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Karnal News: पश्चिमी संस्कृति ने तोड़े संयुक्त परिवार, डिजिटल हुए रिश्ते

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 May 2025 02:45 AM IST
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Western culture broke the joint family, relationships became digital
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस आज
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। परिवार केवल सामाजिक संरचना नहीं, हर व्यक्ति की पहली पाठशाला और भावनात्मक सुरक्षा का स्तंभ होता है लेकिन आज संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं। अब सिर्फ सुनने को मिलते हैं। रिश्ते डिजिटल हो रहे हैं, पारिवारिक संवाद मोबाइल स्क्रीन पर सिमट गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस महज एक तारीख नहीं बल्कि आत्मविश्लेषण का दिन भी बन गया है। आज की युवा पीढ़ी संयुक्त परिवार में रहने के बजाय एकल परिवार को अपना रही है। मनोविशेषज्ञ का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण लोगों का पश्चिमी संस्कृति की ओर तेजी से झुकाव होना भी है।

परिवारों में संवाद की कमी
डीएवी कॉलेज की समाजशास्त्र की प्रोफेसर पूनम पांचाल ने बताया कि 90 के दशक के बाद से संयुक्त परिवारों का विघटन तेजी से शुरू हुआ है। हर बड़ा परिवार अब एकल में अधिक रहना पसंद करता है। पारिवारिक माहौल का असर बच्चों की शिक्षा से ज्यादा उनके व्यवहार और सोच पर हो रहा है। एक ओर जहां परिवारों में संवाद की कमी बच्चों को अकेलापन और चिड़चिड़ापन दे रही है वहीं, दूसरी ओर आधुनिक तकनीक ने परिवारों में दूरियां बढ़ा दी हैं। पश्चिमी जीवन शैली को अपनाना और पीढ़ियों के बीच सोच का अंतर होने से भी परिवारों का विघटन अधिक हो रहा है।
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सप्ताह में एक बार दादा-दादी से मिलें

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य सिंधू बताती हैं कि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पांच से छह ऐसे बच्चे आते हैं जो अकेलेपन की वजह से कई तरह के नशे अपना रहे हैं। सबसे बड़ा कारण संयुक्त परिवारों के बजाय एकल परिवारों में रहना है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को सप्ताह में कम से कम एक बार दादा-दादी और अन्य परिवार के सदस्यों से जरूर मिलवाएं ताकि वह उनसे मानसिक रूप जुड़ सकें।
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रुपये कमाने की बढ़ी होंड़
कृष्णा राम ने बताया कि उनके समय में संयुक्त परिवार हुआ करते थे जिसमें परिवार का हर सदस्य संस्कारों में रहकर जीवन व्यतीत करता था, लेकिन आज के लोगों में पैसा कमाने की होंड इतनी हो चुकी है कि स्वयं के बच्चे माता-पिता को वृद्ध आश्रमों में छोड़ देते हैं। एकल परिवार में रहकर हर व्यक्ति संस्कार में रहना भूल रहा है जिसका मुख्य कारण पैसा और बदलता आधुनिक दौर है।


आज सभी को चाहिए स्वतंत्रता
रोशनलाल ने कहा कि वह अपने छोटे बेटे के साथ रहते हैं जबकि उनका 20 से 22 लोगों का परिवार है, लेकिन परिवार का सदस्य एकल परिवार में रह रहा है। इसका मुख्य कारण है कि लोग अपनी स्वतंत्रता को लेकर अधिक चिंतित हो गए हैं। उन्हें लगता है कि संयुक्त परिवार में रहकर वह आजादी नहीं मिलती जो उन्हें अलग रहकर मिल रही है।


पहले मिलकर कमाता था परिवार
जगमोहन ने बताया कि आज का युवा विदेशों में रहकर धन कमा रहे हैं। पहले पूरा परिवार मिलकर कमाता था जिसमें हर जिम्मेदारी को बांट दिया जाता था, लेकिन आज हर व्यक्ति जिम्मेदारी से भागता है। संयुक्त परिवार में रहने से बच्चों में संस्कार बने रहते थे वहीं, आज हर व्यक्ति अपने संस्कारों में न रह कर विदेशों के संस्कारों को तेजी से अपना रहा है।



एकल परिवारों की बढ़ी संख्या
जवाहर लाल ने बताया कि संयुक्त परिवार में सभी को अपने संस्कार और परिवार की महत्ता पता होती थी। वहीं, आज के दौर में एकल परिवार में कामकाजी माता-पिता हैं जिससे आने वाली युवा पीढ़ी की सोच खुद ऐसी हो रही है कि वह परिवार में रहना ही पसंद नही कर रहे हैं। वह दादा- दादी, चाचा-चाची और ताऊ-ताई के रिश्तों को समझते ही नहीं जो कि अपने आप में चिंता का विषय है।
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