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महिलाएं अभी भी सुरक्षित नहीं, समाज को सोच बदलने की जरूरत
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71: प0 चिरंजी लाल शर्मा पीजी कॉलेज में आयोजित अमर उजाला अपराजिता के दौरान मौजुद छात्राऐं। अमर उजाल?
करनाल। सेक्टर-14 स्थित पंडित चिरंजी लाल राजकीय महाविद्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से महिला सशक्तीकरण विषय पर अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने मौजूदा समय में महिलाओं की स्थिति विषय पर अपने विचार रखे। छात्राओं ने कहा कि चुप रहने से काम नहीं चलेगा, जहां भी उनके साथ गलत हो रहा हो महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए। पहले की तरह अबला बन कर नहीं रहना चाहिए। समाज को बदलना हमारी भी जिम्मेवारी है।
छात्राआें ने कहा कि पहले के बजाय कुछ सुधार हुआ है लेकिन अब भी समाज को महिलाओं को लेकर अपनी सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अब भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पातीं।
महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें पढ़ने या काम पर जाते समय छेड़खानी समेत अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मंजू
महिलाओं को खुद भी मजबूत बनना चाहिए। अगर उनके साथ कोई बुरा बर्ताव करे तो उसका निर्भीकता से जवाब देना चाहिए।
जागृति
समाज में महिलाओं को शुरू से ही दबाकर रखा जाता है जो प्रवृति निश्चित तौर पर बदलनी चाहिए ताकि वह भी आगे बढ़ सकें।
दिव्यांशी
महिलाओं को अपने जीवन में अपने हक के लिए खुद निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि वह भी समाज का एक हिस्सा है और जीने का अधिकार रखतीं हैं।
समृद्घि
समाज में अच्छे लड़के भी हैं जो महिलाओं की इज्जत करते हैं। इसलिए कुछ लड़कों को लेकर सभी को बुरा नहीं कहा जा सकता।
अमीषा
कुछ महिलाएं भी अपने अधिकारों का नाजायज फायदा उठाती हैं जो कि गलत है। लड़कों को भी समान रूप से सम्मान देना चाहिए।
गायत्री
बाक्स- 78
समाज के लोगों को महिलाओं के पहनावे से उसके चरित्र का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। सभी को अपनी जिंदगी में आजादी का अधिकार है।
तान्या
बाक्स- 79
जहां भी गलत हो रहा हो महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए। पहले की तरह अबला नारी बन कर नहीं रहना चाहिए। समाज को बदलना हमारी भी जिम्मेवारी है।
आंचल
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छात्राआें ने कहा कि पहले के बजाय कुछ सुधार हुआ है लेकिन अब भी समाज को महिलाओं को लेकर अपनी सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अब भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पातीं।
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महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें पढ़ने या काम पर जाते समय छेड़खानी समेत अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मंजू
महिलाओं को खुद भी मजबूत बनना चाहिए। अगर उनके साथ कोई बुरा बर्ताव करे तो उसका निर्भीकता से जवाब देना चाहिए।
जागृति
समाज में महिलाओं को शुरू से ही दबाकर रखा जाता है जो प्रवृति निश्चित तौर पर बदलनी चाहिए ताकि वह भी आगे बढ़ सकें।
दिव्यांशी
महिलाओं को अपने जीवन में अपने हक के लिए खुद निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि वह भी समाज का एक हिस्सा है और जीने का अधिकार रखतीं हैं।
समृद्घि
समाज में अच्छे लड़के भी हैं जो महिलाओं की इज्जत करते हैं। इसलिए कुछ लड़कों को लेकर सभी को बुरा नहीं कहा जा सकता।
अमीषा
कुछ महिलाएं भी अपने अधिकारों का नाजायज फायदा उठाती हैं जो कि गलत है। लड़कों को भी समान रूप से सम्मान देना चाहिए।
गायत्री
बाक्स- 78
समाज के लोगों को महिलाओं के पहनावे से उसके चरित्र का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। सभी को अपनी जिंदगी में आजादी का अधिकार है।
तान्या
बाक्स- 79
जहां भी गलत हो रहा हो महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए। पहले की तरह अबला नारी बन कर नहीं रहना चाहिए। समाज को बदलना हमारी भी जिम्मेवारी है।
आंचल