{"_id":"68619f18354de56806021bac","slug":"116-people-lost-their-lives-on-railway-tracks-in-one-and-a-half-years-kurukshetra-news-c-45-1-kur1008-137966-2025-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: डेढ़ साल में रेलवे ट्रैक पर 116 की गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: डेढ़ साल में रेलवे ट्रैक पर 116 की गई जान
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। रेलवे ट्रैक पर लोगों की लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ रही है। यही कारण है कि पिछले डेढ़ साल में ट्रेन से कटकर 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से करीब 25 मामले आत्महत्या के सामने आए हैं।
अभी रेलवे के फाइलों में 17 मृतक अज्ञात के रूप में दर्ज हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। सबसे ज्यादा हादसे डोडा खेड़ी, धीरपुर रेलवे ट्रैक पर पर हो रहे हैं। जांच के बाद सुसाइड के मामलों का ग्राफ और भी बढ़ सकता है।
रेलवे ट्रैक पर मिलने वाले शवों का जीआरपी पुलिस कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराती है। पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे के लिए शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा जाता है। शिनाख्त न होने के बाद संस्था के सहयोग से शव का दाह संस्कार करा दिया जाता है। सब इंस्पेक्टर कमल राणा का कहना है कि मृतकों के पास मिलने वाली नकदी व सामान को एक वर्ष तक मालखाने में सुरक्षित रखा जाता है। प्रत्येक मृतक की शिनाख्त के लिए छह जांचें चलती हैं, इसके बाद अंतिम रिपोर्ट लगाकर फाइल को बंद कर दिया जाता है। शिनाख्त न होने पर हर वर्ष सामान को निष्प्रोज्य घोषित कर दिया जाता है। मृतक के पास जो नकदी मिलती है, उसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है।
विज्ञापन
शिनाख्त के लिए ये उठाए जा रहे कदम ः सब इंस्पेक्टर कमल राणा ने बताया कि जीआरपी शव का पंचनामा भरने से पूर्व अब मूल दशा की फोटो व वीडियो बना रही है। यदि किसी व्यक्ति का शव सवारी ट्रेन में मिलता है तो उस बोगी में ठीक से निरीक्षण कर भौतिक साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। कोच में बैठे आसपास बैठे यात्रियों से पूछताछ की जाती है।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। रेलवे ट्रैक पर लोगों की लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ रही है। यही कारण है कि पिछले डेढ़ साल में ट्रेन से कटकर 116 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से करीब 25 मामले आत्महत्या के सामने आए हैं।
अभी रेलवे के फाइलों में 17 मृतक अज्ञात के रूप में दर्ज हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। सबसे ज्यादा हादसे डोडा खेड़ी, धीरपुर रेलवे ट्रैक पर पर हो रहे हैं। जांच के बाद सुसाइड के मामलों का ग्राफ और भी बढ़ सकता है।
विज्ञापन
रेलवे ट्रैक पर मिलने वाले शवों का जीआरपी पुलिस कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराती है। पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे के लिए शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा जाता है। शिनाख्त न होने के बाद संस्था के सहयोग से शव का दाह संस्कार करा दिया जाता है। सब इंस्पेक्टर कमल राणा का कहना है कि मृतकों के पास मिलने वाली नकदी व सामान को एक वर्ष तक मालखाने में सुरक्षित रखा जाता है। प्रत्येक मृतक की शिनाख्त के लिए छह जांचें चलती हैं, इसके बाद अंतिम रिपोर्ट लगाकर फाइल को बंद कर दिया जाता है। शिनाख्त न होने पर हर वर्ष सामान को निष्प्रोज्य घोषित कर दिया जाता है। मृतक के पास जो नकदी मिलती है, उसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है।
विज्ञापन
शिनाख्त के लिए ये उठाए जा रहे कदम ः सब इंस्पेक्टर कमल राणा ने बताया कि जीआरपी शव का पंचनामा भरने से पूर्व अब मूल दशा की फोटो व वीडियो बना रही है। यदि किसी व्यक्ति का शव सवारी ट्रेन में मिलता है तो उस बोगी में ठीक से निरीक्षण कर भौतिक साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। कोच में बैठे आसपास बैठे यात्रियों से पूछताछ की जाती है।