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परमात्मा की भक्ति ही मोक्ष तथा मुक्ति का मार्ग: ठाकुर
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:23 AM IST
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जीवन में धारण करने से ही कथा होती है सार्थक : ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के पावन अवसर पर जयराम विद्यापीठ परिसर में आयोजित भागवत पुराण की कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से विश्वविख्यात कथावाचक भागवत भास्कर कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार रूप में धारण करें। अन्यथा कथा केवल मनोरंजन और कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। उन्होंने बताया भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और अशांति से मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि सिमरन, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।
कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने बताया श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। अन्य युगों में धर्म, लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं। कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जागृत हो जाता है। उन्होंने बताया भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत कथा या केवल भागवत भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है। इसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस अवसर पर दीक्षित शर्मा, संतोष शर्मा, प्रमोद बंसल, अभिनव शर्मा, केके गर्ग, श्रवण गुप्ता, केके कौशिक, टीके शर्मा, खरैती लाल सिंगला, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेश सिंगला, मुनीश मित्तल, संजय गोयल, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, मुदित शुक्ल, जितेंद्र भारद्वाज, संगीता शर्मा, शाखा शर्मा, संतोष यादव, देवी शर्मा आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के पावन अवसर पर जयराम विद्यापीठ परिसर में आयोजित भागवत पुराण की कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से विश्वविख्यात कथावाचक भागवत भास्कर कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार रूप में धारण करें। अन्यथा कथा केवल मनोरंजन और कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। उन्होंने बताया भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और अशांति से मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि सिमरन, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।
कृष्ण चंद शास्त्री ठाकुर ने बताया श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। अन्य युगों में धर्म, लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं। कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जागृत हो जाता है। उन्होंने बताया भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत कथा या केवल भागवत भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है। इसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस अवसर पर दीक्षित शर्मा, संतोष शर्मा, प्रमोद बंसल, अभिनव शर्मा, केके गर्ग, श्रवण गुप्ता, केके कौशिक, टीके शर्मा, खरैती लाल सिंगला, टेक सिंह लौहार माजरा, राजेश सिंगला, मुनीश मित्तल, संजय गोयल, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, मुदित शुक्ल, जितेंद्र भारद्वाज, संगीता शर्मा, शाखा शर्मा, संतोष यादव, देवी शर्मा आदि मौजूद थे।
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