द जारी होंगे नोटिस : डॉ महाबीर सिंह
भूजल सैल के अनुभाग अधिकारी डॉ महाबीर सिंह का कहना है कि पीने के पानी के व्यवसायिक प्रयोग को रोकने के लिए प्रदेश सरकार व राज्य ग्राउंड वाटर सैल ने कड़ा रुख अपना लिया है। ऐसे सभी संस्थानों व जगहों की सूची तैयार की जा रही है और इसी माह ही शो काज नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। जहां भी एनओसी नहीं होगी या पीने के पानी के स्त्रोत का व्यवसायिक प्रयोग मिलेगा उसे तत्काल ही सील कर दिया जाएगा।
इंफोर्समेंट टीमें करेंगी निगरानी : एडीसी
एडीसी धर्मवीर सिंह का कहना है कि गिरते भू - जल को रोकने के लिए सरकार ने कड़ी हिदायत जारी की है, जिसके अनुसार ब्लॉक अनुसार इंफोर्समेंट टीमें बना दी गई है, जो भू-जल प्रयोग को लेकर निगरानी रखेंगी। जिला में सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति शाहाबाद ब्लॉक की है, जहां जिला उपायुक्त की अगुवाई में ही टीम कार्य कर रही तो वहीं अन्य ब्लॉक में एसडीएम इन टीमों के इंचार्ज बनाए गए है। अब पीने के पानी के लिए भी बेहद जरूरी होने पर ही सबमर्सिबल ट्यूबवेल के लिए जनप्रतिनिधि को ग्रांट व मंजूरी दी जाएगी।
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कुरुक्षेत्र।
औद्योगिक इकाईयों, होटल, शिक्षण व अन्य संस्थानों में अब न धड़ल्ले से पानी बहेगा बल्कि यहां पानी का संकट भी गहरा सकता है। इन पर प्रदेश सरकार व अधिकारियों ने अपनी नजरें गढ़ा ली है और व्यर्थ में पानी बहने पर जल्द ही शिकंजा कसा जाएगा। इसके लिए ऐसे सभी संस्थानों व इकाईयों से पानी के स्रोतों की जानकारी ली जाएगी, जिसके लिए जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे तो खामियां पाए जाने पर तत्काल ही पानी के स्रोत को सील भी कर दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए न केवल हर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए है बल्कि ग्रांउड वाटर सैल व जिला प्रशासन को अपने स्तर पर नोडल एजेंसियां बनाकर निगरानी करनी होगी। पानी का दोहन रोकने के लिए पहले प्रदेेेश के चिंहित किए गए 36 ब्लॉक को गंभीरता से लिया जाएगा, जहां विशेष तौर पर जिला उपायुक्त की निगरानी में गठित कमेटी कार्य करेगी बल्कि इसकी रिपोर्ट भी लगातार सरकार को देनी होगी। बता दें कि महेंद्रगढ़ के बाद कुरुक्षेत्र ही प्रदेश में दूसरा ओवर एक्सपलोएटिड जिला है, जहां भू-जल स्तर सबसे अधिक गिरा है और यहां भी सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति शाहाबाद ब्लॉक की है।
बिना एनओसी भू-जल का नहीं कर सकेंगे व्यवसायिक प्रयोग
औद्योगिक इकाई से लेकर होटल, शिक्षण व अन्य संस्थानों में बिना एनओसी भू-जल का व्यवसायिक प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। यहां तक कि कैंपरों में सप्लाई किए जाने वाले पानी को लेकर भी एनओसी लेनी होगी तो वहीं विभिन्न संस्थानों व अन्य जगहों पर बनाए गए वाटर पार्क व स्विमिंग पुल में भी पीने के पानी के स्रोत से सीधे पानी प्रयोग नहीं कर सकेंगे। इसके लिए भी बाकायदा एनओसी लेनी होगी। यही नहीं विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पीने के पानी के स्रोत से गार्डन नहीं सींच सकेंगे तो औद्योगिक इकाईयों में भी पीने के अलावा प्रयोग किए जाने वाले पानी की एनओसी दर्शानी होगी।
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प्रधान सचिव कर रहे निगरानी
