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विद्यापीठ में हुए हास्य कवि सम्मेलन में झूमे काव्य प्रेमी
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:30 AM IST
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हास्य कवि सम्मेलन में भ्रष्टाचार, राजनीति और मानवीय संवेदनाओं पर कवियों ने किए कटाक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव पर जयराम विद्यापीठ परिसर में हास्य कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। प्रख्यात कवियों में जयपुर से संपत सरल, कानपुर से प्रमोद तिवारी, महेंद्र अजनबी, डॉ. ऋतु गोयल और सुरेंद्र शर्मा ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। हास्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ ने सरस्वती वंदना से किया गया।
कवि महेंद्र अजनबी ने अपनी रचनाओं में राज नेताओं पर खूब कटाक्ष किए। उन्होंने समाज की परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज तो भूत भी आदमी से डरते हैं। आदमी को आदमी पर ही विश्वास नहीं रहा। डॉ. ऋतु गोयल ने कहा कि गमों के आंसुओं को उबाल देना, दुनिया में आकर हर कोई क्यों नहीं मुस्कराता। जयपुर से संपत सरल ने अपनी रचना में जीएसटी और नोटबंदी पर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि समाज में क्या हालत आ गए हैं कि शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री बनाया जा रहा है। देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने नेताओं पर व्यंग्य किया कि देश में बुलेट ट्रेन लाने के लिए जापान से लोन लिया जा रहा है। कानपुर से आए प्रमोद तिवारी ने कहा कि एक समय था कि घड़ी किसी एक पास होती थी, लेकिन हर किसी के पास समय होता था। आज हर व्यक्ति के पास घड़ी है, लेकिन समय नहीं है। तिवारी ने जीवन को दुकान बताया और कहा पता नहीं इस का शटर कब गिर जाए। हरियाणा के प्रमुख हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने व्यंग्य के साथ महिलाओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति की भी सुंदर प्रस्तुति दी। उन्होंने भारतीयता और राष्ट्र प्रेम पर भी कटाक्ष किए। सुरेंद्र शर्मा ने कहा भ्रष्टाचार को मिटाया नहीं जा सकता, पहले खुद को भ्रष्ट होने बचाना होगा। इस अवसर पर कुलवंत सैनी, राजेंद्र सिंघल, खरैती लाल 1िसंगला, केके कौशिक, राज कुमार, राजेश सिंगला, डा. अजय गोयल, आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव पर जयराम विद्यापीठ परिसर में हास्य कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। प्रख्यात कवियों में जयपुर से संपत सरल, कानपुर से प्रमोद तिवारी, महेंद्र अजनबी, डॉ. ऋतु गोयल और सुरेंद्र शर्मा ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। हास्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ ने सरस्वती वंदना से किया गया।
कवि महेंद्र अजनबी ने अपनी रचनाओं में राज नेताओं पर खूब कटाक्ष किए। उन्होंने समाज की परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज तो भूत भी आदमी से डरते हैं। आदमी को आदमी पर ही विश्वास नहीं रहा। डॉ. ऋतु गोयल ने कहा कि गमों के आंसुओं को उबाल देना, दुनिया में आकर हर कोई क्यों नहीं मुस्कराता। जयपुर से संपत सरल ने अपनी रचना में जीएसटी और नोटबंदी पर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि समाज में क्या हालत आ गए हैं कि शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री बनाया जा रहा है। देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने नेताओं पर व्यंग्य किया कि देश में बुलेट ट्रेन लाने के लिए जापान से लोन लिया जा रहा है। कानपुर से आए प्रमोद तिवारी ने कहा कि एक समय था कि घड़ी किसी एक पास होती थी, लेकिन हर किसी के पास समय होता था। आज हर व्यक्ति के पास घड़ी है, लेकिन समय नहीं है। तिवारी ने जीवन को दुकान बताया और कहा पता नहीं इस का शटर कब गिर जाए। हरियाणा के प्रमुख हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने व्यंग्य के साथ महिलाओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति की भी सुंदर प्रस्तुति दी। उन्होंने भारतीयता और राष्ट्र प्रेम पर भी कटाक्ष किए। सुरेंद्र शर्मा ने कहा भ्रष्टाचार को मिटाया नहीं जा सकता, पहले खुद को भ्रष्ट होने बचाना होगा। इस अवसर पर कुलवंत सैनी, राजेंद्र सिंघल, खरैती लाल 1िसंगला, केके कौशिक, राज कुमार, राजेश सिंगला, डा. अजय गोयल, आदि मौजूद रहे।
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