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Kurukshetra News: लोक अदालत में 15,057 मामलों में से 10,052 का निपटारा
Sun, 14 Dec 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 14 Dec 2025 01:36 AM IST
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कुरुक्षेत्र। लोक अदालत में सुनवाई करती न्यायधीशों की बेंच। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिला कोर्ट परिसर में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 15,161 मामलों में से 10,052 का मौके पर निपटारा किया गया, जिसमें आठ करोड़ 64 लाख 21 हजार 200 रुपये के मुआवजे के आदेश विभिन्न आपराधिक, एन आई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम से संबंधित विवाद मामले, राजस्व सहित अन्य मामलों में पारित करते हुए निपटारा किया गया है। इस दौरान पूरे दिन अदालत में फरियादियों की लंबी-लंबी लाइनें लगी दिखाई दी।
राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटान करने के लिए जिला न्यायालय परिसर कुरुक्षेत्र, उपमंडल पिहोवा व शाहाबाद में बैचों का गठन किया गया था। इनमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल, परिवार न्यायालय प्रधान विवेक सिंघल, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी स्मृति, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी गिरराज सिंह, एलडी सब डिविजनल जूडीशियल मजिस्ट्रेट शाहाबाद एमएस पल्लवी ओझा, उप मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट पिहोवा कपिल और स्थाई लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता की बैंच ने विभिन्न मामलों की सुनवाई की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने बताया कि प्री-लिटिगेशन के 10,075 में से 8,192 मामलों में एक करोड़ 18 लाख 19 हजार नौ सौ रुपये का मुआवजा जारी करते हुए मामले निपटाए गए, जिनमें बैंक रिकवरी के 1,708 में से 33 मामलों में 27 लाख 93 हजार 500 रुपये व अन्य 5,244 मामलों में 5,036 मामलों को निपटाते हुए 90,26,400 रुपये का मुआवजा जारी किया है। साथ ही रेवन्यू के सभी 3,123 मामलों का निपटान किया गया है। सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने कहा कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, लागत-प्रभावी और सौहार्दपूर्ण न्याय सुनिश्चित करने में प्रभावी रही। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, लागत-प्रभावी और सौहार्दपूर्ण न्याय सुनिश्चित करने में प्रभावी रही।
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- पांच हजार मामलों में से 18 सौ मामलों का निपटारा
पोस्ट-लिटिगेशन के 5,086 मामलों में से 1,860 में सात करोड़ 46 लाख एक हजार तीन सौ रुपये का मुआवजा जारी करते हुए मामले निपटाए गए, जिनमें जिनमें बैंक रिकवरी के 26 में से तीन मामलों में 27 लाख 93 हजार 500 रुपये, क्रिमिनल कंपाउंडेशन के 191 में से 93 मामलों में चार हजार रुपये, बिजली बिल के सभी 447 मामलों को निपटाया गया, एमएसीटी के 208 में से 64 मामलों में पांच करोड़ 79 लाख पांच हजार रुपये, वैवाहिक कलह के 121 में से 52 मामले, एनआई एक्ट के 1,823 में से 129 मामलों में 4.65 लाख रुपये, सिविल सूट के 513 में से 164 व अन्य 1,757 मामलों में 908 मामलों को निपटाते हुए एक करोड़ 62 लाख 27 हजार 300 रुपये की सेटलमेंट के आदेश पारित हुए।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटान करने के लिए जिला न्यायालय परिसर कुरुक्षेत्र, उपमंडल पिहोवा व शाहाबाद में बैचों का गठन किया गया था। इनमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल, परिवार न्यायालय प्रधान विवेक सिंघल, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मोहिनी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी स्मृति, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी गिरराज सिंह, एलडी सब डिविजनल जूडीशियल मजिस्ट्रेट शाहाबाद एमएस पल्लवी ओझा, उप मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट पिहोवा कपिल और स्थाई लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता की बैंच ने विभिन्न मामलों की सुनवाई की।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव व सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने बताया कि प्री-लिटिगेशन के 10,075 में से 8,192 मामलों में एक करोड़ 18 लाख 19 हजार नौ सौ रुपये का मुआवजा जारी करते हुए मामले निपटाए गए, जिनमें बैंक रिकवरी के 1,708 में से 33 मामलों में 27 लाख 93 हजार 500 रुपये व अन्य 5,244 मामलों में 5,036 मामलों को निपटाते हुए 90,26,400 रुपये का मुआवजा जारी किया है। साथ ही रेवन्यू के सभी 3,123 मामलों का निपटान किया गया है। सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने कहा कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, लागत-प्रभावी और सौहार्दपूर्ण न्याय सुनिश्चित करने में प्रभावी रही। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, लागत-प्रभावी और सौहार्दपूर्ण न्याय सुनिश्चित करने में प्रभावी रही।
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- पांच हजार मामलों में से 18 सौ मामलों का निपटारा
पोस्ट-लिटिगेशन के 5,086 मामलों में से 1,860 में सात करोड़ 46 लाख एक हजार तीन सौ रुपये का मुआवजा जारी करते हुए मामले निपटाए गए, जिनमें जिनमें बैंक रिकवरी के 26 में से तीन मामलों में 27 लाख 93 हजार 500 रुपये, क्रिमिनल कंपाउंडेशन के 191 में से 93 मामलों में चार हजार रुपये, बिजली बिल के सभी 447 मामलों को निपटाया गया, एमएसीटी के 208 में से 64 मामलों में पांच करोड़ 79 लाख पांच हजार रुपये, वैवाहिक कलह के 121 में से 52 मामले, एनआई एक्ट के 1,823 में से 129 मामलों में 4.65 लाख रुपये, सिविल सूट के 513 में से 164 व अन्य 1,757 मामलों में 908 मामलों को निपटाते हुए एक करोड़ 62 लाख 27 हजार 300 रुपये की सेटलमेंट के आदेश पारित हुए।