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तिलक, गांधी, राधाकृष्णन की गीता से भी महंगी है स्वामी ज्ञानानंद की गीता
Updated Fri, 24 Nov 2017 12:54 AM IST
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तिलक, गांधी, राधाकृष्णन की गीता से भी महंगी है स्वामी ज्ञानानंद की गीता
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
स्वामी ज्ञानानंद और उनकी गीता को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। वजह बताई जा रही है कि केडीबी ने गीता प्रेरणा खरीदी है। इसका मूल्य 600 रुपये प्रिंट है। इसके उलट महान क्रांतिकारी बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, महान दार्शनिक तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्लि राधा कृष्णन और गोरखपुर प्रेस से प्रकाशित जय दयाल गोयनंदका, स्वामी रामसुखदास आदि की गीता प्रमुख है और इनका दाम भी कम है। ये गीता मार्केट में अधिकांश दुकानों पर उलब्ध भी हैं, जबकि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज की मनोज पब्लिकेशन से प्रकाशित गीता प्रेरणा आम दुकानों पर नहीं मिल रही।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में राष्ट्रपति और देश-दुनिया से यहां पहुंचने वाले वीवीआईपी को भेंट करने के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा की बड़ी संख्या में प्रतियां खरीदी हैं। इस गीता का मूल्य 600 रुपये प्रिंट है। खास बात यह है कि मार्केट में अनेक संत महात्मा, महापुरुषों की गीता उपलब्ध है। यह तमाम गीता कुरुक्षेत्र ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर के इर्दगिर्द स्थित धार्मिक पुस्तक भंडारों पर उपलब्ध भी हैं। दूसरी तरफ जब इन दुकानों पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो वह नहीं मिली। इनमें से सिर्फ एक दुकानदार व्यास धार्मिक पुस्तक भंडार ने यह जरूर बताया कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा उन्होंने दो तीन साल पहले तीन प्रतियां 500 रुपये में अवश्य बेची थीं। यह भी बताया कि यह गीता खुद उन्होंने भी पढ़ी थी।
पन्ने भी ज्यादा और दाम भी कम
स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा में 610 पेज और इसकी कीमत 600 रुपये है। दूसरी तरफ, गोरखपुर प्रेस से प्रकाशित प्रख्यात संत स्वामी रामसुखदास की श्रीमद्भगवद गीता 1296 पेज की है। इसकी कीमत मात्र 250 रुपये है। गोरखपुर प्रेस से ही प्रकाशित जयदयाल गोयंदका की श्रीमद्भगवद् गीता भी स्वामी ज्ञानानंद की गीता प्रेरणा से अधिक पेज, यानी 800 पन्नों की है। इसका मूल्य सिर्फ 100 रुपये है। महान स्वतंत्रता सेनानी बालगंगाधर तिलक की श्रीमद्भगवद गीता 656 पेज की है। इसका मूल्य 400 रुपये है। इनके अलावा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की भगवदगीता 455 पेज की है। इसका मूल्य 315 प्रिंट है। ज्यादा संख्या में लेने पर इन सभी पुस्तकों पर 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट भी है।
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गीता और गीता मनीषी पर केडीबी रुख साफ करे : गर्ग
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने स्वामी ज्ञानानंद की गीता खरीदने के मामले में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड पर अपना रुख साफ रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज को गीता मनीषी की उपाधि कहां से प्राप्त हुई है। यह आम जनता भी जानना चाहती है। गीता मनीषी का आधार क्या था। इस उपाधि के लिए क्या योग्यता और विशेषता होनी थी। इससे स्वामी ज्ञानानंद गीता मनीषी बने। उन्होंने केडीबी से मांग की है कि केडीबी ने राष्ट्रपति, केंद्रीय और मंत्रियों के अलावा देश-दुनिया से कुरुक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती में पहुंचने वाले वीवीआईपी को देने के लिए जो गीता केडीबी ने 600 रुपये के हिसाब से खरीदी है, उस पर गीता मनीषी लिखा है। लोग जानना चाहते हैं कि यह उपाधि किन शंकराचार्य या संस्था ने प्रदान की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
