फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   when will the government improve sita mata

पीएम साहब सीता मंदिर की तरफ भी ध्यान दो

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 01:48 AM IST
विज्ञापन
when will the government improve sita mata
सैकड़ों साल इंतजार के बाद पांच अगस्त 2020 को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण की नींव रखी, ऐसे में श्रद्धालुओं में अब सीतामाई मंदिर के पुनरुद्धार की आस जगी है। हाल यह है कि सीतामाई मंदिर की 619 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर 35 साल से कोर्ट में केस चल रहा है, वहीं 13 साल पहले कोर्ट ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सीता माता मंदिर कमेटी बनाने की मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन आज तक कमेटी नहीं बनाई गयी। इस कारण मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। राममंदिर शिलान्यास के बाद अब ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री से सीतामाता मंदिर के सुध लेने की गुहार लगाई है।
विज्ञापन

करनाल जिले में सीतामाई का प्राचीन मंदिर सरकार और प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। मान्यता है कि यह देवी सीता का एकमात्र मंदिर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि यही वो स्थल है जहां पृथ्वी में सीता माता समा गयी थी। प्राचीन और पौराणिक महत्व के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से आज तक सीता माता मंदिर की सुध नहीं ली गयी है। यही कारण है कि गांव सीतामाई में स्थित सीतामाता मंदिर खंडहर होता जा रहा है। जहां पर कभी हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती थी, आज वहां पर कोई देखने को तैयार नहीं। मंदिर की हालत इतनी जर्जर हो गई है कि आमजन का जाना मौत को दावत देने के समान है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर अब भी मंदिर की सुध नहीं ली गयी तो वो दिन दूर नहीं जब माता सीता की तरह की मंदिर में विलुप्त हो जाएगा।
विज्ञापन

माता सीता से ही पड़ा गांव का नाम सीतामाई-
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण अजमेर के एक ऊंट व्यापारी ने करवाया था, जिसने मंदिर के नाम 1200 एकड़ जमीन दान में दी थी। ये बहुत ऐतिहासिक मंदिर है जहां कभी देश-विदेश से लोग दर्शन के लिए आते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंदिर के बैंक खातेे में करोड़ो रुपये जमा
मंदिर के नाम 619 एकड़ जमीन थी जिसमें से 27 एकड़ जमीन ही रह गई है। शेष जमीन की प्रशासन द्वारा बोली करवाकर राशि को मंदिर के नाम से बैंक खाते में जमा करवाई जाती है। बताया जा रहा है कि मंदिर के बैंक खाते में अब तक करोड़ो रुपये जमा हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने की थी 1 करोड़ 30 लाख की घोषणा, नहीं हुआ कार्य शुरू
28 सितम्बर 2018 को प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिक्रमा में पड़ने वाले करनाल जिले के 13 तीर्थ स्थलों के विकास एवं जीर्णोद्घार के लिए करीब 18 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की थी, जिसमें गांव सीतामाई के वेदवती तीर्थ यानि सीतामाता मंदिर के सौंदर्यीकरण विकास के लिए भी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सभी तीर्थ स्थलों में महिमा पट्ट, शौचालय, महिलाओं के लिए अलग से घाट, भक्तजनों की सुविधा के अनुसार सीढ़ियों का निर्माण, सरोवरों में जल निकासी के प्रावधान के साथ चारदीवारी व पार्किंग व्यवस्था तथा हाईमास्क लाईटें लगवाई जाएंगी। घोषणा के डेढ़ साल के बाद 4 मार्च 2020 को जिला उपायुक्त ने सीतामाई मंदिर का निरीक्षण करके 1 करोड़ 30 लाख से वेदवती तीर्थ के जीर्णोद्धार व सर्वांगीण विकास करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए थे।

सेशन कोर्ट से दे रखी मंजूरी, नहीं बनी कमेटी
मंदिर की जमीन को बचाने के लिए गांववासी जिले सिंह, राजपाल, ईषम सिंह, रामकुमार, हुक्म सिंह, गजे सिंह, राज सिंह, समे सिंह, राम सिंह, मदन सिंह, गोपी राम व दारा सिंह का कहना है कि आज से पूर्व 35 साल पहले मंदिर की 619 एकड़ भूमि से कब्जा छुड़वाने के लिए केस दायर किया था जोकि अभी हाईकार्ट में विचारधीन है। उन्होंनेे बताया कि 35 साल से मंदिर की जमीन को बचाने का प्रयास करते हुए कई लोग दुनिया से विदा हो गये, लेकिन प्रशासन और सरकार ने सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि मंदिर की व्यवस्था बनी रहे इसके लिए कोर्ट से गांव की कमेटी बनाने की मंजूरी दी गयी थी, लेकिन आज तक इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed