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मिलर्स ने खरीद से फिर खींचे हाथ, धान से अटी मंडियां
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने राइस मिलर्स की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आश्वस्त कर दिया था लेकिन करनाल जिले में राइस मिलर्स 24 घंटे भी अनाज मंडियों में नहीं रुके। धान को मंडियों से बाहर ले जाने के लिए ऑनलाइन पास जारी न होने, मंडियों में नए धान के लिए जगह न मिलने आदि समस्याओं को लेकर वीरवार सुबह से ही राइस मिलर्स ने मंडियों में धान खरीद करने से इनकार कर दिया। जिससे धान से मंडियां अटी हैं।
इसके बाद एक होटल में करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की बैठक कर तय किया गया कि जब तक खरीदा गया धान उनके मिलों में नहीं पहुंच जाता, तब तक वह मंडियों में आकर धान नहीं खरीदेंगे। यदि खरीद एजेंसी धान की खरीद कर ट्रांसपोर्टर के जरिए धान को राइस मिलों तक पहुंचाती है, तो मिलर्स धान लेने को तैयार हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा धान में अधिक नमी का है। जो धान तीन से पांच अक्तूबर तक खरीद एजेंसियों ने खरीदा है, उसे राइस मिलर्स को अभिलेखों में आवंटित तो कर दिया गया लेकिन सीएमआर के लिए राइस मिलर्स ने पंजीकरण ही आज कराया है। यही कारण है कि ऑनलाइन गेटपास नहीं कट रहे थे। राइस मिलर्स चाहते हैं कि पहले की तरह मैन्युअल गेटपास जारी किए जाएं। लेकिन सरकार ने गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए ऑनलाइन गेटपास जारी होने के बाद ही फसल को मंडी से बाहर ले जाने के आदेश दिए हैं।
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250 से अधिक ट्रक और ट्रालियों में भरा है धान
परिणाम यह है कि 250 से अधिक ट्रक व ट्रालियों में धान भरा है, लेकिन ऑनलाइन गेट पास जारी न हो पाने के कारण दो दिन से करनाल अनाज मंडी गेट पर बाहर जाने के इंतजार में फसल खड़ी है। लिफ्टिंग न होने के कारण अनाज मंडी फुल हो गई। यही कारण है कि मंडी में धान लेकर आने वाले किसानों की लाइन लंबी हो गई है। बाहरी गेटपास में देरी के विरोध में सिर्फ 24 घंटे बाद ही राइस मिलर्स ने धान खरीद से फिर हाथ खींच लिए हैं। वीरवार को पूरे दिन राइस मिलर्स ने खरीद नहीं की। हालांकि मार्केटिंग बोर्ड के क्षेत्रीय प्रशासक गगनदीप सिंह, जिला विपणन एवं प्रवर्तन अधिकारी ईश्वर राणा, सचिव चंद्रप्रकाश आदि ने राइस मिलर्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, इसमें तो राइस मिलर्स ने हामी भर दी लेकिन बाहर निकलते ही फिर मुकर गए। इसी दौरान करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने प्रधान विजय टक्कर व विनोद गोयल की अध्यक्षता में एक होटल में बैठक की। जिसमें तय किया गया कि जब तक लिफ्टिंग नहीं होती, खरीदा गया धान मिलों में नहीं पहुंच जाता, तब तक राइस मिलर्स मंडियों में जाकर धान नहीं खरीदेंगे। एजेंसियों के निरीक्षक चाहें तो धान खरीदें, ट्रांसपोर्टर के माध्यम से धान को उनके राइस मिलों में पहुंचा दें तो वह धान ले लेंगे। बैठक में राजेंद्र रहेजा, निशांत राणा, डा.अनिल गुप्ता, प्रदीप कथूरिया, नीरज बत्रा आदि कई राइस मिलर्स शामिल रहे। कुल मिलाकर करनाल में धान की खरीद एक बार फिर पटरी से उतर गई है। इसमें
राइस मिलर्स ने बाहर जाने के गेटपास जारी नहीं होने की समस्या रखी थी, जिस पर अधिकारियों ने चंडीगढ़ बात करके पोर्टल को दुरुस्त करा वीरवार की शाम तक 201 ट्रकों व ट्रालियों को बाहर जाने के ऑनलाइन गेटपास जारी कर दिए गए हैं। सभी ट्रकों, ट्रालियों को मंडी के बाहर निकाल दिया गया है। अब राइस मिलर्स को नियमित खरीद करनी चाहिए।
-चंद्रप्रकाश सचिव, अनाज मंडी करनाल।
