{"_id":"599c74834f1c1b206f8b47c0","slug":"11503425667-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत ही नहीं,विदेशी माटी की महक भी होगी धर्मक्षेत्र के गीता उत्सव में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत ही नहीं,विदेशी माटी की महक भी होगी धर्मक्षेत्र के गीता उत्सव में
Updated Tue, 22 Aug 2017 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहली बार 17 दिन तक चलेगा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव
-2017 से राष्ट्रीय सरस मेला होगा गीता जयंती का स्थायी फीचर
-राष्ट्रपति की उपस्थिति एवं कंट्री पार्टनर का साथ होगा उत्सव में खास
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
विश्व का हुनर, राष्ट्रपति की उपस्थिति, 17 दिन का उत्सव, कंट्री पार्टनर और नया मंच ये खास होगा दुनिया में कर्म का संदेश देने वाले पवित्र ग्रंथ गीता के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुरुक्षेत्र फेस्टीवल में। पिछले वर्षों में गीता जयंती उत्सव बहुरंगी संस्कृतियों के महाकुंभ के रूप में उभर कर सामने आया है,मगर वर्ष 2017 का गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव कई मायनों में विशेष होगा। पिछले करीब तीन दशकों में सरकारी स्तर पर कुरुक्षेत्र में आयोजित किये जा रहे गीता जयंती उत्सव में यह पहली बार है,जब यह उत्सव 17 दिन तक 17 नवंबर से 3 दिसंबर तक चलेगा। इसके अलावा यह पहली बार होगा जब गीता जयंती के सांस्कृतिक कार्यक्रम ब्रह्मसरोवर के मध्य स्थित पुरुषोत्तम पुरा बाग से शिफ्ट कर गीता ज्ञानम संस्थानम के ठीक सामने तिरुपति मंदिर के निकट केडीबी के खाली मैदान में कराने की योजना राज्य सरकार की ओर से स्टेट लेवल की मीटिंग में फाइनल की गई है।
बैठक में यह भी तय किया गया है कि गीता जयंती-2017 से राष्ट्रीय स्तर के सरस मेले को स्थायी फीचर के रूप में शामिल किया जाए, यानी केंद्र सरकार द्वारा आयोजित किया जाने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का मेला हर साल गीता जयंती मेले की शान बनेगा। राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। जाहिर कि पिछले वर्ष से राज्य सरकार ने इस उत्सव को केंद्र सरकार की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम मनाने की शुरुआत की थी, लेकिन कुरुक्षेत्र के आयोजन में दूसरे देशों की भागीदारी शून्य प्राय रही। हालांकि वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्राफ्ट मेले को गीता जयंती में शामिल करने की योजना बनी थी,लेकिन वह खटाई में चली गई, लेकिन इस बार इंटरनेशनल क्राफ्ट के साथ कंट्री पार्टनर को भी गीता जयंती से जोड़ा जा रहा है।
सूरजकुंड मेले की तर्ज पर पहली बार गीता जयंती उत्सव में कंट्री पार्टनर की भूमिका दिखेगी है और इसकी शुरुआत दुनिया में लघु भारत की पहचान रखने वाले देश मारीशस से हो रही है, मारीशस के साथ उत्तर प्रदेश की संस्कृति और खानपान का संगम भी अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव में होने जा रहा है। वहीं यह भी पहली बार होगा जब गीता जयंती उत्सव में भारत के राष्ट्रपति शिरकत करेेंगे। बता दें कि 2002 के गीता जयंती उत्सव में तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत और 2003 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने शिरकत की थी। इस बात मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उत्सव के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को न्योता दिया है और उनके द्वारा गीता जयंती समारोह में शामिल होने की सहमति भी मिल चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
-2017 से राष्ट्रीय सरस मेला होगा गीता जयंती का स्थायी फीचर
-राष्ट्रपति की उपस्थिति एवं कंट्री पार्टनर का साथ होगा उत्सव में खास
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
विश्व का हुनर, राष्ट्रपति की उपस्थिति, 17 दिन का उत्सव, कंट्री पार्टनर और नया मंच ये खास होगा दुनिया में कर्म का संदेश देने वाले पवित्र ग्रंथ गीता के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुरुक्षेत्र फेस्टीवल में। पिछले वर्षों में गीता जयंती उत्सव बहुरंगी संस्कृतियों के महाकुंभ के रूप में उभर कर सामने आया है,मगर वर्ष 2017 का गीता जयंती कुरुक्षेत्र उत्सव कई मायनों में विशेष होगा। पिछले करीब तीन दशकों में सरकारी स्तर पर कुरुक्षेत्र में आयोजित किये जा रहे गीता जयंती उत्सव में यह पहली बार है,जब यह उत्सव 17 दिन तक 17 नवंबर से 3 दिसंबर तक चलेगा। इसके अलावा यह पहली बार होगा जब गीता जयंती के सांस्कृतिक कार्यक्रम ब्रह्मसरोवर के मध्य स्थित पुरुषोत्तम पुरा बाग से शिफ्ट कर गीता ज्ञानम संस्थानम के ठीक सामने तिरुपति मंदिर के निकट केडीबी के खाली मैदान में कराने की योजना राज्य सरकार की ओर से स्टेट लेवल की मीटिंग में फाइनल की गई है।
बैठक में यह भी तय किया गया है कि गीता जयंती-2017 से राष्ट्रीय स्तर के सरस मेले को स्थायी फीचर के रूप में शामिल किया जाए, यानी केंद्र सरकार द्वारा आयोजित किया जाने वाला यह राष्ट्रीय स्तर का मेला हर साल गीता जयंती मेले की शान बनेगा। राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। जाहिर कि पिछले वर्ष से राज्य सरकार ने इस उत्सव को केंद्र सरकार की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम मनाने की शुरुआत की थी, लेकिन कुरुक्षेत्र के आयोजन में दूसरे देशों की भागीदारी शून्य प्राय रही। हालांकि वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्राफ्ट मेले को गीता जयंती में शामिल करने की योजना बनी थी,लेकिन वह खटाई में चली गई, लेकिन इस बार इंटरनेशनल क्राफ्ट के साथ कंट्री पार्टनर को भी गीता जयंती से जोड़ा जा रहा है।
विज्ञापन
सूरजकुंड मेले की तर्ज पर पहली बार गीता जयंती उत्सव में कंट्री पार्टनर की भूमिका दिखेगी है और इसकी शुरुआत दुनिया में लघु भारत की पहचान रखने वाले देश मारीशस से हो रही है, मारीशस के साथ उत्तर प्रदेश की संस्कृति और खानपान का संगम भी अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव में होने जा रहा है। वहीं यह भी पहली बार होगा जब गीता जयंती उत्सव में भारत के राष्ट्रपति शिरकत करेेंगे। बता दें कि 2002 के गीता जयंती उत्सव में तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत और 2003 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने शिरकत की थी। इस बात मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उत्सव के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को न्योता दिया है और उनके द्वारा गीता जयंती समारोह में शामिल होने की सहमति भी मिल चुकी है।
विज्ञापन