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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Yamuna's water level decreased but left traces of destruction

10. यमुना का जलस्तर घटा पर छोड़ गया तबाही के निशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Aug 2022 03:42 AM IST
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Yamuna's water level decreased but left traces of destruction
करनाल। दो दिन के उफान के बाद यमुना का जलस्तर भले ही कुछ घट गया हो, लेकिन तबाही के निशान जल्द मिटने वाले नहीं हैं। खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ फसल खराब हो गई है। इससे एक-एक किसान को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। अब इन हालात में उनके पास सिवाय रोने के और कुछ नहीं है। किसान सरकार से गिरदावरी कराकर उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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वीरवार की हथनीकुंड बैराज से दो लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने के बाद शुक्रवार को अल सुबह यमुना का पानी करनाल क्षेत्र में प्रवेश किया। करीब 24 घंटे तक चले तेज बहाव से भूमि का कटाव भी हुआ और इंद्री व घरौंडा खंड के यमुना के साथ सटे खेतों में फसलें जलमग्न हो गई। शनिवार को पानी कुछ कम हुआ। कई खेतों से पानी पूरी तरह से निकल गया है। जबकि नीचे खेतों में अभी भी पानी जमा है। इधर, सिंचाई विभाग के एक्सईंएन नवतेज सिंह का कहना है कि यमुना में पानी का जलस्तर काफी घट गया है। यमुना में इस समय लगभग 15 से 16 हजार क्यूसिक पानी है। किसानों को इस समय किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
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फसलें पानी में बही, पशुओं का चारा भी नहीं बचा
घरौंडा। लगभग छह गांव के किसानों की लाखों रुपये की सब्जी, ईख व धान की फसल पानी में बर्बाद हो गई है। भूमि का कटाव ज्यादा होने से फसलों का काफी नुकसान होने की आशंका लगाई जा रही है। क्षेत्र के गांव मंगलौरा, सदरपुर, बलहेड़ा, मुंडोगढ़ी, लालूपुरा, देवीपुर के खेतों की स्थिति ज्यादा खराब है। किसानों का कहना है कि अभी तक किसी भी अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली है। गांव मुंडोगढ़ी के किसान इलियास ने बताया कि ईख के खेतों में कटाव होने से सकिल, काला, यामीन सहित अन्य किसानों की लगभग 60से 70 एकड़ फसल पानी में बह गई है। पशुओं का चारा भी खराब हो गया है।
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बलहेड़ा के किसान जावल का कहना है कि उनके गांव के काफी किसान यमुना में खेती बाड़ी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनकी गेहूं के सीजन में लगभग 25 एकड़ फसल जल गई थी। गांव देवीपुर के किसान राणा प्रताप ने बताया कि यमुना में उन्होंने दो एकड़ धनिया व अन्य फसलें लगाई थी। सब नष्ट हो गया।

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पुल नीचा होने से डूबा, ढाई हजार वाहनों का आवागमन प्रभावित
कुंजपुरा। हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर गांव शेरगढ़ टापू के पास यमुना पुल से आवागमन धीरे धीरे सामान्य होने लगा है। चार साल पूर्व यूपी सरकार द्वारा यमुना नदी पर करीब दो किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण करवाया गया था। जबकि हरियाणा की सीमा में मात्र 500 फुट क्षेत्र में ही हरियाणा सरकार की ओर से पुल बनवाया गया है। जिसका ऊंचाई लेवल उत्तर प्रदेश की सीमा में बने पुल की अपेक्षा काफी कम है। ऐसे में यमुना में जलस्तर बढ़ने पर पुल पानी में डूब जाता है। ऐसी स्थिति में छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन बाधित हो जाता है। शेरगढ़ टापू निवासी हरपाल सिंह एवं सुरेश नंबरदार ने बताया कि ग्रामीणों के दर्जनों वाहन दो दिन से उत्तर प्रदेश की सीमा में खड़े है।
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