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उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत, बदलाव का कारण बने शिक्षक: प्रो. रजनीश शर्मा

Tue, 26 Mar 2019 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 26 Mar 2019 12:33 AM IST
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उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत, बदलाव का कारण बने शिक्षक: प्रो. रजनीश शर्मा

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कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेज प्रो. रजनीश शर्मा ने कहा है कि देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की आवश्यकता है। इस बदलाव के लिए शिक्षकों को स्वयं को तैयार करना होगा। बदलाव का कारण सिर्फ शिक्षक ही बन सकते हैं।
वे सोमवार को शिक्षाशास्त्र : संचालन और मूल्यांकन विषय पर आयोजितप्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन समय में शिक्षा समाज केंद्रित थी। समाज को ध्यान में रखकर ही देश में विद्यालयों व विश्वविद्यालयों का निर्माण किया गया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला सहित ऐसे सैंकड़ों विश्वविद्यालय हैं, जिनका निर्माण समाज के लोगों ने किया।
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समाज के भले के लिए समाज के द्वारा इनकी स्थापना की गई लेकिन आज उच्च शिक्षा में पश्विमी प्रभाव के कारण उच्च शिक्षा व्यक्ति केंद्रित हो गई है, जिसका नुकसान समाज के साथ-साथ आम लोगों को भी हो रहा है। हम देश में उच्च शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए शिक्षा को समाज केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। जब हम सामूहिक विकास की धारणा को लेकर आगे बढ़ेंगे तभी अच्छे शिक्षण संस्थान स्थापित कर सकेंगे। प्रो. रजनीश ने कहा कि हमें अपने आसपास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर समाज की जरूरतों के अनुरूप अध्ययन व अध्यापन करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि जब वे अपने हर लेक्चर,हर दिन व साल को नया बनाएंगे तभी सही अर्थो में शिक्षा को ठीक तरह से अगली पीढ़ी को दे सकेंगे।
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उन्होंने कहा कि आजकल क्लासरूम में ऐसे विद्यार्थी आ रहे हैं जो बहुत ही सतर्क व चुस्त हैं, वे नई तकनीक को जानते हैं। शिक्षक के ज्ञान का परखते हैं इसलिए शिक्षा का क्षेत्र चुनौतीपूर्ण है। शिक्षकों को चाहिए कि वे नई तकनीक का प्रयोग करें व मल्टीमीडिया का प्रयोग करते हुए अध्यापन को रूचिकर बनाएं। केंद्र की निदेशिका प्रो. नीरा वर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की क्षमताओं का विकास करना है, ताकि वे नई तकनीक व नई शिक्षण विधियों के माध्यम से अच्छा शिक्षण कर देश की भावी पीढ़ी को एक नई दिशा दे सकें। इस मौके पर उन्होंने मदन मोहन मालवीय मिशन के विभिन्न उद्देश्यों के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में असम, कर्नाटक, नई दिल्ली, जम्मू सहित कई राज्यों से 46 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
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