{"_id":"5c1d3f25bdec2256c4552e09","slug":"131545420581-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रह्मसरोपर तट पर लोक नृत्यों का आनंद ले रहे पर्यटक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रह्मसरोपर तट पर लोक नृत्यों का आनंद ले रहे पर्यटक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र । अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में ब्रह्मसरोवर तट पर लाखों पर्यटक और श्रद्घालु लोक नृत्यों का लुफ्त उठा रहे है। पर्यटकों को देख कलाकारों और शिल्पकारों के चेहरों पर रौनक छाई हुई है और पर्यटक जमकर खरीदारी भी कर रहे है। शुक्रवार को भी लाखों पर्यटकों ने ब्रह्मसरोवर पर मेले व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस महोत्सव की रौनक उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की तरफ से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों के कलाकार ब्रह्मसरोवर के घाटों पर अपने-अपने प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ बढ़ा रहे है। मेले के 15वें दिन भी लाखों पर्यटक पहुंचे और जमकर खरीदारी की है। यह सरस और क्राफ्ट मेला 23 दिसंबर तक चलेगा तथा छुट्टी होने के कारण शनिवार व रविवार को लाखों और श्रद्घालु पहुंचने की संभावना है। इस महोत्सव ने हरियाणा ही नहीं पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
रंग-बिरंगे फूलों से रंगीन हुई महोत्सव की फिजा
ब्रह्मसरोवर तट पर कागज से बने रंग-बिरंगे गुलाब और अन्य किस्मों के फूल अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को महकाने का काम कर रहे है। इस महोत्सव में 4 से 5 स्टॉल पर हरियाणा के पानीपत, चंडीगढ़ और पश्चिम बंगाल से पहुंचे शिल्पकार विभिन्न प्रकार के कागज व सोला वुड के फूलों को बनाकर पर्यटकों के लिए लेकर आए है। इन फूलों को बनाकर शिल्पकार कई अवॉर्ड हासिल कर चुके है। अहम पहलु यह है कि कागजों को फल का रूप देने का काम कई सालों से कर रहे है। शिल्पकार देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए बेहतरीन रंग-बिरंगे सुंदर फूलों को तैयार करके लाएं है। इन फूलों की कीमत भी आम पर्यटकों की पहुंच तक होगी और पिछले 10 सालों से पर्यटकों के लिए यह फुल लेकर आ रहे हैं। शिल्पकार सोयलन मोदी ने विशेष बातचीत करते हुए बताया कि सरकार कागज से बने फूलों की शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई है।
बाजरे की रोटी और दाल बाटी चूरमा का स्वाद चख रहे हैं पर्यटक
राजस्थान के विभिन्न जिलों से गीता महोत्सव में पर्यटकों की पसंदीदा बाजरे की रोटी और दाल बाटी चूरमा लेकर आएं हैं। इन राजस्थानी व्यंजनों का पर्यटक स्वाद चख रहे हैं। इतना ही नहीं महंगाई होने के बावजूद पर्यटकों को किफायती दरों पर ही राजस्थानी खाना परोसा जा रहा हैं। राजस्थानी व्यंजनों के विशेषज्ञ नागौर निवासी रामपाल अपनी 20 सदस्यों की टीम के साथ कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव में पहुंच चुके हैं। रामपाल ने बताया कि पिछले 8 सालों से बढ़े चाव के साथ गीता महोत्सव में आ रहे हैं। इस बार पर्यटकों के लिए राजस्थानी थाली, दालबाटी चूरमा, बाजरे की रोटी, मूंगदाल का हलवा, प्याज वाली कचौरी, मूंगदाल वाली कचौरी, जोधपुरी मिर्ची वड़ा, जोधपुरी मावा कचौरी सहित अन्य व्यंजन लेकर आए हैं।
विज्ञापन
लकड़ी पर की गई नक्काशी पर्यटकों को कर रही आकर्षित
गीता महोत्सव के शिल्प मेले में पहुंचे पर्यटक मोहम्मद आरिफ के वूडन वर्क की तरफ आकर्षित हो रहे है। हर कोई लकड़ी पर की गई नक्काशी का मुरीद बन रहा है। सरस मेले में अपने स्टाल पर बातचीत करते हुए मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके बचत घाट सेल्फ हेल्प ग्रुप को डीआरडीए की तरफ से सरस मेले आमंत्रित किया गया है। इनका यह ग्रुप सहारनपुर में करीब 20 लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहा है। शिल्प मेले में पहुंचने वाले पर्यटक उनकी और आकार्षित हो रहे है और उनके द्वारा लकड़ी के सामान पर की गई कारीगरी की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बताया कि शीशम, सांगवान तथा आम की लकड़ी की वह विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाते हैं। उनके द्वारा बनाई गई मेज की कीमत एक लाख रुपये तक होती हैं। इसके साथ-साथ तक लकड़ी के कार्नर, फोटो फ्रेम, गमले, कमशोल, पार्टीशियन, संदूक, शीशे के बड़े फ्रेम, सजावट का समान आदि बनाया जाता हैं।