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Karnal News: दोहरी जिम्मेदारी के बीच व्यक्तित्व विकार से जूझ रही महिलाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2025 01:41 AM IST
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Women struggling with personality disorder amidst dual responsibilities
करनाल। मौजूदा दौर में कामकाजी महिलाएं दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। एक ओर नौकरी का दबाव है तो दूसरी ओर घर की जिम्मेदारियां भी। सुबह घर का काम, फिर ऑफिस और शाम के समय फिर घर को संभालना। इस दिनचर्या के चलते महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं।
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इसका सीधा असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर महिलाओं में व्यक्तित्व विकार को लेकर भी समस्याएं आ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में हर दिन एक से दो महिलाएं आपीडी में आ रही हैं जो इस समस्या को स्वयं में महसूस कर रहीं हैं।
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- जिला नागरिक अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. सौभाग्य सिंधू ने बताया कि इस भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं खुद को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। महिलाओं को घर और काम संभालने के लिए संतुलन बनाकर चलना चाहिए। आज के समय में अधिकतर महिलाएं इसलिए परेशान हैं कि वे केवल घर और काम के बीच ही रह जाती हैं जिससे वह खुद के लिए कोई समय नहीं निकाल पाती हैं।
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कई महिलाएं घर की जिम्मेदारियां की वजह से तंग आ जाती हैं जिससे उनमें चिड़चिड़ापन और अन्य कई बीमारियां देखने को मिल रही हैं। इस समस्या से निकलने के लिए महिलाओं को पूरे दिन में अपने लिए एक से दो घंटे का समय निकालना चाहिए। उन्हें अपनी पसंद और इच्छाओं पर काम करना चाहिए। योग और सैर करनी चाहिए और अच्छा खाना खाएं जिससे सेहत सही रहे।

क्या है व्यक्तित्व विकार ?
- मनोवैज्ञानिक डॉ. सौभाग्य सिंधू ने बताया कि व्यक्तित्व विकार (पर्सनैलिटी डिसॉर्डर) एक मानसिक बीमारी है। इसमें व्यक्ति अपनी पहचान, सोच और व्यवहार को लेकर भ्रमित हो जाता है। महिलाओं में अपने काम के दबाव को लेकर ज्यादा देखने को मिल रहा है। यह विकार धीर-धीर डिप्रेशन और डिसोसिएटिव डिसॉर्डर का रूप ले लेता हैं। इनके कारण महिलाएं खुद को लेकर संदेह में रहने लगती हैं, बार-बार चिड़चिड़ापन और अधिक गुस्सा करना, तनाव के कारण सिर दर्द रहना, काम और रिश्तों को लेकर अंसतोष रहना, निरंतर थकान और शरीर में दर्द रहना इनके लक्षण हैं।

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खुद के लिए समय नहीं निकलता

- कंम्प्यूटर ऑपरेटर भावना का कहना है कि घर और नौकरी को संभालना कई बार मुश्किल होने लगता है। ऑफिस में लंबे घंटों काम करने के बाद घर पर आकर काम करने से चिड़चिड़ापन महसूस होता है और ऐसा लगता है जैसे मैं एक मशीन बन गई हूं। खुद के समय निकालना काफी मुश्किल हो जाता है।



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मानसिक और शारीरिक तनाव से ग्रस्त

-ऑफिस में काम करने वाली राजमनी कहती हैं कि काम करना आज के समय में काफी जरूरी हो गया है। अपने आप को आत्मनिर्भर करना महिलाओं के अहम हो चुका है लेकिन इन सब से मानसिक और शारीरिक थकान होने से तनाव होने लगता है।



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जिंदगी कहीं खो सी गई

- बैंक में काम करने वाली रेनू कहती है कि एक महिला से यही उम्मीद लगाई जाती है कि वे नौकरी करें या न करें लेकिन घर का काम उसे हर हालत में करना होगा। काम का दबाव होने के कारण और दैनिक दिनचर्या व्यस्त होने से लगता है कि जिंदगी जैसे कहीं खो सी गई है।




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काम के लिए शाबाशी न मिलना

-अनीता पेशे से स्कूल अध्यापक हैं। वह बताती हैं कि सारा दिन काम कर के चाहे वह ऑफिस का कार्य हो या घर का काम हो, एक महिला के काम की कोई गिनती नहीं होती है। यदि वह घर भी संभाल रही है और कमा भी रही है तो काम को लेकर परिवार की तरफ से कोई शाबाशी नहीं मिलती है जो तनाव का एक प्रमुख कारण भी बनती है।
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