स्वामी ज्ञानानंद और उनकी गीता को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। वजह बताई जा रही है कि केडीबी ने गीता प्रेरणा खरीदी है। इसका मूल्य 600 रुपये प्रिंट है। इसके उलट महान क्रांतिकारी बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, महान दार्शनिक तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्लि राधा कृष्णन और गोरखपुर प्रेस से प्रकाशित जय दयाल गोयनंदका, स्वामी रामसुखदास आदि की गीता प्रमुख है और इनका दाम भी कम है। ये गीता मार्केट में अधिकांश दुकानों पर उलब्ध भी हैं, जबकि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज की मनोज पब्लिकेशन से प्रकाशित गीता प्रेरणा आम दुकानों पर नहीं मिल रही।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में राष्ट्रपति और देश-दुनिया से यहां पहुंचने वाले वीवीआईपी को भेंट करने के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा की बड़ी संख्या में प्रतियां खरीदी हैं। इस गीता का मूल्य 600 रुपये प्रिंट है। खास बात यह है कि मार्केट में अनेक संत महात्मा, महापुरुषों की गीता उपलब्ध है। यह तमाम गीता कुरुक्षेत्र ब्रह्मसरोवर और सन्निहित सरोवर के इर्दगिर्द स्थित धार्मिक पुस्तक भंडारों पर उपलब्ध भी हैं। दूसरी तरफ जब इन दुकानों पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा के बारे में पूछा गया तो वह नहीं मिली। इनमें से सिर्फ एक दुकानदार व्यास धार्मिक पुस्तक भंडार ने यह जरूर बताया कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा उन्होंने दो तीन साल पहले तीन प्रतियां 500 रुपये में अवश्य बेची थीं। यह भी बताया कि यह गीता खुद उन्होंने भी पढ़ी थी।
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पन्ने भी ज्यादा और दाम भी कम
स्वामी ज्ञानानंद महाराज की गीता प्रेरणा में 610 पेज और इसकी कीमत 600 रुपये है। दूसरी तरफ, गोरखपुर प्रेस से प्रकाशित प्रख्यात संत स्वामी रामसुखदास की श्रीमद्भगवद गीता 1296 पेज की है। इसकी कीमत मात्र 250 रुपये है। गोरखपुर प्रेस से ही प्रकाशित जयदयाल गोयंदका की श्रीमद्भगवद् गीता भी स्वामी ज्ञानानंद की गीता प्रेरणा से अधिक पेज, यानी 800 पन्नों की है। इसका मूल्य सिर्फ 100 रुपये है। महान स्वतंत्रता सेनानी बालगंगाधर तिलक की श्रीमद्भगवद गीता 656 पेज की है। इसका मूल्य 400 रुपये है। इनके अलावा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की भगवदगीता 455 पेज की है। इसका मूल्य 315 प्रिंट है। ज्यादा संख्या में लेने पर इन सभी पुस्तकों पर 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट भी है।
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गीता और गीता मनीषी पर केडीबी रुख साफ करे : गर्ग
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने स्वामी ज्ञानानंद की गीता खरीदने के मामले में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड पर अपना रुख साफ रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज को गीता मनीषी की उपाधि कहां से प्राप्त हुई है। यह आम जनता भी जानना चाहती है। गीता मनीषी का आधार क्या था। इस उपाधि के लिए क्या योग्यता और विशेषता होनी थी। इससे स्वामी ज्ञानानंद गीता मनीषी बने। उन्होंने केडीबी से मांग की है कि केडीबी ने राष्ट्रपति, केंद्रीय और मंत्रियों के अलावा देश-दुनिया से कुरुक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती में पहुंचने वाले वीवीआईपी को देने के लिए जो गीता केडीबी ने 600 रुपये के हिसाब से खरीदी है, उस पर गीता मनीषी लिखा है। लोग जानना चाहते हैं कि यह उपाधि किन शंकराचार्य या संस्था ने प्रदान की है।