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र । अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में ब्रह्मसरोवर तट पर लाखों पर्यटक और श्रद्घालु लोक नृत्यों का लुफ्त उठा रहे है। पर्यटकों को देख कलाकारों और शिल्पकारों के चेहरों पर रौनक छाई हुई है और पर्यटक जमकर खरीदारी भी कर रहे है। शुक्रवार को भी लाखों पर्यटकों ने ब्रह्मसरोवर पर मेले व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस महोत्सव की रौनक उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की तरफ से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों के कलाकार ब्रह्मसरोवर के घाटों पर अपने-अपने प्रदेशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ बढ़ा रहे है। मेले के 15वें दिन भी लाखों पर्यटक पहुंचे और जमकर खरीदारी की है। यह सरस और क्राफ्ट मेला 23 दिसंबर तक चलेगा तथा छुट्टी होने के कारण शनिवार व रविवार को लाखों और श्रद्घालु पहुंचने की संभावना है। इस महोत्सव ने हरियाणा ही नहीं पूरे भारत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
रंग-बिरंगे फूलों से रंगीन हुई महोत्सव की फिजा
ब्रह्मसरोवर तट पर कागज से बने रंग-बिरंगे गुलाब और अन्य किस्मों के फूल अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को महकाने का काम कर रहे है। इस महोत्सव में 4 से 5 स्टॉल पर हरियाणा के पानीपत, चंडीगढ़ और पश्चिम बंगाल से पहुंचे शिल्पकार विभिन्न प्रकार के कागज व सोला वुड के फूलों को बनाकर पर्यटकों के लिए लेकर आए है। इन फूलों को बनाकर शिल्पकार कई अवॉर्ड हासिल कर चुके है। अहम पहलु यह है कि कागजों को फल का रूप देने का काम कई सालों से कर रहे है। शिल्पकार देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए बेहतरीन रंग-बिरंगे सुंदर फूलों को तैयार करके लाएं है। इन फूलों की कीमत भी आम पर्यटकों की पहुंच तक होगी और पिछले 10 सालों से पर्यटकों के लिए यह फुल लेकर आ रहे हैं। शिल्पकार सोयलन मोदी ने विशेष बातचीत करते हुए बताया कि सरकार कागज से बने फूलों की शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई है।
विज्ञापन
बाजरे की रोटी और दाल बाटी चूरमा का स्वाद चख रहे हैं पर्यटक
राजस्थान के विभिन्न जिलों से गीता महोत्सव में पर्यटकों की पसंदीदा बाजरे की रोटी और दाल बाटी चूरमा लेकर आएं हैं। इन राजस्थानी व्यंजनों का पर्यटक स्वाद चख रहे हैं। इतना ही नहीं महंगाई होने के बावजूद पर्यटकों को किफायती दरों पर ही राजस्थानी खाना परोसा जा रहा हैं। राजस्थानी व्यंजनों के विशेषज्ञ नागौर निवासी रामपाल अपनी 20 सदस्यों की टीम के साथ कुरुक्षेत्र के गीता महोत्सव में पहुंच चुके हैं। रामपाल ने बताया कि पिछले 8 सालों से बढ़े चाव के साथ गीता महोत्सव में आ रहे हैं। इस बार पर्यटकों के लिए राजस्थानी थाली, दालबाटी चूरमा, बाजरे की रोटी, मूंगदाल का हलवा, प्याज वाली कचौरी, मूंगदाल वाली कचौरी, जोधपुरी मिर्ची वड़ा, जोधपुरी मावा कचौरी सहित अन्य व्यंजन लेकर आए हैं।
विज्ञापन
लकड़ी पर की गई नक्काशी पर्यटकों को कर रही आकर्षित
गीता महोत्सव के शिल्प मेले में पहुंचे पर्यटक मोहम्मद आरिफ के वूडन वर्क की तरफ आकर्षित हो रहे है। हर कोई लकड़ी पर की गई नक्काशी का मुरीद बन रहा है। सरस मेले में अपने स्टाल पर बातचीत करते हुए मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके बचत घाट सेल्फ हेल्प ग्रुप को डीआरडीए की तरफ से सरस मेले आमंत्रित किया गया है। इनका यह ग्रुप सहारनपुर में करीब 20 लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहा है। शिल्प मेले में पहुंचने वाले पर्यटक उनकी और आकार्षित हो रहे है और उनके द्वारा लकड़ी के सामान पर की गई कारीगरी की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बताया कि शीशम, सांगवान तथा आम की लकड़ी की वह विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाते हैं। उनके द्वारा बनाई गई मेज की कीमत एक लाख रुपये तक होती हैं। इसके साथ-साथ तक लकड़ी के कार्नर, फोटो फ्रेम, गमले, कमशोल, पार्टीशियन, संदूक, शीशे के बड़े फ्रेम, सजावट का समान आदि बनाया जाता हैं।