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करनाल। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने राइस मिलर्स की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आश्वस्त कर दिया था लेकिन करनाल जिले में राइस मिलर्स 24 घंटे भी अनाज मंडियों में नहीं रुके। धान को मंडियों से बाहर ले जाने के लिए ऑनलाइन पास जारी न होने, मंडियों में नए धान के लिए जगह न मिलने आदि समस्याओं को लेकर वीरवार सुबह से ही राइस मिलर्स ने मंडियों में धान खरीद करने से इनकार कर दिया। जिससे धान से मंडियां अटी हैं।
इसके बाद एक होटल में करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की बैठक कर तय किया गया कि जब तक खरीदा गया धान उनके मिलों में नहीं पहुंच जाता, तब तक वह मंडियों में आकर धान नहीं खरीदेंगे। यदि खरीद एजेंसी धान की खरीद कर ट्रांसपोर्टर के जरिए धान को राइस मिलों तक पहुंचाती है, तो मिलर्स धान लेने को तैयार हैं।
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सबसे बड़ा मुद्दा धान में अधिक नमी का है। जो धान तीन से पांच अक्तूबर तक खरीद एजेंसियों ने खरीदा है, उसे राइस मिलर्स को अभिलेखों में आवंटित तो कर दिया गया लेकिन सीएमआर के लिए राइस मिलर्स ने पंजीकरण ही आज कराया है। यही कारण है कि ऑनलाइन गेटपास नहीं कट रहे थे। राइस मिलर्स चाहते हैं कि पहले की तरह मैन्युअल गेटपास जारी किए जाएं। लेकिन सरकार ने गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए ऑनलाइन गेटपास जारी होने के बाद ही फसल को मंडी से बाहर ले जाने के आदेश दिए हैं।
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250 से अधिक ट्रक और ट्रालियों में भरा है धान
परिणाम यह है कि 250 से अधिक ट्रक व ट्रालियों में धान भरा है, लेकिन ऑनलाइन गेट पास जारी न हो पाने के कारण दो दिन से करनाल अनाज मंडी गेट पर बाहर जाने के इंतजार में फसल खड़ी है। लिफ्टिंग न होने के कारण अनाज मंडी फुल हो गई। यही कारण है कि मंडी में धान लेकर आने वाले किसानों की लाइन लंबी हो गई है। बाहरी गेटपास में देरी के विरोध में सिर्फ 24 घंटे बाद ही राइस मिलर्स ने धान खरीद से फिर हाथ खींच लिए हैं। वीरवार को पूरे दिन राइस मिलर्स ने खरीद नहीं की। हालांकि मार्केटिंग बोर्ड के क्षेत्रीय प्रशासक गगनदीप सिंह, जिला विपणन एवं प्रवर्तन अधिकारी ईश्वर राणा, सचिव चंद्रप्रकाश आदि ने राइस मिलर्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, इसमें तो राइस मिलर्स ने हामी भर दी लेकिन बाहर निकलते ही फिर मुकर गए। इसी दौरान करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने प्रधान विजय टक्कर व विनोद गोयल की अध्यक्षता में एक होटल में बैठक की। जिसमें तय किया गया कि जब तक लिफ्टिंग नहीं होती, खरीदा गया धान मिलों में नहीं पहुंच जाता, तब तक राइस मिलर्स मंडियों में जाकर धान नहीं खरीदेंगे। एजेंसियों के निरीक्षक चाहें तो धान खरीदें, ट्रांसपोर्टर के माध्यम से धान को उनके राइस मिलों में पहुंचा दें तो वह धान ले लेंगे। बैठक में राजेंद्र रहेजा, निशांत राणा, डा.अनिल गुप्ता, प्रदीप कथूरिया, नीरज बत्रा आदि कई राइस मिलर्स शामिल रहे। कुल मिलाकर करनाल में धान की खरीद एक बार फिर पटरी से उतर गई है। इसमें
राइस मिलर्स ने बाहर जाने के गेटपास जारी नहीं होने की समस्या रखी थी, जिस पर अधिकारियों ने चंडीगढ़ बात करके पोर्टल को दुरुस्त करा वीरवार की शाम तक 201 ट्रकों व ट्रालियों को बाहर जाने के ऑनलाइन गेटपास जारी कर दिए गए हैं। सभी ट्रकों, ट्रालियों को मंडी के बाहर निकाल दिया गया है। अब राइस मिलर्स को नियमित खरीद करनी चाहिए।
-चंद्रप्रकाश सचिव, अनाज मंडी करनाल।