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फसल अवशेष जलाने पर रोक की कवायद
Updated Wed, 11 Jul 2018 12:25 AM IST
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सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। फसल अवशेष जलाने की गंभीर समस्या के चलते जिला के गांव बारना व कमोदा अब आदर्श गांव होंगे, जहां फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंध किया जाएगा। इन गांवों में किसी भी फसल का अवशेष नहीं जलाया जाएगा बल्कि इसके प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनें भी फ्री मिलेंगी। इन गांवों को फसल अवशेष प्रबंधन में पूरी तरह से सफल बनाने का जिम्मा कृषि विज्ञान केंद्र को सौंपा गया है और इन गांवों पर केंद्र की ओर से 30 लाख रुपये का बजट खर्च किया जाएगा।
पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुके फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कवायद के तहत कृषि विज्ञान केंद्र ने कार्य भी शुरू कर दिया है। तय की गई योजना सिरे चढ़ी तो इसी धान के सीजन तक ये गांव फसल अवशेष जलाने से पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त गांव कहलाने लगेंगे और इन गांवों का प्रचार-प्रसार पूरे जिला भर में किया जाएगा, ताकि दूसरे गांवों के किसानों को भी इसमें सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इन गांवों में यह योजना सिरे चढ़ी तो इसे दूसरे गांवों व ब्लॉक स्तर पर भी शुरू किया जाएगा।
केवीके की ओर से गांवों में ये मशीनें रहेंगी मौजूद
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से इन गांवों में दो हेपी सीडर, तीन मल्चर, तीन सरेडर, तीन जीरो टीलेजड्रील, पांच उल्टे सीधे पल्टु हल रखे जाएंगे, जो दोनों गांवों सभी किसानों की फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाने का काम करेंगी। अब ये अवशेष खेत से बाहर फेंकने की भी जरूरत नहीं रहेगी और न ही अगली फसल की बिजाई में ये अवशेष अवरोधक बनेंगे।
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किसानों को ये मिलेंगी सुविधाएं
केवीके अधिकारियों के अनुसार इन गांवों में से एक में प्रदर्शन प्लांट स्थापित किया जाएगा तो किसानों को मशीनें खरीदने के लिए सब्सिडी से लेकर ट्रेनिंग में आने के लिए मानदेय, फ्री खाद-बीज सहित अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। किसानों को विशेष ट्रेनिंग देने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा तो जिला स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर प्रोत्साहित किया जाएगा।
250 एकड़ में स्थापित होगा एक प्रदर्शन प्लांट
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. हरि ओम का कहना है कि इन गांवों में 250 एकड़ में एक प्रदर्शन प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। इन गांवों में 5 जून को विशेष सेमिनार का भी आयोजन इसी योजना के तहत किया गया और ग्राम पंचायत से लेकर हर किसान को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत जहां सभी फसलों के अवशेषों का प्रबंधन किया जाएगा वहीं ये गांव पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होंगे। यहां अक्तूबर माह में जिला स्तरीय किसान मेले का भी आयोजन किया जाएगा।
किसानों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण : भाटिया
केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जेएन भाटिया का कहना है कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यहां तक कि किसानों का सर्वे किया किया जाएगा, जिससे पता लगाया जाएगा कि किस किसान ने किस किस्म की धान लगाई है और दूसरी फसलें कितने-कितने रकबे में लगी है।
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कुरुक्षेत्र। फसल अवशेष जलाने की गंभीर समस्या के चलते जिला के गांव बारना व कमोदा अब आदर्श गांव होंगे, जहां फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंध किया जाएगा। इन गांवों में किसी भी फसल का अवशेष नहीं जलाया जाएगा बल्कि इसके प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनें भी फ्री मिलेंगी। इन गांवों को फसल अवशेष प्रबंधन में पूरी तरह से सफल बनाने का जिम्मा कृषि विज्ञान केंद्र को सौंपा गया है और इन गांवों पर केंद्र की ओर से 30 लाख रुपये का बजट खर्च किया जाएगा।
पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुके फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कवायद के तहत कृषि विज्ञान केंद्र ने कार्य भी शुरू कर दिया है। तय की गई योजना सिरे चढ़ी तो इसी धान के सीजन तक ये गांव फसल अवशेष जलाने से पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त गांव कहलाने लगेंगे और इन गांवों का प्रचार-प्रसार पूरे जिला भर में किया जाएगा, ताकि दूसरे गांवों के किसानों को भी इसमें सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इन गांवों में यह योजना सिरे चढ़ी तो इसे दूसरे गांवों व ब्लॉक स्तर पर भी शुरू किया जाएगा।
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केवीके की ओर से गांवों में ये मशीनें रहेंगी मौजूद
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से इन गांवों में दो हेपी सीडर, तीन मल्चर, तीन सरेडर, तीन जीरो टीलेजड्रील, पांच उल्टे सीधे पल्टु हल रखे जाएंगे, जो दोनों गांवों सभी किसानों की फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाने का काम करेंगी। अब ये अवशेष खेत से बाहर फेंकने की भी जरूरत नहीं रहेगी और न ही अगली फसल की बिजाई में ये अवशेष अवरोधक बनेंगे।
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किसानों को ये मिलेंगी सुविधाएं
केवीके अधिकारियों के अनुसार इन गांवों में से एक में प्रदर्शन प्लांट स्थापित किया जाएगा तो किसानों को मशीनें खरीदने के लिए सब्सिडी से लेकर ट्रेनिंग में आने के लिए मानदेय, फ्री खाद-बीज सहित अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। किसानों को विशेष ट्रेनिंग देने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा तो जिला स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर प्रोत्साहित किया जाएगा।
250 एकड़ में स्थापित होगा एक प्रदर्शन प्लांट
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. हरि ओम का कहना है कि इन गांवों में 250 एकड़ में एक प्रदर्शन प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। इन गांवों में 5 जून को विशेष सेमिनार का भी आयोजन इसी योजना के तहत किया गया और ग्राम पंचायत से लेकर हर किसान को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। इस योजना के तहत जहां सभी फसलों के अवशेषों का प्रबंधन किया जाएगा वहीं ये गांव पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होंगे। यहां अक्तूबर माह में जिला स्तरीय किसान मेले का भी आयोजन किया जाएगा।
किसानों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण : भाटिया
केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जेएन भाटिया का कहना है कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यहां तक कि किसानों का सर्वे किया किया जाएगा, जिससे पता लगाया जाएगा कि किस किसान ने किस किस्म की धान लगाई है और दूसरी फसलें कितने-कितने रकबे में लगी है।