गिरते भू-जल स्तर को जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बेहद गंभीरता से लिया है वहीं इस संबंध में अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की निगरानी सीधे प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव द्वारा की जा रही है। यहां तक कि हर माह कार्य की पूरी रिपोर्ट ली जा रही है तो वहीं पानी संचय की जानकारी भी तत्काल ली जा रही है।
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अब पीने के पानी के लिए भी बहाना पड़ेगा पसीना
अब पीने केे पानी के लिए भी पसीना बहाना पड़ेेगा। पहले ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर में भी जनप्रतिनिधियों से लेकर व्यक्तिगत तौर पर भी धड़ाधड़ सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाए जाते रहे है, लेकिन अब पंचायत विभाग के मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर निर्देश दिए है कि पहले निगरानी कमेटी संबंधित स्थल का निरीक्षण करेगी और बेहद जरूरत होने पर ही पीने केे पानी के लिए भी सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाए जाने की मंजूरी व ग्रांट जारी करनी होगी।
गुलडेहरा में एक ट्यूबवेल किया सील, कई की जांच
पिछले कुछ दिनों के दौरान ही पूरे मामले के जिला नोडल अधिकारी एवं एडीसी धर्मवीर सिंह की मौजूदगी में ग्राउंड वाटर सैल की ओर से जहां गांव गुलडेहरा में एक ट्यूबवेल सील कर दिया गया तो वहीं तीन अन्य की जांच की जा रही है।
1999 के बाद हर वर्ष 1 मीटर से भी अधिक गिरता रहा भू-जल स्तर
जिला में भू-जल स्तर गिरने की सबसे भयावह स्थिति वर्ष 1999 से शुरू हुई। इस वर्ष से लेकर वर्ष 2016 तक जहां 19़75 मीटर भू-जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई वहीं इससे पहले वर्ष 1974 से वर्ष 1999 तक महज सवा छह मीटर तक भू-जल स्तर गिरा। ग्रांउड वाटर सैल के अनुसार जिला में वर्तमान में 3505 मीटर तक भू-जल स्तर गिर चुका है जबकि वर्ष 1974 में 10़55 मीटर पर भू-जल स्तर रिकार्ड किया गया था। वर्तमान में शाहाबाद ब्लॉक में सबसे अधिक 38़85 मीटर, पिहोवा में 33़22, बाबैन में 37़19 मीटर, लाडवा में 30़35 व थानेसर में 31़48 मीटर तक भू-जल स्तर गिर चुका है। जिला में औसतन भू-जल स्तर 355 मीटर तक गिर चुका है, जिसमें सबमर्सिबल ट्यूबवेल को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
बनाई जा रही सूची, जल्द जारी होंगे नोटिस : डॉ महाबीर सिंह
भूजल सैल के अनुभाग अधिकारी डॉ महाबीर सिंह का कहना है कि पीने के पानी के व्यवसायिक प्रयोग को रोकने के लिए प्रदेश सरकार व राज्य ग्राउंड वाटर सैल ने कड़ा रुख अपना लिया है। ऐसे सभी संस्थानों व जगहों की सूची तैयार की जा रही है और इसी माह ही शो काज नोटिस जारी कर दिए जाएंगे। जहां भी एनओसी नहीं होगी या पीने के पानी के स्त्रोत का व्यवसायिक प्रयोग मिलेगा उसे तत्काल ही सील कर दिया जाएगा।
इंफोर्समेंट टीमें करेंगी निगरानी : एडीसी
एडीसी धर्मवीर सिंह का कहना है कि गिरते भू - जल को रोकने के लिए सरकार ने कड़ी हिदायत जारी की है, जिसके अनुसार ब्लॉक अनुसार इंफोर्समेंट टीमें बना दी गई है, जो भू-जल प्रयोग को लेकर निगरानी रखेंगी। जिला में सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति शाहाबाद ब्लॉक की है, जहां जिला उपायुक्त की अगुवाई में ही टीम कार्य कर रही तो वहीं अन्य ब्लॉक में एसडीएम इन टीमों के इंचार्ज बनाए गए है। अब पीने के पानी के लिए भी बेहद जरूरी होने पर ही सबमर्सिबल ट्यूबवेल के लिए जनप्रतिनिधि को ग्रांट व मंजूरी दी जाएगी।